● नितिन गडकरी ने कहा, ‘भारत वैश्विक समुद्री मानचित्र पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है’
भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने अप्रैल-नवम्बर 2017 के दौरान 3.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और इस दौरान कुल मिलाकर 439.66 मिलियन टन कारगो का संचालन किया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 424.96 मिलियन टन कारगो का संचालन किया गया था।
अप्रैल-नवम्बर, 2017 के दौरान 9 बंदरगाहों (हल्दिया सहित कोलकाता, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई, कोच्चि, न्यू मंगलोर, मुंबई, जेएनपीटी और कांडला) ने अपने यहां यातायात में बढ़ोतरी दर्ज की है।
● प्रमुख बंदरगाहों पर कारगो यातायात का संचालन :
कोचीन बंदरगाह ने सर्वाधिक (17.93 प्रतिशत) वृद्धि दर्ज की। इसके बाद पारादीप (13.13 प्रतिशत), हल्दिया सहित कोलकाता (12.64 प्रतिशत), न्यू मंगलोर (7.07 प्रतिशत) और जेएनपीटी (5.69 प्रतिशत) का नम्बर आता है।
कोचीन बंदरगाह पर वृद्धि मुख्यत: पीओएल (25.15 प्रतिशत) और कंटेनरों (10.46 प्रतिशत) के यातायात में बढोतरी की बदौलत संभव हो पाई। अन्य तरल पदार्थों (-26.24 प्रतिशत), उर्वरकों का कच्चा माल अथवा एफआरएम (-23.33 प्रतिशत), तैयार उर्वरकों (-11.76 प्रतिशत) और अन्य विविध कारगो (-1.19 प्रतिशत) के यातायात में कमी दर्ज की गई।
कोलकाता बंदरगाह पर कुल मिलाकर 12.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कोलकाता डॉक सिस्टम ने 4.33 प्रतिशत की यातायात वृद्धि दर्ज की, जबकि हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (एचडीसी) ने 16.70 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई।
अप्रैल-नवम्बर 2017 के दौरान कांडला बंदरगाह ने सर्वाधिक यातायात अर्थात 72.03 मिलियन टन (16.38 प्रतिशत हिस्सेदारी) का संचालन किया। इसके बाद 64.97 मिलियन टन (14.78 प्रतिशत हिस्सेदारी) के साथ पारादीप बंदरगाह, 26 मिलियन टन (9.48 प्रतिशत हिस्सेदारी) के साथ जेएनपीटी, 42.33 मिलियन टन (9.63 प्रतिशत हिस्सेदारी) के साथ मुंबई बंदरगाह और 40.95 मिलियन टन (9.31 प्रतिशत हिस्सेदारी) के साथ विशाखापत्तनम का नम्बर आता है। इन पांचों बंदरगाहों ने आपस में कुल मिलाकर प्रमुख बंदरगाह यातायात के तकरीबन 60 प्रतिशत का संचालन किया।
पीओएल की जिंस-वार प्रतिशत हिस्सेदारी अधिकतम अर्थात 34.02 प्रतिशत आंकी गई। इसके बाद कंटेनर (19.89 प्रतिशत), थर्मल एवं स्टीम कोयला (13.07 प्रतिशत), अन्य विविध कारगो (12.37 प्रतिशत), कोकिंग कोल एवं अन्य कोयला (7.47 प्रतिशत), लौह अयस्क एवं छर्रे (6.58 प्रतिशत), अन्य तरल पदार्थों (4.22 प्रतिशत), तैयार उर्वरक (1.28 प्रतिशत) और एफआरएम (1.10 प्रतिशत) का नम्बर आता है।
शिपिंग मंत्रालय ने वैश्विक समुद्री मानचित्र पर भारत की मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। एक मजबूत वैधानिक रूपरेखा प्रदान करने, क्षमताएं सृजित करने, लोगों को कौशल प्रदान करने और देश में समुद्री क्षेत्र के विकास हेतु अनुकूल कारोबारी माहौल बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।
हाल ही में केंद्रीय शिपिंग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के परिसर में 970 करोड़ रुपये की लागत वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा (आईएसआरएफ) की आधारशिला रखी है, जिससे कोच्ची एक वैश्विक जहाज मरम्मत केंद्र (हब) के रूप में उभर कर सामने आएगा। ‘सागरमाला’ कार्यक्रम के तहत समुद्री क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक विश्वस्तरीय समुद्री एवं जहाज निर्माण उत्कृष्टता केंद्र (सीईएमएस) की भी स्थापना की जा रही है, जिसके परिसर विशाखापत्तनम और मुंबई में हैं।