ऊन की दुकान से, बुनेगी शहर के विकास का सपना



--संतोष यादव,सुल्तानपुर।
ऊन की दुकान करने वाली एक साधारण गृहणी भाजपा की आम कार्यकर्ता के हाथो शहर की सरकार की कमान होगी।उन्होंने भी खुद सोचा नही था कि एक दिन उनकी जिन्दगी में ऐसा अवसर भी आएगा। परिजनों को भी सपने में भी ऐसी कोई उम्मीद नही थी।लेकिन पार्टी ने अपने इस साधारण कार्यकर्ता पर भरोसा जता पार्टी का टिकट दिया तो वह भी जनता का भरोसा जीतने में कामयाब रही।आज वह सुल्तानपुर नगर पालिका की आजादी के बाद पहली महिला अध्यक्ष होने का गौरव हासिल कर एक नई इबारत लिखने की तैयारी में है।नारी सशक्तिकरण की मिसाल बनी सुल्तानपुर नगर पालिका अध्यक्ष बबिता जायसवाल ने अपनी जैसी और महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन कर उभरी है।
मूलता झारखण्ड के धनबाद की रहने वाली बबिता जायसवाल शादी बाद अपने ससुराल सुल्तानपुर पहुँची तो राजनीति का ककहरा अपने पति अजय से सीखा।बबिता जायसवाल के ससुर स्व0 हृदय नरायन जायसवाल पुराने संघी रहे वे जनसंघ के संस्थापक सदस्य के साथ पहले नगर व जिला महामंत्री भी रहे। बबिता के पति अजय जायसवाल वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य है,और भाजपा संगठन में भी कई पदों पर रह चुके है।संगठन के सदस्यता अभियान में लगे अजय जायसवाल ने ही 1990 में बबिता को पहली बार भाजपा का सदस्य बनाया।बाद में अपनी क्षमता के बल पर वह संगठन में जिला मंत्री,उपाध्यक्ष,पद को सुशोभित किया।वर्तमान में वह जिला कोषाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत है।साथ ही इनरव्हील क्लब,सहेली,बनवासी कल्याण आश्रम,सुन्दर काण्ड महिला संगठन,सहित कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़कर सेवा कार्यो को गति दे रही है,वही रामराजी सरस्वती बालिका इंटर कालेज की बतौर प्रबंधक वह बालिकाओं को प्रोत्साहित कर रही है।
परिवार का पार्टी से पुराना जुड़ाव व बबिता की पार्टी के प्रति निष्ठां,समर्पण व उनकी क्षमता का ही नतीजा रहा कि पार्टी में नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की एक लम्बी फेहरिस्त होने के वावजूद उन पर भरोसा जताया तो बबिता ने भी उस भरोसे को कायम रखा और लम्बे मतों के अंतराल से आजादी के बाद पहली महिला नगर पालिकाध्यक्ष होने का गौरव हासिल कर एक मिसाल बनी।
बकौल "बबिता वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की राष्ट्रीय नेता सुषमा स्वराज की चुनावी सभा में पदाधिकारी होने के नाते उनके साथ मंच साझा करने व सम्बोधन का अवसर मिला,तो मेरी इच्छाशक्ति और बढ़ी।वावजूद इसके अपने कार्य पर भरोसा रखा पद की लालसा कभी नही रही" परिवार,दुकान से आगे बढ़ी बबिता से अब नगरवासियों की भी ढेर सारी उम्मीदें बढ़ी है।उन उम्मीदों पर वह कितना खरा उतरती है यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन कुछ अलग करने की उनकी ललक साफ देखी जा सकती है।
बबिता कहती है कि नगर को स्वच्छ एवं सुन्दर बनाना,सड़को को अतिक्रमण से मुक्त रखना,जिले को नई पहचान दिलाना,मेरा सपना है,सुल्तानपुर जिले का नया नामकरण कुशभुवनपुर हमारी प्राथमिकता में है।सभी के साथ मिलकर कुछ बेहतर करने की कोशिश करेगे।

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