--- रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।
लोगों में पुराने सिक्कों को लेकर खासा उत्साह देखा जाता है। किसी पुराने सिक्के की कीमत कुछ हजार तो किसी की कीमत लाखों में है, यह सुनकर लालायित लोग ऐसे प्राचीन और दुर्लभ सिक्के खरीद लेते हैं। लेकिन उन सिक्कों को जब बाजार में बेचने जाते हैं तब वास्तविकता का पता चलता है। खरीदने वाले बताते हैं कि यह सिक्का तो जाली है इसलिए कुछ भी नहीं मिलेगा। दुर्लभ सिक्कों को चाहने वालों को मालूम हो कि इस्ट इंडिया कंपनी की ओर से 1616 या 1818 में बनाए गए सिक्के दुर्लभ हैं। इसका एक कारण तो यह है कि उसमें कीमती धातु का प्रयोग किया गया होगा, दूसरे पुरातनता के कारण उसकी कीमत वैसे ही ज्यादा होगी। लालच के वश में लोग यह सोचने का कष्ट नहीं करते कि इस्ट इंडिया कंपनी राम-सीता की फोटो वाले सिक्के क्यों बनाएगी ?
मालूम हो कि कुछ लोग तो पुराने पांच रुपए के ऐसे नोट की तलाश में रहते हैं, जहां पांच हिरण की तस्वीर दिखाई दे। कहा जाता है कि ऐसे नोटों की कीमत बहुत ज्यादा है। न्युमिसमैटिक सोसाइटी आफ इंडिया की ओर से ऐसे लोगों को जागरुक करने के लिए बालीगंज में 22 से लेकर 24 दिसंबर तक ऐसी प्रदर्शनी का आयोजन किया है जिसमें असली सिक्कों के साथ जाली सिक्कों की भी प्रदर्शनी की जाएगी। इस दौरान मोहम्मद बिन तुगलक के जमाने के सिक्कों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया जाएगा। सिक्काबंदी का एलान करने के बाद तुगलक ने कहा था कि मेरी मुद्रा लौटाने वाले को चांदी के सिक्के प्रदान किए जाएंगे। ऐसे में लोगों की ओर से जाली सिक्के बनाकर राजकोश में जमा किए जाने लगे जिससे राजकोष का खजाना खाली हो गया।