मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी



(•1•) मंत्रिमंडल ने 2017-18 से 2019-20 की अवधि के लिए ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ को मंजूरी दी

20 दिसम्बर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने संगठित क्षेत्र में कताई और बुनाई को छोड़कर कपड़ा क्षेत्र की समूची मूल्य श्रृंखला को शामिल करते हुए एक नई कौशल विकास योजना को मंजूरी दी है। इसे ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ नाम दिया गया है। इस योजना को 1300 करोड़ रुपये के लागत-खर्च के साथ 2017-18 से लेकर 2019-20 तक की अवधि के लिए स्वीकार किया गया है। इस योजना में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सामान्य मानकों के आधार पर राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होंगे।

योजना का उद्देश्य संगठित कपड़ा क्षेत्र और उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के संबंध में उद्योग के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए मांग आधारित, प्लेसमेंट संबंधी कौशल कार्यक्रम, कपड़ा मंत्रालय के संबंधित संगठनों के माध्यम से कौशल विकास और कौशल उन्नयन को प्रोत्साहन देना तथा देशभर के हर वर्ग को आजीविका प्रदान करना है।

● कौशल कार्यक्रम का क्रियान्वयन इस प्रकार किया जाएगा-

• श्रम शक्ति की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कपड़ा उद्योग/इकाई द्वारा,

• कपड़ा उद्योग/इकाईयों के साथ रोजगार समझौते के तहत प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान द्वारा,

• और कपड़ा उद्योग/इकाईयों के साथ रोजगार समझौते के संबंध में कपड़ा मंत्रालय/राज्य सरकारों के संस्थानों द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।

● योजना के तहत निम्नलिखित रणनीति अपनाई जाएगी-

• संबंधित कार्य को ध्यान में रखते हुए कौशल लक्ष्य के विभिन्न स्तरों यानी प्रवेश स्तर के पाठ्यक्रम, कौशल उन्नयन, निरीक्षण, प्रबंधन प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए उन्नत पाठ्यक्रम सहित कौशल विकास, प्रशिक्षण, उद्यमशीलता विकास के आधार पर रणनीति अपनाई जाएगी।

• उद्योग के साथ सलाह करके समय-समय पर कौशल की आवश्यकताओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

• कार्यक्रम के क्रियान्वयन के हर पक्ष के संचालन के लिए वेब आधारित निगरानी की जाएगी।

• हथकरघा, हस्तशिल्प, पटसन, रेशम इत्यादि जैसे परम्परागत क्षेत्रों की कौशल संबंधी जरूरतों पर संबंधित क्षेत्रीय उपखंडों/संगठनों के जरिए विशेष परियोजनाओं के स्वरूप पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा ‘मुद्रा’ ऋणों के प्रावधानों के जरिए उद्यमशीलता के विकास के संबंध में कौशल उन्नयन को समर्थन दिया जाएगा।

• नतीजों की पड़ताल के लिए सफल प्रशिक्षुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। मान्यता प्राप्त मूल्यांकन एजेंसी द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।

• प्रमाणित प्रशिक्षुओं में से कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को दिहाड़ी रोजगार वर्ग में रखा जाएगा। योजना के तहत रोजगार मिलने के पश्चात उन पर अनिवार्य रूप से नजर रखी जाएगी।

• इस क्षेत्र में प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि को ध्यान में रखते हुए सभी भागीदार संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निर्वारण) अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति का गठन करने संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे, तभी वे इस योजना के तहत वित्तपोषण के पात्र होंगे।

यह योजना देशभर में समाज के सभी वर्गों के लाभ के लिए लागू की जाएगी, जिसमें ग्रामीण, दूर-दराज के इलाके, वामपंथ उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, पूर्वोत्तर तथा जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगों, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों को वरीयता दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि 12वीं योजना के दौरान कपड़ा मंत्रालय के द्वारा क्रियान्वित कौशल विकास की तत्कालीन योजना के तहत 10 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं थी। इस योजना के तहत परिधान उद्योग एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार मिलता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए योजना में इसे शामिल किया गया है।

आशा कि जाती है कि योजना के जरिए कपड़ा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न वर्गों में 10 लाख लोगों का कौशल विकास होगा और उन्हें प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इनमें से एक लाख लोग परम्परागत क्षेत्रों में होंगे।

● पृष्ठभूमि

कपड़ा मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम दो वर्षो के दौरान पायलट योजना के रूप में एकीकृत कौशल विकास योजना को शुरू किया था। इसका लागत-खर्च 272 करोड़ रुपये थी, जिसमें 229 करोड़ रुपये सरकार का अंशदान था। इसके तहत 2.56 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। इस योजना को 15 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए 1900 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जारी रखा गया था। उल्लेखनीय है कि एकीकृत कौशल विकास योजना, उद्योग संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कपड़ा उद्योग में कुशल श्रम शक्ति की बड़ी कमी को पूरा करती है। योजना का क्रियान्वयन तीन घटकों के माध्यम से किया गया है। इसमें निजी-सार्वजनिक भागीदारी प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत मांग आधारित कुशल विकास इको-प्रणाली को स्थापित करने में उद्योग के साथ भागीदारी विकसित की गई है। योजना के तहत अब तक 10.84 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है इनमें 10.12 लाख लोगों का आकलन किया गया है और 8.05 लाख लोगों का प्लेसमेंट हुआ है। योजना को मुख्यतः कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सामान्य मानदंडों के अनुरूप तैयार किया गया है।


(•2•) मंत्रिमंडल ने अन्य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्गीकरण संबंधी मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग की समयावधि को बढ़ाए जाने की मंजूरी दी 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अन्य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्गीकरण संबंधी मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग की समयावधि को बढ़ाए जाने को मंजूरी दी है। आयोग की समयावधि 12 सप्ताह, यानी 02 अप्रैल, 2018 तक बढ़ा दी गई है। समयावधि बढ़ाए जाने से आयोग विभिन्न हितधारकों से बातचीत करने के बाद अन्य पिछड़ा वर्गो के उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर एक सम्पूर्ण रिपोर्ट सौंपने में सक्षम होगा।

आयोग को संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत राष्ट्रपति के अनुमोदन से 02 अक्टूबर, 2017 गठित किया गया था। उस समय तय किया गया था कि आयोग अध्यक्ष द्वारा कार्यभार संभालने के 12 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा।

● पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्रीमती जी. रोहिणी की अध्यक्षता में आयोग ने 11 अक्टूबर, 2017 को अपना काम शुरू कर दिया था। उस समय से अब तक आयोग ने आरक्षण वाले सभी राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों तथा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोगों के साथ बातचीत की है। आयोग ने पिछले तीन वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्गों के प्रवेश के संदर्भ में 197 उच्च शिक्षा संस्थानों से आंकड़े तलब किए हैं। आयोग ने सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, वित्तीय संस्थानों और केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग सदस्यों के रोजगार संबंधी आंकड़े भी मांगवाए है, ताकि इनके आरक्षण की असमानता का आकलन किया जा सके। इस आकलन के तहत अन्य पिछड़ा वर्गों की केन्द्रीय सूची में शामिल जातियां/समुदाय शामिल हैं।

व्यापक रिपोर्ट तैयार करने के लिए इस कार्य में शामिल आंकड़ों की बहुतयात और उनके विश्लेषण में लगने वाले समय को देखते हुए आयोग ने अपनी समयावधि को 12 सप्ताह के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था।


(•3•) मंत्रिमडल ने सशस्त्र सीमा बल के कार्यकारी अधिकारियों को केन्द्रीय समूह ‘ए’ सेवा और संवर्ग प्रदान करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सशस्त्र सीमा बल के कार्यकारी अधिकारियों को केन्द्रीय समूह ‘ए’ सेवा और संवर्ग प्रदान करने को मंजूरी दी है। इसके तहत सहायक कमांडेंट से लेकर महानिरीक्षक स्तर के कुल 19 पदों के सृजन संबंधी समूह ‘ए’ वर्ग अधिकारियों की समीक्षा शामिल है, ताकि सशस्त्र सीमा बल की संचालन और प्रशासनिक क्षमताओं में बढ़ोतरी हो सके।

मौजूदा समूह ‘ए’ पदों को 1253 से बढ़ाकर 1272 किया जा रहा है। इसका ब्यौरा इस प्रकार है-

• महानिरीक्षक (एसएजी स्तर) के लिए 2 पदों की बढ़ोतरी

• उप-महानिरीक्षक/कमांडेंट (जेएजी स्तर) के लिए कुल 11 पदों की बढ़ोतरी

• उप-कमांडेंट (एसटीएस स्तर) के लिए 2 पदों की बढ़ोतरी

• सहायक कमांडेंट (जेटीएस स्तर) के लिए 4 पदों की बढ़ोतरी

● पृष्ठभूमि

सीमावर्ती क्षेत्रों की आबादी की सुरक्षा, राष्ट्रीय भावना को प्रोत्साहन देने और क्षेत्र में सुरक्षा माहौल में इजाफा करने के लिए सशस्त्र सीम बल का 1963 में गठन किया गया था। वर्ष 2001 में बल को केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कर दिया गया था। उसके बाद से बल भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की सुरक्षा में तैनात है। बल को वाम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों तथा जम्मू-कश्मीर और असम में खुफिया और सुरक्षा जिम्मेदारियां दी जाती हैं। बल में इस समय 96,093 कर्मी कार्यरत हैं, जिसमें 73 बटालियन हैं। इनमें दो राष्ट्रीय आपदा मोचन बल बटालियन भी शामिल हैं। इसके पहले बल की क्षमता उन्नयन और उसे चाक-चौबंद करने की कार्रवाई 2005, 2010 और 2011 में की गई थी।


(•4•) मंत्रिमडल ने स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में भारत तथा क्यूबा के बीच सहयोग संबंधी सहमति-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में भारत तथा क्यूबा के बीच सहयोग संबंधी सहमति-ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से मंजूरी दे दी। सहमति-ज्ञापन पर नई दिल्ली में 6 दिसंबर, 2017 को हस्ताक्षर किए गए।

सहमति ज्ञापन में निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग होगा-

• चिकित्सकों, अधिकारियों, अन्य स्वास्थ्य प्रोफेशनलों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और प्रशिक्षण

• मानव संसाधन और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास तथा स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों की स्थापना में सहायता

• स्वास्थ्य में मानव संसाधन का अल्पकालीन प्रशिक्षण

• औषध, चिकित्सा उपकरणों और सूचना के आदान-प्रदान के लिए नियम

• औषध और पक्षों द्वारा अन्य चिन्हित क्षेत्रों में व्यापार विकास अवसरों को प्रोत्साहन

• जेनेरिक और जरूरी दवाओं की उपलब्धता और दवा आपूर्ति के संबंध में सहायता

• स्वास्थ्य उपकरणों और औषधीय उत्पादों की उपलब्धता

• पारस्परिक निर्णय के अनुसार सहयोग के अन्य क्षेत्र

इस सहमति-ज्ञापन के क्रियान्वयन का जायजा लेने और समझौते के तहत अन्य विवरणों के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित किया जाएगा।


(•5•) मंत्रिमडल ने स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में भारत तथा इटली के बीच सहयोग संबंधी सहमति-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में भारत तथा इटली के बीच सहयोग संबंधी सहमति-ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से मंजूरी दे दी। सहमति-ज्ञापन पर नई दिल्ली में 29 नवंबर, 2017 को हस्ताक्षर किए गए।

सहमति ज्ञापन में निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग होगा-

• चिकित्सकों, अधिकारियों, अन्य स्वास्थ्य प्रोफेशनलों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और प्रशिक्षण

• मानव संसाधन और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास तथा स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों की स्थापना में सहायता

• स्वास्थ्य में मानव संसाधन का अल्पकालीन प्रशिक्षण

• औषध, चिकित्सा उपकरणों और सूचना के आदान-प्रदान के लिए नियम

• औषध और पक्षों द्वारा अन्य चिन्हित क्षेत्रों में व्यापार विकास अवसरों को प्रोत्साहन

• जेनेरिक और जरूरी दवाओं की उपलब्धता और दवा आपूर्ति के संबंध में सहायता

• स्वास्थ्य उपकरणों और औषधीय उत्पादों की उपलब्धता

• न्यूरो-कार्डियोवस्कुलर रोगों, कैंसर, सीओपीडी, मानसिक स्वास्थ्य और डीमेनशिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग और द्विपक्षीय हित के संबंध में गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम में सहयोग। इसमें एसडीजी-3 एवं संबंधित बिंदुओं पर जोर दिया गया है

• संचारी रोगों और जीवाणु जनित रोगों पर जलवायु परिवर्तन प्रभाव वाले क्षेत्रों में सहयोग

• एसडीजी-2 और पोषण सेवाओं के संबंध में कुपोषण (अतिपोषण और कमपोषण) सहित भोजन के पोषक पक्ष

• उत्पादन, स्थानांतरण, वितरण और खाद्य आपूर्ति की सुरक्षा

• खाद्य उद्योग संचालकों का प्रशिक्षण और अनुसंधान

• स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा तथा स्वस्थ भोजन आदतों पर नागरिकों को सूचित करना और जानकारी देना

• पारस्परिक निर्णय के अनुसार सहयोग के अन्य क्षेत्र।

इस सहमति-ज्ञापन के क्रियान्वयन का जायजा लेने और समझौते के तहत अन्य विवरणों के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित किया जाएगा।

(•6•) मंत्रिमंडल ने वड़ोदरा में भारत के पहले राष्‍ट्रीय रेल तथा परिवहन विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना को मंजूरी दी

• भारतीय रेल व्‍यापक तकनीकी और अवसंरचना उन्‍नयन के माध्‍यम से आधुनिकीकरण की राह पर।

• ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘स्किल इंडिया में योगदान तथा बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में सहायक।

• नवाचारी उद्यमिता को प्रोत्साहन तथा स्‍टार्ट अप इंडिया पहल को समर्थन।

• पढ़ाने के नवीनतम तरीके तथा प्रौद्योगिकी एप्‍लीकेशनों का उपयोग : नवीनतम तरीकों के इस्तेमाल से उच्‍चस्‍तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्‍ध कराया जा सकेगा।

• भारत अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकी तथा कुशल मानव शक्ति के बल पर वैश्विक नेता के रूप में उभरेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मानव संसाधनों में कुशलता तथा क्षमता सृजन के लिए वड़ोदरा में देश का पहला राष्‍ट्रीय रेल तथा परिवहन विश्‍वविद्यालय (एनआरटीयू) स्‍थापित करने की स्‍वीकृत दे दी है। प्रधानमंत्री द्वारा विश्वविद्यालय स्थापना का प्रस्तुत  प्रेरक नवाचारी विचार नये भारत की दिशा में रेल और परिवहन क्षेत्र में बदलाव का अग्रदूत होगा।

यह विश्‍वविद्यालय यूसीजी की नोवो श्रेणी (मानित विश्‍वविद्यालय संस्‍थान) नियमन, 2016 के अंतर्गत मानित विश्‍वविद्यालय के रूप में स्‍थापित होगा। सरकार अप्रैल 2018 तक सभी स्‍वीकृतियां देने तथा जुलाई-2018 में पहला शैक्षिक सत्र शुरू करने की दिशा में काम कर रही है।

रेल मंत्रालय कंपनी अधिनियम, 2013 के सेक्‍शन 8 के अंतर्गत लाभ नहीं कमाने वाली कंपनी बनाएगा, जो प्रस्‍तावित विश्‍वविद्यालय की प्रबंधक कंपनी होगी। कंपनी विश्‍वविद्यालय को वित्‍तीय तथा संरचना संबंधी समर्थन देगी और विश्‍वविद्यालय के कुलपति तथा प्रति-कुलपति की नियुक्ति करेगी। पेशेवर लोगों तथा शिक्षाविदों वाला प्रबंधन बोर्ड प्रबंधक कंपनी से स्‍वतंत्र होगा और उसे अपने सभी अकादमिक तथा प्रशासनिक दायित्‍व निभाने की स्‍वायत्‍ता होगी।

वड़ोदरा स्थित भारतीय रेल की राष्‍ट्रीय अकादमी (एनएआईआर) की वर्तमान जमीन और अवसंरचना का इस्‍तेमाल किया जाएगा और विश्‍वविद्यालय उद्देश्‍य के लिए इनमें आवश्‍यक संशोधन किया जाएगा। यह पूर्णकालिक संस्‍थान होगा और इसमें 3,000 पूर्णकालिक विद्यार्थी प्रवेश लेगें। नये विश्‍वविद्यालय/संस्‍थान का धन पोषण पूरी तरह रेल मंत्रालय करेगा।

यह विश्‍वविद्यालय भारतीय रेल को आधुनिकीकरण के रास्‍ते पर ले जाएगा और उत्‍पादकता बढ़ाकर तथा ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्‍साहन देकर परिवहन क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेता बनाने में सहायक होगा। विश्‍वविद्यालय कुशल मानव शक्ति संसाधन का पूल बनाएगा और भारतीय रेल में बेहतर सुरक्षा, गति और सेवा प्रदान करने के लिए अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिक का लाभ उठायेगा। विश्‍वविद्यालय टेक्‍नोलॉजी को सक्रिय करके तथा टेक्‍नोलॉजी प्रदान करके ‘स्‍टार्ट अप इंडिया’ तथा ‘स्किल इंडिया’ को समर्थन देगा तथा उद्यमियता को बढ़ावा देने के साथ-साथ बड़े स्‍तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। इससे रेलवे तथा परिवहन क्षेत्र में परिवर्तन होगा तथा लोगों और वस्‍तुओं की आवाजाही में तेजी आएगी। भारत वैश्विक साझेदारी और अत्‍याधुनिक टैक्‍नोलॉजी के माध्‍यम से विशेषज्ञता के वैश्विक केन्‍द्र के रूप में उभरेगा।

विश्‍वविद्यालय की योजना पढ़ाने के नये तरीकों तथा टैक्‍नोलॉजी एप्‍लीकेशनों (सैटेलाइट आधारित ट्रैकिंग, रेडियो फ्रीकवेंसी पहचान तथा कृत्रिम गुप्‍तचर) को अपनाने की है ताकि ऑन-जॉब कार्य प्रदर्शन तथा उत्‍पादकता में सुधार लाया जा सके। भारतीय रेल के साथ घनिष्‍ट सहयोग से हितधारकों की रेल सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी। यह ‘लाइव लैब’ के रूप में काम करेगा और वास्‍तविक जीवन की समस्‍याओं के निराकरण में सक्षम होगा। विश्‍वविद्यालय में अत्‍याधुनिक नवीनतम टैक्‍नोलॉजी की उच्‍च गति ट्रेन प्रदर्शित करने वाले ‘उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र’ होंगे।

● पृ‍ष्‍ठभूमि

प्रधानमंत्री ने अक्‍टूबर, 2016 में वड़ोदरा में रेल विश्‍वविद्यालय स्थापना के विषय में कहा था कि भारत सरकार ने बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके प्रभाव को अगली शताब्‍दी तक महसूस किया जाएगा और यह निर्णय वड़ोदरा में भारत का पहला रेल विश्‍वविद्यालय बनाने का है।

भारतीय रेल उच्‍च गति की ट्रेनें (बुलेट ट्रेन), व्‍यापक अवसंरचना आधुनिकीकरण, डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर, सुरक्षा पर फोकस जैसी महत्‍वाकांक्षी परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में चलने के लिए तैयार है। भारत में परिवहन क्षेत्र में अप्रत्‍याशित वृद्धि, योग्‍य मानव शक्ति की बढ़ती आवश्‍यकता तथा कौशल और क्षमता जैसे प्रेरक उपायों से विश्‍वस्‍तरीय प्रशिक्षण केन्‍द्र की आवश्‍यकता महसूस की गई है।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News