पश्चिम बंगाल 2017 : केंद्र व राज्य के बीच टकराव के लिए रहेगा याद



--- रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।

कोलकाता, 24 दिसंबर। पश्चिम बंगाल 2017 में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव इस स्तर तक पहुंच गया कि हद की परवाह भी पीछे छूट गई। तृणमूल कांग्रेस की ओर से जहां आरोप लगाया गया कि केंद्र ने हर मुद्दे पर उपेक्षा का रवैया अपनाते हुए आधारभूत ढांचे के लिए 13,714 करोड़ रुपये नहीं दिए, बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए 15000 करोड़ रुपये नहीं दिए वहीं राज्य का नाम बदलने का मुद्दा हो या गणतंत्र दिवस परेड में राज्य की झांकी पेश करने का मुद्दा हर जगह अड़ंगा लगाते हुए मंजूरी नहीं दी।

दूसरी ओर माकपा, कांग्रेस, भाजपा की ओर से डेंगू, राज्य में अपराध की घटनाओं, राजनीतिक हिंसा में विरोधियों पर हमला करने, विश्व बांग्ला के लोगों को लेकर राज्य सरकार को घेरा गया।

जीएसटी से राज्य को पहले चार महीनों में जहां 2000 करोड़ का घाटा हुआ, दार्जीलिंग में दो महीने से ज्यादा समय लगे बंद के कारण भारी घाटा हुआ। हालांकि इस दौरान वहां के समीकरण बदले और जीटीए की बागडोर बिमल गुरूंग के हाथ से फिसल कर विनय तमांग के हाथों जा पहुंची। डेंगू से हुई मौतों को लेकर भी भारी विवाद रहा। विरोधियों की ओर से जहां सौ से ज्यादा लोगों की मरने की बात की गई, वहीं राज्य का आंकड़ा 50 तक भी नहीं पहुंचा।

अंडर 17 फीफा विश्व कप फुटबाल का सफलतापूर्वक आयोजन करके जहां राज्य ने खासी वाहवाही लूटी, वहीं स्टार होटलों को भी भारी फायदा हुआ। कोलकाता के 14 स्टार होटलों ने 2755 कमरों में जहां 750 कमरों की वृद्धि का फैसला किया, वहीं किराया भी 6000-8000 हजार से बढ़ा कर 15000-18000 कर दिया और कमरे फिर भी लोगों को नहीं मिल रहे थे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से जहां भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को मजबूती प्रदान करने के लिए सिंगुर की बहुफसली जमीन किसानों को लौटाने के बाद कावाखाली की 11.44 एकड़ जमीन 52 किसानों को लौटाने का फैसला किया गया।

नोटबंदी का विरोध करते हुए जहां पुस्तक मेले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर जागो बांग्ला में नगदी के अलावा बीते साल पुस्तकों की बिक्री नहीं की गई। वहीं, मुख्यमंत्री ने एलान किया कि भले ही उनका मोबाइल बंद हो जाए, आधार से लिंक नहीं करवाएंगी। माओवादी प्रभावित जंगल महल में केद्रीय सुरक्षा बलों के लिए केंद्र ने 1600 करोड़ की मांग की थी, लेकिन राज्य ने यह रकम देने से इंकार कर दिया। तृणमूल सांसद सुलतान अहमद के निधन का कारण भी मुख्यमंत्री ने सीबीआइ  का नारदा मामले को लेकर दबाव बताया।

जनवरी के पहले हफ्ते हावड़ा जिले के उलबेड़िया में बैंक की लाइन में खड़े सनत बाग (42) की मौत राज्य में नोटबंदी के बाद मरने वाले तेरहवें व्यक्ति की मौत थी। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 31 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बंगाल का दूसरा नंबर रहा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जहां नोटबंदी से बेरोजगार हुए बंगाल के दूसरे राज्य के रहने वाले लोगों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की, वहीं राजस्थान के राजसमुंद में मालदा के एक मजदूर की हत्या के बाद जलाकर मार डालने वाले के परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद व परिवार को नौकरी देने का एलान किया गया। इसके पहले दार्जीलिंग में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से मुकाबले में मारे गए एसआइ की पत्नी को भी नौकरी दी।

कोलकाता के एक स्कूल में चार साल की बच्ची के यौन शोषण के मामले में दो पीटी शिक्षकों की गिरफ्तारी को भी विरोधियों ने मुद्दा बनाया। ब्लू व्हेल का किशोरों पर प्रभाव, तृणमूल में नंबर दो रहे मुकुल राय के भाजपा में शामिल होने के बाद विरोधियों का हमला और तेज हो गया।

भाजपा और ममता में कौन ज्यादा हिंदू समर्थक है, इस मुद्दे को लेकर भी साल भर रस्सा कस्सी जारी रही। राज्य का नाम बदलने पर केंद्र की निष्क्रियता का भी विरोध किया गया। सौ से ज्यादा पूजा पंडालों का दौरा व उद्घाटन करने के बाद दो लाख दर्शकों की मौजूदगी में पूजा कार्नीवल करने के साथ ही मुहर्रम के दिन मूर्ति विसर्जन पर रोक पर विरोधियों की ओर से अदालत में जीत हासिल करने के बाद भी तकरीबन सारी पूजा कमेटियों ने उस दिन विसर्जन करने से इंकार करते हुए 2 अक्टूबर को विसर्जन करके ममता को सबसे बड़ी हिंदू नेत्री के तौर पर स्थापित किया। छठ पूजा पर छुट्टी और हर साल की तरह कालीपूजा करके ममता ने अपनी हिंदू धार्मिक छवि को और ज्यादा मजबूत किया। सबंग उपचुनाव में जीतने के साथ ही भाजपा को तीसरे स्थान पर पहुंचा कर और जनवरी में 15000 पुरोहितों को लेकर सम्मेलन का मकसद भी लोगों में संकेत देना है कि तृणमूल कांग्रेस हिंदुओं की एकमात्र पार्टी है। 

हालांकि भाजपा की ओर से तुष्टीकरण, विश्व बांग्ला के लोगों को लेकर आरोप लगाए गए। जबकि अखिलेश यादव से लेकर हार्दिक पटेल तक संपर्क और लक्ष्मी निवास मित्तल के ममता के घर जाकर मुलाकात को खासी अहमियत मिली।

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