वर्षांत समीक्षा 2017- सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय



10 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

1.सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की दो इकाइयां हैं, एक सांख्यिकी और दूसरी कार्यक्रम क्रियान्वयन से संबंधित है। सांख्यिकी इकाई को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) कहा जाता है, जिसमें केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ), कंप्यूटर केंद्र और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) शामिल होता है। वहीं कार्यान्वयन क्रियान्वयन इकाई के तीन भाग होते हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं (1) 20 बिंदु कार्यक्रम (2) बुनियादी ढांचा निगरानी और परियोजना निगरानी और (3) संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना। इन दो इकाइयों के अलावा भारत सरकार (एमओएसपीआई) के एक संकल्प के माध्यम से एक राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग बनाया गया है और संसद के एक अधिनियम के माध्यम से स्वायत्त संस्थान भारतीय सांख्यिकी संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का एक संस्थान घोषित किया गया है।

2. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के साथ देश में जारी होने वाले आंकड़ों का प्रसार और गुणवत्तापूर्ण पहलुओं का महत्व जुड़ा हुआ है। जारी होने वाले आंकड़े प्रशासनिक स्रोतों, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कराए जाने वाले सर्वेक्षण एवं जनगणना और गैर आधिकारिक स्रोतों और अध्ययनों पर आधारित होते हैं। मंत्रालय द्वारा कराए जाने वाले सर्वेक्षण वैज्ञानिक नमूना प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं। समर्पित क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से ब्योरा जुटाया जाता है। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों की गुणवत्ता पर जोर देने के क्रम में राष्ट्रीय खातों के संकलन से संबंधित कार्यप्रणाली से संबंधित मुद्दों पर राष्ट्रीय खाता सलाहकार समिति, औद्योगिकी सांख्यिकी पर बनी स्थायी समिति, मूल्य सूचकांक पर बनी तकनीक सलाहकार समिति द्वारा नजर रखी जाती है। मंत्रालय मानकीकृत सांख्यिकी विधियों के इस्तेमाल और व्यापक जांच व निगरानी के बाद करंट डाटा के आधार ब्योरे का संकलन करता है।

3. भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के विशेष डाटा प्रसार मानकों (एसडीडीएस) का सदस्य है और फिलहाल इन मानकों का पालन कर रहा है। मंत्रालय एसडीडीएस के अंतर्गत आने वाली डाटा श्रेणियों के लिए ‘एडवांस रिलीज कैलेंडर’ का पालन करता है, जिसे आईएमएफ के प्रसार मानक बुलेटिन बोर्ड (डीएसबीबी) के साथ ही मंत्रालयों की वेबसाइट पर भी प्रसारित किया जाता है। मंत्रालय रियल सेक्टर के अंतर्गत आने वाले डाटा सेट्स को प्रेस नोट्स, पत्र सूचना कार्यालय और उसकी वेबसाइट के माध्यम से जारी करती है। मंत्रालय को भारत में सार्क सोशल चार्टर के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए नोडल मंत्रालय नियुक्त किया गया है। मंत्रालय प्रणाली में डाटा में अंतर और जारी होने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता के आकलन के लिए विभिन्न विषयों पर नियमित रूप से तकनीक बैठकों का आयोजन करता है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग, एशिया एवं प्रशांत जैसे अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संगठनों द्वारा सांख्यिकी संकलन और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं पर आयोजित बैठकों और सम्मेलनों में सीएसओ कर्मचारी भाग लेते हैं। भारत की सांख्यिकी प्रणाली दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में से एक है। मंत्रालयों के अधिकारी विशेषकर राष्ट्रीय खाता, अनौपचारिक क्षेत्र के आंकड़ों, व्यापक नमूना सर्वेक्षण, जनगणना, सेवा क्षेत्र के आंकड़े, गैर पर्यवेक्षित अर्थव्यवस्था, सामाजिक क्षेत्र सांख्यिकी, पर्यावरण सांख्यिकी और वर्गीकरण के क्षेत्रों में कार्यप्रणालियों के विकास पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ जुड़े हुए हैं। इन विषयों पर हुई अंतरराष्ट्रीय बैठकों में मंत्रालयों के अधिकारियों के योगदान को खासा सराहा गया।

4.बड़े नीतिगत फैसलों और कुशल एवं प्रभावी डाटा प्रबंधन और प्रसार के लिए नई तकनीक एवं प्रणालियों को स्वीकार करने के मामले में यह साल खासा अहम रहा। वर्ष 2017 के दौरान मंत्रालय की प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं:

l. आधिकारिक आंकड़ों पर संयुक्त राष्ट्र के बुनियादी सिद्धांत
संकलन की प्रक्रियाओं और आधिकारिक आंकड़ों के प्रसार में व्यावसायिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जून, 2016 के बाद स्वीकार किया गया
इन सिद्धांतों को अपनाने से आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली में जनता का भरोसा पैदा करने और कायम रखने में और जनहित के तौर पर आधिकारिक आंकड़ों को लेकर नागरिकों या उपयोगकर्ताओं का सम्मान हासिल करने में मदद मिलेगी।

II. जीडीपी और उससे संबंधित आंकड़ों के बेस ईयर में बदलाव

सीएसओ द्वारा जारी किए जाने वाले जीडीपी, बचत, पूंजीगत जानकारी आदि जैसे व्यापक आर्थिक आंकड़े देश की आर्थिक सेहत के संकेतक होते हैं;
2015 में राष्ट्रीय खातों के बेस ईयर को संशोधित करके 2004-05 से 2011-12 कर दिया गया है।
संशोधित सीरीज में सुधार में निम्नलिखित शामिल हैं-
- खनन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की 5.5 लाख कंपनियों से संबंधित कंपनी मामलों के कॉर्पोरेट सेक्टर के डाटा का इस्तेमाल किया गया

- राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के ताजा आंकड़ों का इस्तेमाल

- लोकल बॉडीज और स्वायत्त संस्थानों के कवरेज में सुधार

III. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के बेस ईयर में संशोधन

बेस ईयर में संशोधन के माध्यम से आईआईपी अनुमान में समय-समय पर बदलाव किया जाता है।
बेस ईयर को 2004-05 से 2011-12 करके 12 मई 2017 को आईआईपी की नई सीरीज जारी कर दी गई।
संशोधित सीरीज में कई साल के औद्योगिक क्षेत्र में ढांचागत बदलाव किया गया है।
आइटम/भारत और कारखानों की प्रक्रिया में बदलाव करके नई सीरीज सूचकांक को ज्यादा व्यापक और प्रतिनिधिक बना दिया गया है।

IV. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के बेस ईयर में संशोधन

सीपीआई की संशोधित की सीरीज को जनवरी, 2015 में पेश किया गया
बेस ईयर को 2010 से 2012 कर दिया गया
उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के मॉडिफाइड मिक्स्ड रिफरेंस पीरियड (एमएमआरपी) पर आधारित आइटम और भार की बास्केट अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अनुरूप है।
प्रमुख सूचकांकों के लिए बेस प्राइस से संबंधित कीमतों के ज्यामितीय माध्यमों का इस्तेमाल भी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अनुरूप है।
आवास किराये का नमूने के आकार से जुड़े डाटा को दोगुना बढ़ाकर 6,684 से 13,368 कर दिया गया।

V. आविधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस)

अभी तक भारत में व्यापक रोजगार सर्वेक्षण आम तौर पर 5 साल के अंतराल पर कराया जाता है।
कम अंतराल पर रोजगार के आंकड़े हासिल करने के लिए अप्रैल, 2017 में पीएलएफस की शुरुआत की गई।
पीएलएफएस के उद्देश्य हैं–

(i) शहरी क्षेत्रों में श्रम बाजार के सांख्यिकी संकेतकों में तिमाहीवार बदलाव का आकलन;

(ii) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों में श्रम बल के संकेतकों के वार्षिक अनुमान जारी करना।

§ पीएलएफएस का कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (सीएपीआई) के लिए किया जाएगा, जो फील्ड लेवल पर सीधे तौर पर डाटा एंट्री से जुड़ा होता है। इससे डाटा की उच्च स्तर की सटीकता और तेज प्रोसेसंग को बढ़ावा मिलेगा।

VI. सांख्यिकी संग्रह (संशोधन) विधेयक, 2017

§ सांख्यिकी संग्रह अधिनियम, 2008 एक केंद्रीय अधिनियम है, जो केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों को सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर आंकड़ों के संग्रह की अनुमति देता है।

§ यह अधिनियम जम्मू कश्मीर में लागू नहीं है।

§ इस विधायू शून्यता को दूसर करने के लिए 2017 के संसद के बजट सत्र के दौरान सांख्यिकी संग्रह (संशोधन) विधेयक, 2017 को संसद में पेश किया गया।



VIII. जीडीपी अनुमानों के अग्रिम रिलीज कैलेंडर में संशोधन

§ 2017 से पहले जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान आम तौर पर आम बजट पेश करने के तीन सप्ताह पहले यानी 7 फरवरी को जारी किया जाता था

§ जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमान में अगले साल का आम बजट तैयार करने के लिए कई अहम इनपुट शामिल होते थे

§ आम बजट 2017-18 पेश करने की तारीख 2017 में 28 फरवरी की जगह 1 फरवरी करने के साथ ही आम बजट पेश करने से ठीक पहले जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान 6 जनवरी, 2017 को उपलब्ध हो गया था।

§ इस रिलीज कैलेंडर में संशोधन को आगे के वर्षों में भी जारी रखा जाएगा।

IX. एनएसएसओ के सर्वेक्षण

एनएसएसओ ने कई सामाजिक-आर्थिक विषयों पर व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण कराए हैं
बीते तीन साल के दौरान एनएसएसओ द्वारा कराए गए सर्वेक्षण इस प्रकार हैं
घरेलू पर्यटन व्यय;

सेवाओं और टिकाऊ वस्तुओं पर घरेलू खपत व्यय;
विनिर्माण, व्यापार और अन्य सेवा क्षेत्र (निर्माण को छोड़कर) अनिगमित गैर कृषि उद्यम; और
सेवा क्षेत्र के उद्यम केंद्रित सर्वेक्षण
प्रक्रियाओं, ई-गवर्नैंस और डाटा प्रसार का मानकीकरण
§ सीएसओ की राष्ट्रीय खाता इकाई और एनएसएसओ की सर्वे डिजाइन एवं शोध इकाई को प्रदर्शन की गुणवत्ता के अनुपालन के लिए आईएसओ-9001: 2008 प्रमाणन दिया गया है।

§ मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से डाटा प्रसार से समग्र प्रयोज्य भागफल और तकनीक क्षमता में सुधार आया है

§ एमओएसपीआई द्वारा एनएसएस सर्वेक्षण, एएसआई और आर्थिक जनगणना आंकड़ों के प्रसार के वास्ते एक वेब आधारित सर्वे डाटा कैटलॉग/माइक्रो डाटा आर्काइव तैयार करने के लिए हाल में अपनाई गई आईएचएसएन टूलकूट अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अनुरूप है।

§ एनएसएस, एएसआई और आर्थिक जनगणना के डाटा के प्रसार के लिए स्थापित किया गया ई-रिसीट पोर्टल गेटवे भारतकोष भारतीय उपयोगकर्ताओं के इस्तेमाल के लिए है। गैर भारतीयों के वास्ते डाटा की आपूर्ति के लिए ऑनलाइन भुगतान प्रणाली शुरू करने की भी योजना है।

§ एनएसएसओ ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र और राष्ट्रीय दूरस्थ संवेदी केंद्र (एनआरएससी) के साथ सहयोग के माध्यम अर्बन फ्रेम सर्वे (यूएफएस) मैप्स के डिजिटलीकरण का काम भी कराया है। इससे आसानी से डाटा संग्रह के लिए सीमाओं की पहचान और चिह्नांकन में सुधार में मदद मिलेगी।

डाटा संग्रह में तकनीक का इस्तेमाल
टैबलेट के माध्यम से डाटा संग्रह के लिए कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्युइंग (सीएपीआई) को पीएलएफएस में इस्तेमाल किया जाएगा।
एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज (एएसआई) के लिए डाटा स्रोत से सीधेर पर डाटा संग्रह के लिए वेब पोर्टल
शहरी क्षेत्रों के लिए एनएसएसओ के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निश्चित डाक घरों द्वारा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के लिए ऑनलाइन डाटा जमा करना
इन उपायों से डाटा संकलन और उन्हें जारी करने में लगने वाले समय में कमी आई।
टिकाऊ विकास के लक्ष्य (एसडीजी)
§ सितंबर, 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकार किए गए ‘ट्रांसफॉर्मिंग ऑवर वर्ल्डः द 2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ में टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्य और 169 संबंधित लक्ष्य शामिल हैं, जिन्हें 2030 तक हासिल करना है

§ भारत ऐसे कुछ देशों में शामिल है, जो इस संकल्प में पक्ष बने हुए हैं

§ एसडीजी के उद्देश्यों और राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों के पहचान की व्यापक कवायद कराई गई

§ संकेतकों के फ्रेमवर्क का मसौदा तैयार किया गया और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है

§ अहमदाबाद, लखनऊ, चेन्नई, गुवाहाटी, भुवनेश्वर में क्षेत्रीय एसडीजी कार्यशालाओं का आयोजन हुआ, जिसमें सभी राज्य और संघ शासित क्षेत्र शामिल हुए।

बहुपक्षीय मंचों पर हाल में हुईं पह

एमओएसपीआई नवंबर, 2016 में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की 8वीं बैठक का आयोजन किया, जिसमें सांख्यिकी उपायों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत ने सार्क सांख्यिकीय संगठनों (एसएएआरसीएसटीएटी) के प्रमुखों की 8वीं बैठक का आयोजन अगस्त, 2016 में किया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था।

भारत ने मार्च, 2016 में संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के 47वें सत्र के दौरान इंटरनेशनल कम्पैरिसन प्रोग्राम (आईसीपी), 2011 के मूल्यांकन के लिए गठित फ्रेंड्स ऑफ चेयर (एफओसी) ग्रुप की बैठक की सह अध्यक्षता की।

भारत ने नवंबर, 2016 में वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में हुई आईसीपी गवर्निंग बोर्ड की बैठक और जनवरी, 2017 में हनोई, वियतनाम में रीजनल एवाइजरी बोर्ड (आरएबी) की बैठक की सह अध्यक्षता की।

सेवा क्षेत्र पर वूरबर्ग ग्रुप की 23 से 27 अक्टूबर, 2017 के बीच हुई 32वीं बैठक की मेजबानी मंत्रालय द्वारा की गई।

राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों की क्षमता निर्माण
§ तकनीक क्षमताओं के विकास और आधिकारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों की सूचना देने के लिए राज्य/संघ शासित क्षेत्रों के सांख्यिकी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण/कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। ये कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित किए गए।

§ सांख्यिकी क्षमताओं में विकास के लिए सांख्यिकी बुनियादी ढांचे में सुधार के वास्ते कई राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को अनुदान जारी किए गए।

§ संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स)

§ एमपीलैड्स के दिशानिर्देशों के प्रावधानों के तहत योजना को लागू किया गया

§ आम जनता के कल्याण की जरूरतों को पूरा करने के लिए योजना के दिशानिर्देशों में कई संशोधन किए गए।

§ कुछ बड़े संशोधन इस प्रकार हैं-

गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में माननीय सांसदों के अंशदान की सीमा को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया गया
सरकारी अस्पतालों के लिए ऐसे चिकित्सकीय उपकरणों खरीद को मंजूरी, जिनकी लागत 5 लाख रुपये से कम न हो
कौशल विकास के उपकरणों की खरीद को स्वीकृति
ट्राई साइकिल (मैनुअल/बैट्री ऑपरेटेड/मोटराइज्ड/), अपंगता के साथ विभिन्न क्षमताओं से युक्त पात्र लोगों के लिए व्हील चेयर (मोटराइज्ड/बैट्री ऑपरेटेड) और कृत्रिम अंगों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी
मरीजों या घायल जानवरों को ले जाने के लिए एम्बुलैंस खरीदने को अनुमति
§ सभी पक्षधारकों के इस्तेमाल के एक एकीकृत एमपीलैड्स पोर्टल विकसित किया गया, जिससे नागरिकों को माननीय सांसदों को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के सुझाव देने का मौका मिलता है।

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी

§ एक ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड निगरानी प्रणाली (ओसीएमएस) के माध्यम से 150 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा लागत वाली केंद्रीय सेक्टर की बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं की समयबद्धता और लागत बढ़ने की निगरानी की जा रही है।

§ ओसीएमएस पर परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को नियमित रूप से परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी डालनी होती है

§ कड़ी निगरानी से बीते 3 साल के दौरान 229 परियोजनाओं को पूरा किया गया है।

§ मार्च, 2014 से जनवरी, 2017 के बीच लागत में बढ़ोत्तरी 19 प्रतिशत से घटकर 11.19 प्रतिशत रह गई है।

प्रकाशन

§ मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स फाइनल कंट्री रिपोर्ट इन इंडिया

§ नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स, 2017

§ सर्वेक्षण 103वां संस्करण

§ एनुअल रिपोर्ट ऑन टीपीपी 2006 फॉर द ईयर 2015-16

§ एचीविंग मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्सः टारगेट ईयर फैक्टशीट-इंडिया

§ डॉमेस्टिक टूरिज्म इन इंडिया

§ की इंडीकेटर्स ऑफ अनइनकॉर्पोरेटेड नॉन एग्रीकल्चर एंटरप्राइजेज (एक्सक्लूडिंग कंस्ट्रक्शन) इन इंडिया (जुलाई, 2015-जून, 2016)

§ स्टैटिस्टिकल ईयर बुक इंडिया, 2017

§ सलेक्टेड सोशियो-इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स

भारतीय सांख्यिकी संस्थान

§ क्रिप्टोलॉजी एवं सुरक्षा के लिए आरसी बोस केंद्र की स्थापना

आईआईटी, खड़गपुर और आईआईएम, कोलकाता के साथ संयुक्त रूप से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा कोर्स ऑन बिजनेस एनालिटिक्स कराना
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जेनोमिक्स (एनआईबीएमजी), कल्याणी, पश्चिम बंगाल की अगुआई में कोलकाता में और आसपास के 6 प्रमुख संस्थानों के कंसोर्टिया के सदस्य के तौर पर डीबीटी फंडेड सिस्टम मेडिसिन क्लस्टर की स्थापना।
हिंदी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु आदि भारतीय भाषाओं के तकनीक विकास में आईएसआई की बड़ी भागीदारी है।
क्षेत्र में आते हैं: अनुवाद, सूचना पनर्प्राप्ति, ऑप्टिकल कैरेक्टर को मान्यता, हस्तलेखन को मान्यता और कोर्पोरो विकास
दशकों पहले सामने आई जारिस्की कैंसिलेशन प्रॉब्लम के समाधान जैसी सैद्धांतिक खोज में बड़ी सफलता।

इनसे भी जुड़ा रहा है आईएसआई

नकली मुद्रा का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय यात्री सर्वेक्षण
भारत के कई राज्यों में मनरेगा का मूल्यांकन अध्ययन
पश्चिम बंगाल और कई पूर्वोत्तर राज्यों में सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम का मूल्यांकन
क्षेत्रीय टिकाऊ विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) पर कार्यशाला
अहमदाबाद, लखनऊ, चेन्नई, गुवाहाटी और भुवनेश्वर में हुईं पांच क्षेत्रीय एसडीजी कार्यशाला में सभी राज्य/संघ शासित क्षेत्र शामिल हुए।

केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं और एमपीलैड्स की समीक्षा

§ केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय और कर्नाटक में केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं और एमपीलैड्स की समीक्षा की।

§ राज्य मंत्री विजय गोयल ने झांसी, जम्मू, अमृतसर और बीकानेर में केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं और एमपीलैड्स की समीक्षा की।

आल इंडिया आईआईपी की नई सीरीज के लिए डाटा यूजर्स कार्यशाला
§ मंत्रालय ने 30.08.2017 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आल इंडिया आईआईपी की नई सीरीज के लिए आधे दिन की डाटा यूजर्स कार्यशाला का आयोजन किया।

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