कोलकाता, 12 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
---रंजीत लुधियानवी। कलकत्ता विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार 11 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मानद डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया। इससे पहले विश्वविद्यालय के इस फैसले के विरोध में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इस मुद्दे पर राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को भी पत्र लिखा था। लेकिन अदालत की ओर से याचिका पर कोई फैसला नहीं होने की वजह से विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में तय कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री को डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
यहां नजरुल मंच में आयोजित समारोह में विश्वविद्यालय के चांसलर राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने ममता को इस उपाधि से सम्मानित किया। वहीं अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह याचिका पर सुनवाई जारी रखेगी। लेकिन दीक्षांत समारोह पर रोक नहीं लगाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर देश में बढ़ती असहिष्णुता पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश भर में असहिष्णुता बढ़ रही है। इतिहास को विकृत नहीं किया जाना चाहिए। विविधता में एकता की संस्कृति का सम्मान किया जाना चाहिए।
इससे पहले दो याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में विश्वविद्यालय के फैसले को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि ममता इस सम्मान के योग्य नहीं हैं। याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की सीनेट के सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार करती है और मुख्यमंत्री उसकी मुखिया हैं। अब उसी सीनेट ने मुख्यमंत्री को मानद डाक्टरेट की उपाधि देने का फैसला किया है। यह उचित नहीं है। याचिकाकर्ता ने इसे विवि का एकतरफा फैसला बताया है। उसकी दलील है कि इससे पहले कभी किसी मुख्यमंत्री को इस तरह सम्मानित नहीं किया गया है।
बुधवार को इस याचिका पर लगभग चार घंटे तक चली बहस के दौरान राज्य सरकार ने उक्त याचिका को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा कि इससे जनहित का मुद्दा नहीं जुड़ा है। एडवोकेट जनरल गौर किशोर दत्त ने कहा कि यह महज साख पर कीचड़ उचालने के मकसद से राजनीति से प्रेरित याचिका है। उनका कहना था कि महज प्रचार पाने के मकसद से अदालत में याचिका दायर की गई है।