16 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार द्वारा ओड़ीशा राज्य की समीक्षा बैठक दिनांक 16 जनवरी से 19 जनवरी तक निर्धारित की गई
(●) ओड़ीशा प्रवास पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य सहित वरिष्ठ अधिकारी
(●) प्रवास के दौरान आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य सहित सभी अधिकारी जनजाति संस्थानों, जनजाति क्षेत्रों, जनजातीय योजनाओं, कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे
(●) चार दिवसीय प्रवास के दौरान आयोग की टीम भुवनेश्वर, पूरी, राऊरकेला मे स्थित जनजातीय क्षेत्रों, संस्थाओं और कार्यालयों का निरीक्षण करेगी
(●) प्रवास के दौरान आयोग की टीम इस्पात मंत्रालय के सचिव, स्टील औथोरीटी औफ़ इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष, राजस्व विभाग ओड़ीशा के प्रधान सचिव, जनजाति विभाग ओड़ीशा के सचिव सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेगी
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार द्वारा ओड़ीशा राज्य की समीक्षा बैठक दिनांक 16 जनवरी से 19 जनवरी तक निर्धारित की गई है। इसके लिए आयोग के अध्यक्ष नन्द कुमार साय, उपाध्यक्ष अनुसूईया उइके, सदस्य हरिकृष्ण दामोर, हर्षद भाई चुन्नीलाल वसावा, माया चिंतामन इवनाते, संयुक्त सचिव शिशिर कुमार राठो और सहायक निदेशक आर• के• दूबे ओड़ीशा प्रवास पर है।
संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग विभिन्न राज्यों मे जनजातियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों, घटनाओं के संबंध मे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करता है। इसी क्रम मे आयोग का ओड़ीशा प्रवास निर्धारित किया गया है। प्रवास के दौरान आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य सहित सभी अधिकारी जनजाति संस्थानों,जनजाति क्षेत्रों, जनजातीय योजनाओं, कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे। चार दिवसीय प्रवास के दौरान आयोग की टीम भुवनेश्वर, पूरी, राऊरकेला मे स्थित जनजातीय क्षेत्रों, संस्थाओं और कार्यालयों का निरीक्षण करेगी।
प्रवास के दौरान आयोग की टीम इस्पात मंत्रालय के सचिव, स्टील औथोरीटी औफ़ इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष, राजस्व विभाग ओड़ीशा के प्रधान सचिव, जनजाति विभाग ओड़ीशा के सचिव सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। समीक्षा बैठक के दौरान राज्य सरकार द्वारा आदिवासियों की अधिगृहीत जमीन के विषय मे समीक्षा किया जाना है। इसमे प्रभावित आदिवासी परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास मे देरी और अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा। आयोग को ऐसी शिकायतें लगातार मिलती रही है कि उनकी पैतृक जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया है किन्तु अब तक उसका मुआवजा, पुनर्वास व अन्य सहायता नही दी गई है। इसके साथ ही आयोग के संज्ञान मे यह बात भी आई है कि वर्षों से अधिग्रहित जमीन खाली पड़ी है। आदिवासियों की मांग है कि खाली जमीन को उन आदिवासियों के पुनर्वास के लिए उपयोग किया जाय जो अधिग्रहण के कारण विस्थापित हुए हैं।