प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में ग्रामीण सड़कों की हालत बद से बदतर



निरर्थक साबित हो रही गड्ढा मुक्त सड़कों की घोषणाएं
संजय पाठक। वाराणसी, जनता ने विकास के वादों पर सियासत बदल दिया व बदले में अधिनायकों ने पुराने सत्ताधिशों की तरह वादा खिलाफी का इतिहास दोहरा दिया। निश्चय ही इसे दुरदर्शिता की कमी कहा जा सकता है कि जब बालू और पत्थर के खनन को प्रदेश भर में प्रतिबंधित किया गया था तो बरसात के पहले पूरे प्रदेश की सड़को को गड्ढा मुक्त बनाने की थोथी घोषणा की गयी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ग्रामीण सड़कों की हालत बद से बदतर हो गयी है। मोदी द्वारा गोद लिए गये गॉव जयापुर के भौतिक विकास में जिस तरह तेजी दिखाई दी वहीं विगत 50 सालों से ग्रामीण क्षेत्रों का सबसे विकसित बाजार राजातालाब को विगत 15 साल से सत्ताधारियों ने उपेक्षित रख छोड़ा है।
राजातालाब से जक्खिनी जाने वाला मुख्य मार्ग वर्तमान सरकार के गड्ढा मुक्त सड़क के नारों को मुँह चिढ़ाती सी प्रतीत हो रही है। बीते डेढ़ दशक से यहाँ के व्यापारी और निवासी हर साल बरसात के तीन महीने नारकीय जीवन जीने को अभिसप्त है। न तो ठीक ठंग से सीवर का निर्माण कराया जा सका है और न ही सड़क का। खानापूर्ति के नाम पर काम करा कर पैसों की बंदर बाट स्पष्ट दिखलायी देती है। पीछले सरकारों द्वारा भी जिन सड़को का निर्माण कराया गया था वो भी अब अपना अस्तित्व खोने के कगार पर पहुँच गयी है।

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