कुछ लोग वृद्धों को छोड़ने के लिए आते हैं गंगासागर



कोलकाता, 23 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

---रंजीत लुधियानवी। गंगासागर मेले में इस साल कम से कम 51 वृद्धों को उनके परिवार वाले मेला परिसर में छोड़ कर चले गए। ऐसे बुजुर्गों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। अभी तक ऐसे लोगों मेंं 17 की दूसरे श्रृद्धालुओं के साथ घर वापसी कर दी गई है। जबकि बाकी बचे लोगों का भविष्य अधर में है। मेला प्रांगण में राहत-बचाव व दूसरे काम में लगे लोगों का कहना है कि अभी मेले की साफ-सफाई का काम चल रहा है। सागरद्वीप में जब हालात सामान्य होंगे, तब इस मामले में आगे सोचा जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि बनारस के बाद गंगासागर ऐसी जगह बनता जा रहा है, जहां दूसरे राज्यों से आने वाले लोग परिवार के वृद्ध और बेकार हो चुके लोगों को छोड़ कर चले जाते हैं, जिससे उनका बोझ कम हो सके। ऐसे ज्यादातर लोग फिलहाल सरकारी अस्पतालमें रह रहे हैं।

वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के सचिव अंबरिश नाग विश्वास का कहना है कि ऐसे लोग मेले में खासतौर पर मंदिर के बाहर झोपड़ियों में या बाजार में रहते हैं, जहां से आसानी से भोजन की तलाश में जा सकें। स्थानीय लोगों की ओर से इनके बारे में पुलिस को सूचना दी जाती है और पुलिस वाले उन्हें अस्पताल पहुंचाते हैं। इस साल संस्था को गंगासागर में छोड़े गए वृद्धों को उनके घर पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कहा गया।

विश्वास के मुताबिक लापता लोगों के लिए माइहैम डाट इन नामक पोर्टल बनाया गया है और आपदा प्रबंधन-बंगाल पुलिस की मदद से 17 लोगों को घर वापस पहुंचाया गया है। मेले के बाद बैजुनाथ और चंद्रेश्वर को हमारे बूथ में लाया गया ,उन लोगों से बातचीत करके पता चला कि परिवार वाले उन्हें यहां छोड़ने की योजना बनाकर ही लाए गए थे। उन लोगों के बारे में जानाकरी हासिल करने के बाद दूसरे तीर्थयात्रियों के साथ नेपाल भेजने का बंदोबस्त किया गया। जबकि दूसरे छोड़े गए लोगों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व ओडिसा के लोग थे। ऐसे लोगों में एक महिला राज्य के उत्तर चौबीस परगना जिले के बनगांव की रहने वाली थी। इन लोगों को उनके परिवार वालों के पास भेज दिया गया है।

उन्होंने कहा कि लापता लोग जब संस्था को मिलते हैं, तब उनके बारे में मेला प्रांगण में घोषणा की जाती है कि फलां व्यक्ति हमारे बूथ में है। उनके परिवार वाले यहां से उन्हें ले जा सकते हैं लेकिन जब कोई नहीं आता, तब हम ऐसे लोगों को उनके इलाके के लोगों के साथ रख लेते हैं।

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