जीएसटी की मार से बेहाल कपड़ा कारोबार में लगे लोग



कोलकाता/हावड़ा, 24 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

---रंजीत लुधियानवी। नोटबंदी के बाद जीएसटी के कारण राज्य के ‘उस्तागरों’ का हाल बेहाल है। हावड़ा के विभिन्न इलाकों में हो या कोलकाता के मेटियाबुर्ज के विभिन्न इलाकों में, जहां सलवार-कमीज से लेकर छोटे बच्चों के कपड़े, पुरुषों के पैंट-शर्ट, बुजुर्गों की पोशाक की सिलाई होती है। यहां से कपड़ा बासंती, कैनिंग, जयनगर के कारीगरों के पास जाता है और वहां से सिलने के बाद बाजार में पहुंचता है। सितंबर से लेकर दिसंबर महीने तक हैदराबाद, चेन्नई, विजयवाड़ा, राजामुंद्री, कोच्चि जैसे दक्षिण भारत के शहरों में यहां के कपड़ों से दुकानें पट जाती रही हैं। दुर्गापूजा के बाद पोंगल यहां के कपड़ा कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा त्योहार माना जाता रहा है, तब साल भर की कमाई हो जाती थी। लेकिन इस साल 14 जनवरी को ‘पोंगल’ के दिन यहां निराशा देखने को मिल रही थी। जीएसटी के कारण मांग कम होने के कारण काम भी कम हुआ और कारीगरों को भी पर्याप्त मात्रा में काम नहीं मिला।

एक दुकानदार बिलाल का कहना है कि पिछले साल के पोंगल से पहले जहां हफ्ते में 50-60 हजार रुपये के कपड़े बेचते थे, अब मुश्किल से 10 हजार के कपड़े ही बिक रहे हैं। जीएसटी की मार का असर दुकानदारों पर ही नहीं, वहां काम करने वाले, मंगलाहाट, मेटियाबुर्ज के गरीब मोठिया-मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ रहा है। काम नहीं होने के कारण वे लोग भी बेरोजगार हो रहे हैं। उनका कहना है कि पहले जहां दुकानदार हर हफ्ते सामान लाते थे, अब 15 दिन में पहले के मुकाबले कम सामान मंगवाते हैं। पहले 50 बोरे कच्चा माल खरीदने वाला व्यापारी अब मुश्किल से 20 बोरे ही खरीद रहा है। इससे लोगों का काम तो कम होना ही है।

मालूम हो कि उत्तर और दक्षिण चौबीस परगना, हावड़ा, हुगली, दोनों मेदिनीपुर समेत दक्षिण बंगाल के जिलों के कम से कम एक लाख ‘उस्तागर’ हैं, जो कपड़ों का कारोबार करते हैं। उनके यहां काम करने वाले ‘कारीगरों’ जिन्हें ‘मास्टर’ भी कहते हैं कम से कम 10 लाख है। हावड़ा के मंगलाहाट और मेटियाबुर्ज के हाट से राज्य के लोग ही नहीं दूसरे राज्यों से भी कपड़ा व्यापारी खरीददारी करने के लिए आते हैं। इन बाजारों में करोड़ों का लेनदेन होता रहा है। लेकिन नोटबंदी व उसके बाद जीएसटी ने हालात बदल कर रख दिए हैं।

दुकानदारों का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद कारोबार लगभग बंदी के कगार पर पहुंच गया था। अब कारोबार किसी तरह चल रहा है लेकिन मंदी से हाल बेहाल है। जीएसटी के बाद पहले जो सामान 100 रुपये में मिलता था, अब 120 रुपये में मिल रहा है। महंगाई के कारण मांग में कमी हुई है।

वेस्ट बंगाल टेलर्स यूनियन के महासचिव असदुल्ला गायन का कहना है कि ज्यादातर उस्तागर व कारीगरों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन लगभग असंभव है। जिन लोगों ने जीएसटी पंजीकरण किया है, उन्हें हिसाब की देखरेख के लिए अतिरिक्त 10-15 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

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