स्वच्छता अभियान बना घृणा का महोत्सव - सोपान जोशी



वाराणसी, 27 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(★) बीएचयू में शुचिता, सफाई और हमारी समझ विषयक व्याख्यान

---हरेन्द्र शुक्ला। स्वच्छता के नाम पर हमने अपने लोगों को परायों की तरह देखना शुरू कर दिया है। आज हमारा सफाई का महोत्सव घृणा का महोत्सव बन गया है। यह बात काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग एवं राष्ट्रीय कारीगर समाज के संयुक्त तत्त्वावधान में शनिवार को आयोजित ‘शुचिता, सफाई और हमारी समझ’ विषयक व्याख्यान में प्रख्यात पर्यावरणविद और पत्रकार सोपान जोशी ने कही।

उन्होने अपनी पुस्तक ‘जल थल मल’ के बारे में चर्चा करते हुए स्वच्छता के संदर्भ में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लद्दाख के छागरा से लेकर कोलकाता शहर के भेरियों तथा तमिलनाडु के परम्परागत मल निस्तारण का उदहारण देते हुए स्वच्छता के प्रति हमारी समझ पर पुन: विचार करने हेतु मजबूर किया। पिछले तीस-पैंतीस सालों से चले आ रहे तमाम स्वच्छता के कार्यक्रमों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सफाई अभियानों के केवल नाम साफ़ हो रहे है, सफाई तो सिर्फ नाम भर की हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर हम मानव मल-मूत्र का सही ढंग से उपयोग शुरू कर दे तो फॉस्फेट जैसे उर्वरक पर सरकार प्रति वर्ष लगभग पचहतर हज़ार करोड़ से एक लाख करोड़ रूपये सब्सिडी में खर्च करती है वो बचाया जा सकता है।

व्याख्यान के बाद श्रोताओं से सवाल-जवाब के क्रम में सुधार के सवाल पर उन्होंने कहा कि सुधार के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नहीं है, कमी है सामाजिक इच्छाशक्ति की। यह पूरी तरह हमारी समझ का मसला है। इसे पूरी तरह विवेक के स्तर पर समाधान की दिशा में आगे लेकर बढ़ा जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो• के• एन• पी• राजू ने विकास के आधुनिक सन्दर्भों की चर्चा करते हुए कहा कि हमें अपने पारंपरिक और देशज ज्ञान को भी विकास की अपनी अवधारणा में सम्मिलित करना होगा। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन डॉ• धीरेन्द्र राय व धन्यवाद् ज्ञापन रुपेश पाण्डेय ने दिया।

इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो• अनुराग दवे, डॉ• नेहा पाण्डेय, डॉ• बाला लखेंद्र, प्रो• विक्रमादित्य राय, वरिष्ठ पत्रकार ए• के• लारी, संजीव, डॉ• विकास, डॉ• सचिन तिवारी समेत तमाम पत्रकार, स्वयंसेवी व विश्वविद्यालय के अध्यापक, विद्यार्थी आदि मौजूद रहे।

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