हावड़ा, 27 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
अवकाश ग्र्रहण करने से पहले सलकिया विक्रम विद्यालय के प्रधानाचार्य सम्पूर्णानन्द राय ने जताया आभार
गुरु ने हमेशा समाज गढ़ा है और कृतज्ञ समाज ने हमेशा गुरुओं को सम्मान दिया है। सदियों से भारतीय शिक्षा व्यवस्था का यह संस्कार आज भी जिंदा है। आधुनिक समाज में इसमें कड़वाहट आई जरूर लेकिन गुरुओं ने इसे संभाल लिया।
ऐसे ही सचेतन अधुनिक गुरुओं में शुमार होता है। सलकिया विक्रम विद्यालय के प्रधानाध्यापक सम्पूर्णानंद राय। हावड़ा में हिंदी स्कूलों की साख जब दावं पर थी ऐसे समय में इन्होंने सलकिया विक्रम विद्यालय की कमान संभाली। और आज यह पूरे पश्चिम बंगाल में एक उदाहरण है। स्कूल के स्तर की अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां एडमिशन के लिए आज समाज के रसूखदारों की पैरवी आती है। हालांकि स्कूल में प्राथमिकता सिर्फ प्रतिभा को मिलती है।
स्कूल को इस मुकाम तक पहुंचाने के बाद एस• एन• राय अब तय व्यवस्था के तहत स्कूल से अलग होनेवाले हैं। 31 जनवरी को वह अवकाश ग्र्रहण करेंगे। हालांकि आज उन्होंने स्कूल में जो व्यवस्था स्थापित कर दी है, वह उनकी कमी खलने नहीं देगा। हालांकि मार्गदर्शक का जाना सशक्त से सशक्त व्यवस्था को भी खटक जाता है।
इधर तमाम उहापोह के बीच स्वयं एस• एन• राय ने सबके चेहरे पर मुस्कान खिलाने की व्यवस्था की। अपने अवकाश ग्र्रहण करने से पहले शनिवार को उन्होंने पूरे हावड़ा के तमाम स्कूल के शिक्षकों व समाज के विशिष्ट नागरिकों के लिए प्रीति भोज का आयोजन किया। यहां उनके कई पूर्व छात्र भी उपस्थि थे। वहीं उन्होंने कहा कि मैं समाज को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिनके बीच मैंने सेवा के इतने वर्ष काटे।
विद्यालय से 1990 से जुडऩे वाले सम्पूर्णानन्द राय 1998 में स्कूल के टीचर इंचार्ज सह उप-प्रधानाचार्य बने। 2003 में उन्होंने प्रधानाचार्य के तौर पर कार्यभार संभाला और स्कूल को नए मुकाम तक पहुंचाने के बाद अवकाश प्राप्त करेंगे।