वाराणसी, 29 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(★) संकटमोचन के महंत ने तीन दिवसीय "ध्रुपद उत्सव" का किया शुभारंभ
---हरेन्द्र शुक्ला। पंडित श्रीकांत मिश्र ध्रुपद फाउंडेशन एवं ध्रुपद संस्थान भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय "ध्रुपद उत्सव 2018" का शुभारंभ श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय दुर्गाकुंड में आयोजित किया गया। इस अवसर पर संकटमोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वम्भरनाथ मिश्र ने बतौर मुख्य अतिथि दीप प्रज्वलन कर उत्सव का शुभारंभ किया। प्रो• मिश्र ने कहा कि संगीत के क्षेत्र में गुरु बनने के बजाय शिष्य बनकर रहना ज्यादा श्रेयस्कर होता है।
ध्रुपद उत्सव के प्रथम निशा की आगाज पुणे की पखवाज साधिका सुश्री अनुजा बोरुडे के एकल पखावज वादन से हुआ। उन्होंने पखावज पर सधी अंदाज में धमार ताल प्रस्तुत किया। इसके अंतर्गत आपने गणेश स्तुति, उठान परन, रेला, फरमाइशी चक्करदार और घराने दार बंदिशों की प्रस्तुति कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। इनके साथ हारमोनियम पर सधी अंदाज में पं• यमुनाबल्भ गुजराती भैयनजी ने संगत की। इसके बाद इंदौर के पं• मनोज सर्राफ का ध्रुपद गायन हुआ। उन्होंने राग यमन में आलाप एवं झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद धमार ताल में एक रचना के बोल 'केसर घोल के रंग बनो' की प्रस्तुति के बाद दस मात्रा में सुल्ताल में बंदिश के बोल "गणपति गणनायक" की प्रस्तुति कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके साथ साथ पखावज पर जापान से आए पं• श्रीकांत मिश्र के शिष्य तेसिया कनिको को ने कुशल संगत की। प्रथम निशा की आखिरी प्रस्तुति ध्रुपद मर्मज्ञ पं• ऋत्विक सान्याल का ध्रुपद गायन हुआ। उन्होंने राग पूरिया कल्याण आलाप, चार ताल में बंदिश तथा राग किरवानी में सूलताल की बंदिश में ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया। इनके साथ पखावज पर पं• श्रीकांत मिश्र के शिष्य पं• अखिलेश गुंदेचा ने संगत की।
समारोह का कुशल संचालन सुश्री अनुराधा रतूड़ी ने किया। अतिथियों का स्वागत सेतू त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर पं• राजेश्वर आचार्य, पं• पूरन महाराज, पं• कन्हैयालाल मिश्र सहित देशी विदेशी संगीत प्रेमी मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन शिखा त्रिपाठी ने दिया।