@संतोष यादव, सुलतानपुर। देववाणी कही जाने संस्कृत भाषा की रक्षा व संवर्धन के लिए सांसद वरुण गाँधी ने कदम बढ़ाये है।इस भाषा के उत्थान की पहल करते हुए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर उन्होंने तीन पृष्ठों में संस्कृत की महत्ता का जिक्र किया है।
वरुण गाँधी ने कहा कि संस्कृत समूचे विश्व में इकलौती ऐसी भाषा है जिसका व्याकरण पूर्ण एवं त्रुटि रहित है। संस्कृत से ही 67 भाषाओं का उद्भव हुआ है।संस्कृत भाषाओं की भाषा है। आदि काल से ही भारतीय समाज में सम्प्रेषण और ज्ञान के सृजन का माध्यम रही है।यही नही वसुधैव कुटुम्बकम की मान्यताओं को समृद्ध करने में संस्कृत भाषा में रचे गये शास्त्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है,बावजूद इसके कई वर्षो के अन्तराल में हमारी संस्कृति की मातृभाषा संस्कृत उपेक्षित हो गयी।वरुण गाँधी का मानना है कि18 वीं शाताब्दी के दौरान भारत में समाज सुधार आन्दोलन और प्राचीन सुरक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन के शासकीय प्रयासों की वजह से संस्कृत धीरे-धीरे उपेक्षित हो गयी और अंग्रेजी तथा क्षेत्रीय भाषाएं सम्प्रेषण के साथ-साथ भारतीय प्रशासकीय कार्यों का आधार बन गयीं। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजे तीन पृष्ठीय पत्र में उन्होंने संस्कृत भाषा की उपेक्षा पर न सिर्फ चिंता जाहिर की है बल्कि संस्कृति एवं राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए संस्कृत भाषा के उन्नयन की जोरदार वकालत भी की है। यही नहीं प्रधानमंत्री से वरूण गांधी ने नई दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप मे प्रतिष्ठित करने की मांग भी की है।उन्होंने पत्र में संस्कृत के अंग्रेज विद्वान सर मोनियर विलियम्स, जर्मन विद्वान मैक्समूलर, ग्लैसी, फलेचर, कांगडन, मैकडॉनल, आदि को उद्धृत करते हुए दो टूक कहा है कि संस्कृत भाषा की विशेषताओं के कारण ही हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पिछले तीन सौ साल से विधिवत संस्कृत का विभाग संचालित किया जा रहा है, लेकिन अपने भारत में संस्कृत उपेक्षा की शिकार हो गयी है। विश्व के प्राचीन भाषाओं में प्रमुख स्थान रखने वाली संस्कृत भाषा भारत में उपेक्षित सी हो गयी है। वरूण गांधी ने पत्र में कहा है, कि स्वतन्त्र भारत में पहली बार भारत सरकार द्वारा 1 अक्टूबर, 1956 को पश्चिम बंगाल विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष डा0 सुनिती कुमार चटर्जी की अध्यक्षता में संस्कृत आयोग का गठन किया गया। आयोग ने 30 नवम्बर, 1957 को तत्कालीन शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को अपनी रिपोर्ट सौंपी और सरकार से आग्रह किया कि भारत की संस्कृति एवं एकता की आधार स्वरूपा संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए सहयोग करें और भारतीय शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन करते हुए अधिक से अधिक संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्याल्यों की स्थापना करें। वरूण गांधी ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को भारतीय संस्कृति के ध्वज वाहक एवं राष्ट्र के प्रधान सेवक के रूप में उद्धृत करते हुए उम्मीद जताई कि लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित कर संस्कृत भाषा को प्रतिष्ठा दिलायेंगे। संस्कृत भाषा के उत्थान एवं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की माँग को लेकर मुखर हुए अपने सांसद की पहल का सुल्तानपुर के संस्कृत प्रेमी सराहना कर रहे है। वहीं जिले के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों, एवं संस्कृत भाषा के विद्वानों ने वरूण गांधी को साधुवाद भी दिया। सांसद वरूण गांधी के जन सम्पर्क अधिकारी दयाराम अटल व पार्टी प्रवक्ता विजय सिंह रघुवंशी कहते है कि सांसद वरुण गांधी ने हमेशा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को तरजीह दी है।उनकी पहल पर ही सुल्तानपुर स्थिति संसदीय कार्यालय सोमवार से शनिवार तक सुबह10 बजे से शाम 6 बजे तक अनवरत आम जनता की सेवा के लिए खुला रहता है।