कोलकाता, 09 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
कोलकाता पुस्तक मेला अभी चल रहा है और भीड़ वाले तीन दिन का हिसाब मिलना बाकी है। इसके बावजूद गुरुवार तक करीब 10 करोड़ रुपये की किताबें बिक गई है। 42वें पुस्तक मेले में डिजीटाइजेशन के दौर में भी लोगों में पेपर बैक संस्करण खरीदने की रुचि कम नहीं हुई है क्योंकि मेला आयोजकों के मुताबिक सबसे ज्यादा बिक्री पेपर बैक संस्करण की हो रही है। कोलकाता पुस्तक मेले में प्रतिदिन कार्यदिवस को एक लाख लोग और छुट्टी के दिन दो लाख लोग प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड के अध्यक्ष सुधांशु दे के मुताबिक साल्टलेक के सेंट्रल पाक में मेले के दौरान लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
मालूम हो कि पुस्तक मेला 31 जनवरी को शुरू हुआ था और आगामी 11 फरवरी तक चलेगा। मेला आयोजकों के मुताबिक बीते सालों के मुकाबले इस मेले में खास बात यह देखी जा रही है कि मेले में आने वाले ज्यादातर लोग पुस्तकें खरीद रहे हैं। खास तौर पर बांग्ला पुस्तकों की भारी बिक्री हो रही है। मुंबई से मेले में आए एक व्यक्ति ने अकेले एक लाख 40 हजार रुपये की बांग्ला किताबें खरीदी हैं। इतना ही नहीं, कई लोगों ने 25 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक की बांग्ला किताबें खरीदी हैं। इसके अलावा कई खरीददारों ने पांच-छह हजार रुपये की किताबें खरीदी हैं।
दे के मुताबिक कोलकाता पुस्तक मेले की बिक्री को देख कर लगता है कि भले ही नई पीढ़ी साधारण ज्ञान के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए गूगल की सर्च करती हो, लेकिन इसमें शक नहीं कि पेपर बैक संस्करण और क्लासिक व आधुनिक कथा-कहानियां उन्हें लुभा रही हैं।
साल्टलेक के करुणामयी स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित 42वें कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के मौके पर आयोजित तीन दिनों के साहित्य उत्सव ‘कोलकाता लिटरेचर फेस्टिवल’ (केएलएफ) का उद्घाटन के बाद 82 वर्षीय शीर्षेंदु मुखोपाध्याय ने कहा कि वर्तमान दौर के साहित्य उत्सव में कई महत्वपूर्ण व नामी-गिरामी लेखक उपस्थित होते हैं। उनको होटलों में ठहराया जाता है और उनकी चर्चाएं समय सापेक्ष होती हैं। लिहाजा अपने निर्धारित कार्यक्रम से ज्यादा उनको अनौपचारिक बातचीत के लिए समय नहीं मिल पाता। उनको इस बात को लेकर संदेह रहता है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लेखकों के लिए ये साहित्य उत्सव गहन संवाद करने का अवसर दे पाते हैं।
उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि आजकल संपर्क टूटते जा रहे हैं और लोगों के बीच दूरी बढ़ रही है। मशीन के प्रभाव से मनुष्य मैकेनिकल बनता जा रहा है। हालांकि अंत में साहित्य ही मनुष्य को बचाता है, लेकिन वह ऐसा साहित्य हो जो जीवन की बात करता है।
गिल्ड के महासचिव त्रिदिव चटर्जी ने कहा कि 1976 से कोलकाता पुस्तक मेला ने अपनी यात्रा शुरू की थी और 1980 में जाकर इसे अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का दर्जा हासिल हुआ। वर्ष 2013 से ही पुस्तक प्रेमी कोलकाता लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन के लिए दबाव डाल रहे थे और हमने 2014 में केएलएफ की शुरुआत की। केएलएफ के दौरान कुल 22 सत्र होंगे, जिसमें करीब 65 लेखक हिस्सा लेंगे।