जीवन को पानी बनाओ आग नहीं : मुनि प्रतीक सागर जी



हावडा, 19 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

उत्तर हावड़ा के डवसन रोड स्थित पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के सभागार में आयोजित सोमवारीय धर्म सभा में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा की पलक उठाकर जीना अभिमान है और पलक झुका कर जीना विनय गुण हैं जो पलकें झुका कर जीते हैं दुनिया उन को पलकों पर बिठा कर रखती है। मुनि श्री ने अपनी धारा प्रवाह वाणी को जारी रखते हुए आगे कहा कि ज्ञानी अपना स्वभाव दिखाता हैं प्रभाव छुपाता हैं, अज्ञानी प्रभाव दिखाता हैं स्वभाव छुपाता है। आदमी अभाव के कारण दुखी नहीं है अपने बुरे स्वभाव के कारण दुखी हैं।

मुनि श्री ने कहा आज मैचीगं का जमाना, दुनिया वस्त्रों की जुतो की मैचिगं तो करती है मगर एक घर में रहने वाले चार लोग एक दुसरे के स्वभाव के साथ मैचिगं करले तो घर नरक से स्वार्ग बन जाएगा।

मुनि श्री ने घर को स्वर्ग बनाने के सुत्र प्रदान करते हुए कहा कि पति अगर क्रोध में आग बने तो पत्नी को पानी बन जाना चहिए आगर पत्नी कभी क्रोध में आग बने तो पति को पानी बन जाना चाहिए क्योंकि आग का उपचार पेट्रोल नहीं पानी हैं। सहनशील बनो उतावले नहीं, प्रथ्वी सहनशील हैं इसलिए हीरे मोती फल अनाज को जन्म देती है और धरती माँ के नाम से उस को सम्मानित किया गया हैं।

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