हावडा, 22 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
उत्तर हावड़ा के डबसन रोड स्थित पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के सभागार में आयोजित धर्म सभा में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा कि माँ बाप की आँखो में दो बार ही आशु आते हैं बेटी घर छोड़े तब या बेटा मुख मोड़े तब। पत्नी पंसद से मिल सकती है मगर माँ बाप पुण्य से मिलते हैं। कहीं पंसद से मिलने वाली के पीछे पुण्य से मिलने वालों से मुख मत मोड़ लेना। याद करो जब आप छोटे थे तब माँ की शय्या गीली करता था अब बड़ा हुआ तो माँ बाप की आँखे गीली रखते तुम, कैसे बटे हो ? जब तुम चल फिर नहीं सकते थे तब पिता ने अगुली पकड़ कर चलना सिखाया, जब तुम खा नहीं सकते थे तब माँ ने अपने आँचल का दुध पिलाया। अब जब माँ बाप बुजुर्ग हो गये हैं तो तेरा कर्तव्य कि अन्तिम स्वास तक उन के पास रहो।
मुनि श्री ने कहा कि जीवन में तीन आशीर्वाद जरूरी है - बचपन में माँ का, जवानी में संत का व बुढ़ापे में परमात्मा का। माँ के चरणों की रज मंदिर के चंदन से कम नहीं है, मुनि श्री ने सभी माताएं व पिताओं को नसीहत देते हुए कहा कि बेटा बेटी में फर्क मत करो, बेटा अगर घर का वारिस हैं तो बेटी घर का पारस हैं, अगर बेटा आप के घर का मान हैं तो बेटी गुमान हैं, अगर बेटा वंश हैं तो बेटी अंश हैं, बेटा आन हैं तो बेटी आप के घर का सम्मान हैं, बेटा तन हैं तो बेटी आपका मन हैं, बेटा दवा हैं तो बेटी द्धव्व हैं, बेटा शब्द है तो बेटी अर्थ है, बेटा गीत हैं तो बेटी आप के घर का संगित हैं।