बैंक घोटाले के कारण ईपीएफ ब्याज दरों में कटौती : ममता



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 22 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

छह करोड़ से अधिक सदस्य कर्मचारियों को झटका देते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ब्याज दरों में कटौती का एलान किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि ब्याज दरों में कटौती पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटाले के कारण की गई है, जिससे कर्मचारी वर्ग को जोरदार झटका लगा है। उन्होंने कहा कि बैंक में हु ए 11,400 करोड़ रुपए के घोटाले का असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। जिसके कारण कर्मचारी वर्ग पर असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा की अगुवाई में एनडीए सरकार 2014 में जब सत्ता में आई थी, पीएफ में ब्याज की दर 8.82 फीसद थी। यह अब घटा करके 8.55 फीसद कर दी गई है।

मालूम हो कि बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से ब्याज दलों में कटौती का एलान किया गया है। बीते पांच साल के दौरान यह सबसे कम ब्याज दर है। जिससे छह करोड़ सदस्यों को घाटा सहना पड़ेगा। ममता ने कहा कि घाटे को पूरा करने के लिए लोगों की जेब पर हाथ डाला जा रहा है। यह एक तरह से लूट है। इस बारे में सोचिए कि एक आम आदमी को पहले के मुकाबले अब 0.10 फीसद कम ब्याज मिलेगा।

उत्तर दिनाजपुर में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की नीति यही है कि किसानों और आम आदमी की जेब को खाली कर दिया जाए। भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बैंक में रकम रखने वाले अवकाश प्राप्त वरिष्ठ नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस सरकार के दौरान पीएफ, लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में भारी कटौती की गई है। अब लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि बैंक में रखी उनकी रकम क्या उन्हें वापस मिल सकेगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार एफआरडीआइ विधेयक लाने की कोशिश में है, जिससे बैंक यह तय करेगी कि जमाकर्ता की रकम वह लौटाएगा या नहीं। भले ही ग्राहक ने यह रकम फिक्सड डिपाजिट के तहत जमा की हो। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्ज का भुगतान नहीं करने के कारण 12,000 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। हम लोगों ने केंद्र से किसानों का कर्ज माफ करने के लिए कहा था, लेकिन केंद्र ने हमारी बात नहीं मानी। अगर एक किसान कर्ज वापस करने में नाकाम रहता है, तब उसका घर-जमीन छीन लिया जाता है। लेकिन जब सरकार की मंजूरी से बैंक लूटी जाती है, उन लुटेरों को कौन सजा देगा ?

उन्होंने लोगों को चेताते हुए कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार के शासनकाल में लोग सुरक्षित नहीं हैं, न तो उन्हें सामाजिक सुरक्षा और न ही वित्तिय सुरक्षा मिल रही है। ये लोग केवल अच्छे दिन का सपना दिखा रहे हैं, लेकिन यह एक मृग मरिचिका है। देश के लोगों के अच्छे दिन कभी आने वाले नहीं हैं, सिर्फ भाजपा के लोगों के लिए यह सच्चाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नागरिकों को अधिकारों का हनन कर रही है।

केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ लोगों को आगाह करते हुए ममता ने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं भाजपा वाले लोगों को हिंदू-मुसलमान में बांटने में लग जाते हैं। लेकिन जब चुनाव बीतते हैं, पीएफ, बैंकों और बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती करके लोगों को प्रभावित किया जाता है। मालूम हो कि राज्य में अगले कुछ ही महीने के दौरान पंचायत चुनाव होने वाले हैं। चुनाव के नतीजों से 2019 के लोकसभा चुनाव के रुख का पता चल सकेगा कि 42 सीटों में कौन कितने पानी में है। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि सभी 42 सीटों पर उन्हें जीत मिलेगी। जबकि भाजपा राज्य से कुछ सीटें हासिल करने की कोशिश में है। माना जा रहा है कि बैंक घोटाले और ब्याज दरों में कटौती ने तृणमूल कांग्रेस नेत्री को राज्य के आम लोगों को भाजपा के खिलाफ संगठित करने का बहुत बड़ा अवसर प्रदान किया है।

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