प्रेम जीवन का महा मंत्र हैं : मुनि श्री प्रतीक सागर



हावड़ा, 23 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

उत्तर हावड़ा के डवसन रोड स्थित पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के सभागार में आयोजित धर्म सभा में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा की प्रेम जब किसी एक के साथ जुड़ता हैं तो वासना का जहर बन जाता हैं और वही प्रेम जब संसार के सभी प्राणीयों के प्रति जागृत होता हैं तब वह अमृत का रूप धारण कर लेता हैं। मोह सहित प्रेम वासना का किचड़ मचाता हैं वहीं मोह रहित प्रेम परमात्मा के दर्शन करता है। जीवन में तीन बातों का ध्यान हमेशा याद रखो- प्रर्थना अपनों से बड़ों से करो, प्रेम बराबर वालों से, अपने से छोटों के प्रति वात्सल्य का भाव रखो जैसे गाय अपने बछड़े के प्रति रखती है।

मुनि श्री ने आगे कहा कि आज हम कुत्तों से तो प्यार करते हैं मगर इंसानो से नफरत ऐसा क्यो ? जो व्यक्ति आदमी से प्यार ना कर सका वह भगवान से भी प्यार नहीं कर सकता हैं। उन्होंने आगे कहा कि दोस्त बनाने में उम्र लग जाती हैं मगर दुश्मन बनाने में देर नहीं लगती हैं अगर आप दुश्मनी मिटाना चहते हैं मेरी एक नसिहत याद रखे- दुश्मन को देख कर चहरे पर मुस्कान ले आए और पीठ पीछे उसकी प्रशंसा करें। मुस्कान आमंत्रण कार्ड हैं, प्रशंसा वश्किरण मंत्र है।

बता दें कि मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज 25 फरवरी रविवार को प्रातः 9 बजे विराट धर्म सभा को सम्बोधित करेंगे तथा शाम 5:30 बजे स्कूल कॉलेज में परिक्षा दे रहे या देने वाले हैं उन सभी विधर्थियो को विशेष मंत्रों के द्धारा मंत्रित कलम प्रधान करेगे।

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