राज्य सभा की पांचवीं सीट पर भी ममता की नजर ?



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 26 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

आगामी 23 मार्च को पश्चिम बंगाल में राज्य सभा की पांच सीटों पर मतदान होने जा रहा है। चार सीटों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की जीत पक्की है। लेकिन पांचवीं सीट को लेकर सत्ताधारी दल और विरोधी दलों की ओर से कोशिशें शुरू हो गई हैं। विधायकों की संख्या को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस चार सीटें आसानी से जीत सकती है। इसके बाद भी तृणमूल के पास विधायक रहेंगे, जिनके मतदान से किसी का भी पासा पलट सकता है।

मालूम हो कि नदीमुल हक, विवेक गुप्ता, मुकुल राय, कुणाल घोष और तपन सेन का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उनकी जगह सांसद चुनने के लिए मतदान होगा। मुकुल राय पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और भाजपा के पास इतनी संख्या नहीं है कि वह कुछ कर सके। जबकि कांग्रेस और वाममोर्चा भी अकेले किसी को जितवा कर राज्यसभा में नहीं भेज सकते। कांग्रेस-वाममोर्चा मिलकर किसी को उम्मीदवार बनाएं या एक दल दूसरे उम्मीदवार की मदद करे, तब उनका उम्मीदवार जीत सकता है। लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात में माकपा किसी भी स्तर पर कांग्रेस के साथ समझौता करने का विरोध कर रही है। ऐसे में दोनों दलों में किसी एक उम्मीदवार को लेकर सहमति की उम्मीद पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं। हाल में हुए उपचुनाव में भी दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं।

इस बीच, यह सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पांचवें उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारेंगी या कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेंगी ? माना जा रहा है कि लोकसभा 2019 में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस -तृणमूल कांग्रेस साथ-साथ रहेंगे। ऐसे में कांग्रेसी उम्मीदवार का समर्थन करके दोनों दलों में राज्य में भी खटास दूर हो सकती है। हालांकि तृणमूल सूत्रों का कहना है कि दल की सुप्रीमों ने वरिष्ठ नेताओं से इस बारे में विचार-विमर्श शुरू कर दिया है कि कैसे पांचवीं सीट पर कब्जा किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस से सीधे समझौता नहीं होने पर दल से बाहर किसी खास व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस बारे में कुछ भी साफ नहीं है, लेकिन तृणमूल नेताओं का कहना है कि यह स्पष्ट है कि पांचवीं सीट पर विरोधियों को दीदी वाकओवर नहीं देंगी। उनका मानना है कि सीट दल जीते या दूसरा कोई, लेकिन तृणमूल की छाप स्पष्ट दिखाई दे। पंचायत चुनाव के पहले राज्यसभा में सौ फीसद जीत का राज्य भर में प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

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