मां गंगा की स्वच्छता के लिए आगे आये संत समाज : प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र



---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 01 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● प्रेम और अध्यात्म से ही मिटेगा नफरत : श्री श्री रविशंकर

भगवान भोले भंडारी शिव को मां गंगा का सानिध्य बहुत ही प्रिय है। वह गंगा को हमेशा अपने जटा में विराजमान रखते है। लेकिन यह दुर्भाग्य है कि गंगा की स्वच्छता और निर्मलता खतरे में है। ऐसे में संत समाज को भी चाहिए कि मां गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिये आगे आयें। श्री श्री रविशंकर जी से यह अनुरोध है कि अनुग्रह यात्रा की तर्ज पर मां गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए भी यात्रा निकालें। इस यात्रा में आप एक कदम बढ़ाईये हमलोग दस कदम बढायेंगे। यह बात वाराणसी स्थित पद्मश्री गिरीजा देवी सांस्कृतिक संकूल में आर्ट आफ लिविंग की ओर से श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में निकलने वाली अनुग्रह यात्रा के शुभारंम्भ के अवसर पर आयोजित संत समागम की अध्यच्छता करते हुये संकटमोचन मंदिर के महंत एवं संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यछ प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कही।

उन्होंने कहा कि यह संयोग कितना शानदार है कि कभी भगवान बुद्ध काशी की धरती से दुनियां में शांति के लिए अपना प्रथम उपदेश देकर अपने शिस्यों को रवाना किया था। कुछ वैसा ही श्री श्री के अनुग्रह यात्रा में दिख रहा है। शांति और सौहार्द के लिए निकाली गई इस यात्रा की सफलता की कामना करते हैं। प्रोफेसर मिश्र ने कहा कि यह मानव शरीर ईश्वर की थाती है। सबकुछ ईश्वर ने ही बनाया है, इस शरीर से मां गंगा और समाज के लिए कार्य यदि हो तो वह देश हित में सार्थक होगा।

इसके पूर्व अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा कि अध्यात्म और प्रेम से हीं नफरतों को मिटाकर दिलों को जोड़ा जा सकता है। उन्होंने अयोध्या विवाद की चर्चा करते हुये कहा कि मंदिर निर्माण के रास्ते में आयी बाधा को आपसी सहमती से ही हटाया जा सकता है।

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