जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उस की रक्षा करता है : मुनि श्री प्रतीक सागर



हावड़ा, 04 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

उत्तर हावड़ा के डवसन रोड स्थित पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के सभागार में आयोजित धर्म सभा में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान को मानने वाला भगवान का भक्त नहीं होता हैं, भगवान की मानने वाला भगवान का भक्त कहलाता है। भगवान दुश्मन को मिटाने की आज्ञा नहीं देते, दुश्मनी मिटाने की प्रेरणा देते हैं। दुश्मनी मिटाने का सरल रास्ता हैं - दुश्मन को देखकर मुस्कान बिखेरे और उस के पीठ पीछे उस की प्रशंसा करे।

मुनि श्री ने रविवारीय धर्म सभा में आगे कहा कि गाली का जवाब गाली से नहीं गीत से दे, शब्द ही गीत हैं शब्द ही गाली। प्रयोग आप को करना हैं, शब्दों की सम्पदा अनमोल हैं सोच समझ कर खर्च करे। सभी से हित मित प्रिय बोले जिससे आप के बोल तीर्थंकरों की तरह अनमोल हो जाये। मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने जीवन जीने के सूत्र प्रदान करते हुए कहा कि तोता मिर्ची खाता हैं और मिठा बोलता हैं। आदमी मिठा खाता हैं और कड़वा बोलता हैं। मोबाइल कितना भी महंगा क्यों न हो अगर बोल अच्छे ना हो तो कोई रिंग नहीं बजती और मोबाईल सस्ता हो और व्यहार अच्छा हो तो दिनभर फोन बजते हैं। मुनि श्री ने आगे कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उस की रक्षा करता है। धर्म कल्पवृक्ष हैं, काम धेनु है, चिंतामणिरत्न हैं धर्म आपस में लड़ना नहीं सीखाता हैं आपस में लाड करना सीखाता हैं।

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