“स्त्री दशा और दिशा” किताब का विमोचन समारोह



अनिल द्विवेदी, ब्यूरो इंडिया, इंडिया इनसाइड राष्ट्रीय।
लखनऊ, 29 जुलाई। सायं 5 बजे लखनऊ के प्रेस क्लब में पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, सुलखान सिंह के करकमलों द्वारा देश में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों, संबन्धित कानूनों, समाज में महिलाओं की स्थिति जैसे मुद्दों पर लिखी किताब- “स्त्री दशा और दिशा” का विमोचन समारोह आयोजित किया गया। यह किताब संयुक्त रूप से मुम्बई हाईकोर्ट की जानी मानी एडवोकेट आभा सिंह एवं दिल्ली की पत्रकार नसीम अंसारी कोचर द्वारा लिखी गयी है। स्वयंसेवी संस्था रणसमर फाउंडेशन के तत्वावधान में इस किताब का प्रकाशन हिन्दी में किया गया है ताकि देश की ज्यादातर महिलाएं जिन्हे अँग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है वो भी अपने हितों, अधिकारों और संबन्धित कानूनों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें। रणसमर फाउंडेशन लम्बे समय से गरीब और शोषित तबके तथा महिलाओं एवं गरीब बच्चों के कल्याण से संबन्धित कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है। इसी गतिविधि का अगला प्रयास यह किताब है।

बहुचर्चित सुनन्दा पुष्कर हत्याकांड और शीना बोरा हत्याकांड पर किताब में चैप्टर मौजूद है जिनमें इन मामलों की लचर जाँचों पर तमाम सवाल उठाये गये हैं। जांच एजेंसियां और पुलिस किस प्रकार अपनी तफ़्तीश में लूप होल्स छोड़ती हैं और रसूखदार अपराधियों को बच निकलने का रास्ता तैयार करती है।

एडवोकेट आभा सिंह मुम्बई की जानी मानी वकील हैं जिन्होंने बहुचर्चित शीना बोरा मर्डर मामले में पुलिस की लचर तफ़्तीश और संजय दत्त को बार-बार पेरोल की सुविधा दिये जाने जैसे मामलों के प्रति अदालतों का ध्यान आकृष्ट किया। सलमान खान से जुड़े हिट एंड रन केस को अदालत में पुनः जीवित करने का श्रेय भी उन्हे जाता है। आभा सिंह एवं नसीम अंसारी कोचर के संयुक्त प्रयास से देश में औरतों की वास्तविक दशा, उनके प्रति भेदभावपूर्ण नज़रिया और उन पर होने वाले अत्याचारों की समग्र तस्वीर इस किताब के माध्यम से सामने लायी जा रही है। किताब को लिखने के दौरान दोनों लेखिकाओं ने अनेकों पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की, उनकी दर्दनाक कहानियाँ सुनी और उन कहानियों को उनकी ही जुबानी इस किताब में समाहित किया है। किताब में महिलाओं से संबन्धित जिन अन्य विषयों को संजोया गया है वह संक्षेप में इस प्रकार है.........

• किताब में देश के प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक धर्म, जाति की महिलाओं से जुड़ी त्रासदियों, उनके प्रति हो रहे अपराधों के ब्योरे के साथ साथ कानूनों की जानकारियां समाहित हैं।
• बलात्कार के वे मामले उदाहरण के तौर पर लिए गये हैं जो बेहद जघन्य थे और अदालतों में सुनवाई के दौरान अपराधियों को समुचित सजा देने की राह में कानून में खामिया उजागर होने पर नये स्त्री हित के कानूनों के निर्माण के आधार बने।
• किताब में उन कानूनों को भी सामने रखा गया है जिसका दुरूपयोग अदालतों में महिलाओं द्वारा ही महिलाओं के खिलाफ हो रहा है और जिनमें संशोधनों की बेहद जरूरत है। जैसे- 498 ए कानून।
• औरत पर हो रहे तमाम तरह के जुल्म – चाहे वह घरेलू हिंसा हो, दहेज प्रताड़ना हो, तीन तलाक का मामला हो, हलाला की बेरहम और शर्मनाक रीत हो, मेरिटल रेप हो, आनर किलिंग अथवा खाप की सतायी औरतों की कहानियां हो, उदाहरण देते हुए उनके कारणों, सामाजिक प्रभाव व उन पर जारी राजनीति जैसे तमाम कारणों को इस किताब का हिस्सा बनाया गया है।
• महिलाएं अपने अधिकार जाने, इसके लिए बड़े साधारण शब्दों में स्त्री हित के कानूनों को इसमें समझाया गया है।
• वे हाई प्रोफाइल मर्डर केस इसमें लिए गये हैं जिन्हे पैसे और रसूख के दम पर दबाने की कोशिशें हो रही है। जैसे- सुनन्दा पुष्कर मामला।

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