@संतोष यादव सुल्तानपुर।स्थानीय भाजपा सांसद वरूण गांधी ने वेतन बढोत्तरी की मांग करने वाले माननियों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नजीर की याद दिलाई है।
सांसदों के वेतन निर्धारण के लिए लोकसभा अध्यक्ष से एक बाहरी निकाय बनाने की मांग करते हुए वरूण ने कहा है कि सांसदों का वेतन निर्धारित करने के लिए एक स्वतंत्र एवं बाहरी निकाय बनाना होगा। गरीब व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने साथी सांसदों से आह्वान किया कि संसद की इस अवधि के लिए हमें अपने विशेषाधिकारों को छोड़ देना चाहिए।
संसद में बिना चर्चा के ही बिल पारित किए जाने के मामले पर भी गांधी ने चिंता जताई है। उन्होंने बिना चर्चा के सरकार के जरिए संसद से पारति कराए गए कराधान बिल पर भी सवाल उठाया है। वेतन बढ़ोतरी की मांग करने वाले सांसदों को वरूण गांधी ने गरीब किसान के दुर्दशा की याद दिलाई है। शून्य काल के दौरान सांसदों के वेतन संबंधी मामला उठाते हुए गांधी ने किसानों की दुर्दशा का भी उललेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह पूर्व तमिलनाडु के एक किसान ने अपने राज्य के किसानो की पीड़ा के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में खुद की जान लेने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि जैसा कि हम जानते हैं कि अपनी बात मजबूती से रखने के लिए पिछले महीने इसी समूह के सदस्यों ने खुद का मूत्र पिया एवं उनके साथी किसानो जिन्होंने आत्महत्या की थी उनकी खोपड़ियो का प्रदर्शन भी किया। बावजूद उसके तमिलनाडू की विधानसभा ने 19 जुलाई को बेरहमी से असंवेदनशील अधिनियम के द्वारा अपने विधायको की तनख्वाह दोगुनी कर ली।
* गांधी, नेहरू के त्याग का दिया भाजपा सांसद ने हवाला
भाजपा एवं संघ बेशक देश की तमाम समस्याओं के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को कोसती रही है लेकिन वेतन बढोत्तरी की मांग करने वाले सांसदों को आईना दिखाने के लिए सांसद वरूण गांधी ने महात्मा गांधी के कथनों का उल्लेख किया।
वरूण के अनुसार गांधी ने लिखा है कि, मेरी राय में सांसदों और विधायको द्वारा लिए जा रहे भत्ते उनके द्वारा राष्ट्र के लिए दी गयी सेवाओ के अनुपात में होना चाहिए।
इसके अलावा नेहरू कैबिनेट के फैसले का उल्लेख करते हुए वरूण ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरु के कैबिनेट की प्रथम बैठक में कैबिनेट के समस्त सदस्यों ने तात्कालिक समय में नागरिको की आर्थिक पीड़ा को देखते हुए 6 महीने तक तनख्वाह का लाभ न लेने का सामूहिक निर्णय लिया था।
इसके अलावा ओडिशा विधानसभा के सदस्य विश्वनाथ दास ने अपने लिए निर्धारित 45 रूपये प्रतिदिन के स्थान पर यह कहते हुए सिर्फ 25 रूपये प्रतिदिन लिए कि, उनको इससे ज्यादा की आवश्यकता नहीं है। वीआई मुनिस्वामी पिल्लई ने 1949 में किसानो की पीड़ा को मान्यता देने के लिए 5 रूपये प्रतिदिन की कटौती का प्रस्ताव विधानसभा में रखा।