किसानों की आय बढ़ाने में जैव प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका



काशी, 20 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

अनुवांशिकीय एवं पादप प्रजनन विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवं अन्र्तराष्ट्रीय चावल अंशुसंधान संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास में जैव अभियांत्रिकी के उपयोग विषय पर संगोष्ठी का आयोजन 20 व 21 मार्च 2018 को किया गया है। 20 मार्च को गोष्ठी के उदघाटन सत्र में अन्र्तराष्ट्रीय चावल अंशुसंधान संस्थान, फिलीपिंस के वैज्ञानिक डा• नफिस मिया ने कहा कि आज दक्षिण एशिया के देश विशेष रूप से भारत, बाग्लादेश और नेपाल की 40 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या जिसमें महिलाएं और बच्चें बहुतायत में है कुपोषण और बिमारियों से ग्रस्त है। यदि तुरंत प्रभावशाली कदम नहीं उठाएं गये तो स्थिति भयावह हो सकती है, इसके लिए आवश्यक है कि विज्ञान तथा तकनीकियों का कृषि में संमुचित उपयोग किया जाय।

भरतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक विभाग के अध्यक्ष आशीष गुहा ने कहा कि यद्यपि धान-गेहूॅ ने हमारे देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है परंतु इन फसलों की भोजन में अत्यधिक प्रयोग से पोषक तत्वों से भरपुर अन्य फसलों एवं उनके उत्पाद आम आदमी की थाली से लुुप्त हो गयें है। जिसके कारण कुपोषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और बीमारियों के कारण किसानों की आर्थिक दशा दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। आवश्यकता है कि ऐसी फसल प्रजातियों को विकसित किया जाए जिसमें अधिक उत्पादन के साथ भरपूर्ण पोषक तत्व हो। जैव प्रद्योगिकी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान कर सकती है।

सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो• पंजाब सिंह ने कहा की आज देश में कृषि वैज्ञानिकों के सामने एक ऐसी सामाजिक-राजनीतिक एवं अवैज्ञानिक दृष्टिकोण की चुनौती आयी है जिसने जैव प्रौद्योगिकी के कृषि में उपयोग को प्रभावित किया है। जबकि दुनिया में 150 मिलीयन हेक्टयर से ज्यादा क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के प्रयोग से विकसित फसले उगायी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जलवायु परिवर्तन की समस्या तथा किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृ़ड़ करना है तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विशेषरूप से जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना ही पड़ेगा।

आयोजन सचिव डाॅ• पी•के• सिंह ने संगोष्ठी के उदेश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस संगोष्ठी में भारत, बांग्लादेश, नेपाल एवं अफ्रीका के 150 से ज्यादा वैज्ञानिक भाग ले रहे है जिनमें से अधिकांश युवा वैज्ञानिक है।

प्रो• ए• वैश्म्पायन, निदेशक कृषि विज्ञान संस्थान ने काशी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय व कृषि विज्ञान संस्थान की शैक्षणिक की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियों तथा तकनीकियों ने इस क्षेत्र के किसानों की भोजन सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रो• बंदना बोस ने अनुवांशिकीय एवं पादप प्रजनन विभाग की उपलब्धियों की विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि विभाग द्वारा विकसित विभिन्न फसलों की प्रजातियां का योगदान पूर्वी भारत की हरित क्रांति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने संगोष्ठी में भाग ले रहे वैज्ञानिकों, उपस्थित विशिष्ट अतिथियों, अध्यापकों एवं छात्रों के प्रति अभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ• रक्षित ने किया।

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