हिन्दुस्तान मोटर्स यूनियंस ने दी आंदोलन की चेतावनी



---प्रकाश पाण्डेय, कोलकाता, 20 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

महज 80 करोड़ रुपए में फ्रांस की ऑटो कंपनी प्यूजो को एंबेसडर कार का ब्रांड बेचने के उपरांत 24 मई 2014 को हुगली जिले के उत्तरपाडा़ इलाके में स्थित सीके बिड़ला ग्रुप के मालिकाना हक वाली हिन्दुस्तान मोटर्स कंपनी को बंद कर दिया गया। इस दौरान दो बार त्रिपक्षीय बैठके भी हुई और मजदूरों की समस्याओं के निराकरण की बात रखी गई। लेकिन उसके बाद कोई बैठक नहीं हुई और मजदूरों को बेहाल छोड़ दिया गया। यहां तक की मजदूर कॉलोनी में रखने वाले परिवारों को पानी और बिजली जैसी मौलिक आवश्यकताओं से भी वंचित कर दिया गया।

आज भी 400 से ज्यादा ऐसे मजूदर उत्तरपाडा़ स्थित हिन्दुस्तान मोटर्स मजदूर कॉलोनी में रह रहे हैं, जिन्होंने वीआरएस नहीं लिया है। कारखाने की सभी यूनियन्य एक मत हो इस कारखाने को दोबारा खोले जाने के पक्ष में अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इस बाबत सभी प्रमुख पांच यूनियंस के प्रतिनिधि द्वारा राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक को गुहार भी लगाई थी। लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। ऐसे में मंगलवार को महानगर स्थित प्रेस क्लब में उत्तरपाड़ा-कोतरंग नगरपालिका के पार्षद कामाख्या नारायण सिंह के नेतृत्व में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें सभी पांच यूनियनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत किया और अपनी मांगों से मीडियाकर्मियों को अवगत कराया।

उक्त मौके पर हिन्दुस्तान मोटर्स वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संतोश्री चटर्जी, एमएम एंड हिल एसएसकेयू के अध्यक्ष अमिताभ भट्टाचार्य, हिन्दुस्तान मोटर लिमिटेड इम्प्लाई एंड मजदूर यूनियन के सचिव सामान्य चटर्जी, हिन्दुस्तान मोटर्स एंड हैदराबाद इंडस्ट्री इम्प्लाइ्स यूनियन के महासचिव अजीत चक्रवर्ती, एसएसयू के महासचिव प्रकाश चंद मल्लिक और स्थानीय पार्षद कामाख्या नारायण सिंह उपस्थित थे।

वहीं पत्रकारों को संबोधित करते हुए अजीत चक्रवर्ती ने कहा कि हम केवल चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर कारखाने को दोबारा खोला जाए। यदि हमारी मांगों को अनसुना किया गया तो आगे हम बड़े स्तर पर आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इधर, स्थानीय पार्षद कामाख्या नारायण सिंह ने कहा कि आज जिस स्थिति में लोग मजदूर कॉलोनी में रह रहे हैं उसे देख दुख होता है। बिजली, पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं, चारों तरफ असुरक्षा का माहौल कायम है। लेकिन इन बेहाल मजदूरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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