---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 21 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● संगीत एवं मंच कला संकाय का एप और बेवसाईट बनाने को न्यूरोलाजिस्ट ने दिया सुझाव वाराण
ब्रेन तरंग से चलता है। संगीत के अलावा ब्रेन को कोई नहीं समझ सकता है। मानव जीवन में गलत निर्णय तभी होता है जब ब्रेन लय में नही होता। यह बात बुधवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय संगीत एवं मंच कला संकाय के राष्ट्रीय सेंवा योजना ईकाई की ओर से पं• ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में आयोजित संगीत द्वारा विभिन्न रोगों का उपचार विषयक विशेष व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो• विजयनाथ मिश्र ने कही।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लय में नहीं होता वह कहीं का नहीं होता। स्नान करने के बाद बालों में कंघी करने से ब्रेन संगीत के लय में आ जाता है। प्रो• मिश्र ने संगीत एवं मंच कला संकाय के प्रमुख को यह सुझाव भी दिया कि यहां के अध्यापक और विद्यार्थी देश ही नहीं विदेशों की धरती पर अपनी संगीत कला का लोहा मनवा चुके है। ऐसे में संगीत संकाय का एप और बेवसाइट का निर्माण हो ताकि देश दुनियां के संगीत प्रेमियों को यहां के कलाकारों को सुनने का मौका मिल सके।
इसके पूर्व मुख्य वक्ता प्रो• विजयनाथ मिश्र, संकाय प्रमुख प्रो• वीरेंद्रनाथ मिश, प्रो• चितरंजन जोशी ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डा• ज्ञानेश चन्द्र पाण्डेय ने किया। मुख्य वक्ता न्यूरोलाजिस्ट प्रो• विजयनाथ मिश्र को संकाय प्रमुख माल्यार्पण एवं अंगवस्त्रम भेंटकर स्वागत किया।
इस अवसर राजा मान सिंह संगीत विश्वविद्यालय राजस्थान के पूर्व कुलपति प्रो• चितरंज जोशी, प्रो• ऋतिक सान्याल, प्रो• राजेश साह, डा• संगीता पंडित, डा• विजय कपूर, डा• मधुमिता भट्टाचार्य, पं• प्रेमकिशोर मिश्र आदि मौजूद रहै। धन्यवाद ज्ञापन प्रो• रेवती साकलकर ने दिया।