---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 22 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● सरकारों ने दिया मां गंगा को धोखा - प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र
● विश्व जल दिवस पर बनी मानव श्रृंखला
मां गंगा भारतीय संस्कृति की धड़कन हैं। सुरसरि के प्रवाह में जीवन का संगीत, कला, विज्ञान, साहित्य और इतिहास भी है। इसी आवश्यकता की तलाश के लिए विश्व जल दिवस के अवसर पर गुरुवार को संकटमोचन फाउंडेशन एवं मदर फार मदर्स के संयुक्त तत्वावधान में तुलसीघाट पर गंगानुरागियों का जमावड़ा हुआ। देखते ही देखते अस्सीघाट से चेतसिंह घाट तक गंगा की स्वच्छता, अविरलता और जल संरक्षण के लिए गंगानुरागियों ने हाथ से हाथ मिलाकर मां गंगा की स्वच्छता के लिए मानव श्रृंखला बनाकर सरकार और समाज से गुहार लगाई।
तुलसीघाट पर आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो• पृथ्वीश नाग ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मां गंगा कहानी है। गंगा की स्वच्छता, अविरलता के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। गंगा मिटेगी तो भारत की संस्कृति भी मिट जायेगी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुये संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1984 में राजेन्द्र प्रसाद घाट से गंगा सफाई अभियान का शुभारंभ किया, तब से लेकर आजतक गंगा की स्थित अच्छा होने के बजाय और ज्यादा खराब होती जा रही है। पहले 16-17 नाला ही गंगा में गिरते थे, जिनके माध्यम से 150 मिलियन लीटर मल-जल का गंदा पानी जाता था, आज 32 नाले गंगा में गिर रहे है, जिनके माध्यम से 350 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी गंगा में गिर रहे है। सरकारों ने गंगा की स्वच्छता के नाम पर सिर्फ धोखा दिया। हर फोरम पर गंगा की बातें हो रही है, लेकिन हो कुछ नहीं रहा है, गंगा की स्थिति दिन पर दिन बद्दतर होती जा रही है। गंगा हमारी संस्कृति, सभ्यता की जननी होने के साथ्ा-साथ देश की नाड़ी है। प्रो• मिश्र ने मदर फॉर मदर्स के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि अाज इस महत्वपूर्ण दिवस पर काफी संख्या महिलाओं की भागीदारी यह दर्शाता है की मां गंगा के लिए माताएं भी आगे आ रही है जबतक देश की आधी आबादी मां गंगा से नहीं जुड़ेगी गंगा प्रदूषाण् मुक्त नहीं होगी।
इसके पूर्व मदर फार मदर्स की अध्यक्षा आभा मिश्र ने अभ्यागतों का स्वागत किया। श्रृंखला में शहर के विभिन्न स्कूलों के बच्चे, अध्यापक एवं सामाजिक संघठनों के लोग मौजूद रहे।