ये है बनारस! डाक कर्मियों के अभाव में कबाड़ी को बेच दिया जाता है लोगों का डाक???



ये है बनारस! डाक कर्मियों के अभाव में कबाड़ी को बेच दिया जाता है लोगों का डाक???
वाराणसी। पीएम के संसदीय क्षेत्र में डाक वितरण करने वाले कर्मचारियों के अभाव में लोगोें के कीमती डाक को कबाड़ के भाव में बेच दिया जाता है। बताया जाता है कि प्रधान डाकघर कैटोंमेंट से डाक बेचने का काम कई वर्षो से किया जा रहा है। विभाग के पोस्टमैन दुर्गा सिंह इस मामले में रंगे हाथ पकड़ा गया है। पुलिस की पूॅछ-ताछ में उसने कई कर्मचारियों के संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पोेस्टमास्टर और पीआरआई को इस डाक विक्री की मौखिक सूचना दी गयी तो उन्होंने कहा कि हमारे पास स्टाफ नहीं है जैसा चल रहा है चलने दो। इस खुलासे के बाद विभाग के आला अधिकारियों के कान खड़े हो गये है। तमाम बैंक, बीमां नीवेशकों के एसआईपी, पुलिस प्रशासन को सूचनार्थ पत्रक, विभिन्न विभागों द्वारा जारी किये गये नियुक्ति पत्र जो स्पीडपोस्ट या रजिस्ट्री के माध्यम से लोगों तक पहुॅचाया जाना होता है उसको कबाड़ के यहॉ बेचने के पीछे छुपी मंशा तो पुलिस इंक्वायरी में उजागर होगा।
डाक विभाग का डाका अभियान।
इस घटना के बाद जो चर्चाओं में विशेष रूप से सामने आ रहा है वो ये कि रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों द्वारा अपने दूर रहने वालेे भाईयों को राखी और पैसे भी लिफाफे में डालकर भेजे जाते है। प्रधान डाक घर के अंदर लिफाफों को खोलकर जॉच कर पाना मुश्किल होता है, लिहाजा सुरक्षित स्थान पर हर लिफाफों को खोल कर उसमें रखें पैसों को चेक करना बताया जा रहा है। जिन डाकों का आनलाईन मानिटरिंग होती हों उसकों बेच पाना असम्भव है। लोगो की माने तो भाई बहन के मासूम प्यार के बीच डाक विभाग का डाका डालने का ये प्रयास है।

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