महिलाओं का सशक्तिकरण उन्हें गरिमामय जिंदगी, सम्मान के साथ-साथ बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने के योग्य बनायेगा : उपराष्ट्रपति



हैदराबाद, 30 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● वास्तविक लैंगिक समानता तभी हासिल की जा सकती है जब महिलायें सशक्त बनें

● मनुष्यों की आधी जनसंख्या को हर हाल में बेहतर अवसर मिलने चाहिये

● उपराष्ट्रपति ने महिला दक्षता समिति के रजत जयंती समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडु ने कहा है कि महिलाओं का सशक्तिकरण उन्हें गरिमामय जिंदगी, सम्मान के साथ-साथ बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने के योग्य बनायेगा। वे 30 मार्च 2018 को हैदराबाद में महिला दक्षता समिति के रजत जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा और तेलंगाना के उप-मुख्यमंत्री महमूद अली एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि आरंभिक वैदिक काल से ही जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के समान माना गया था। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक सोच में लैंगिक समानता को एक केंद्रीय सिद्धान्त माना गया है। उन्होंने आगे कहा कि हम उस संस्कृति और विश्व दर्शन के गौरवशाली उत्तराधिकारी हैं जिसमें महिलाओं को ना केवल समान माना गया बल्कि उन्हें पूज्य भी माना गया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का दीर्घकालीन समृद्ध इतिहास अद्भुत महिलाओं की असंख्य उपलब्धियों से भरा हुआ है। चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रतिभा, दिल्ली की एक मात्र महिला शासक रजिया सुल्ताना, गोंड रानी दुर्गावती, राजमाता जीजाबाई और प्रसिद्ध कवियत्री मोला जिन्होंने तेलुगु में रामायण लिखी, अक्का महादेवी, अंदल, अव्वैयर और अन्य महान महिलाओं का उदाहरण देते हुये उन्होंने कहा कि भारत के पास अत्यधिक सफल महिलाओं की एक लंबी श्रृंखला है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी समृद्ध विरासत के बावजूद लैंगिक भेदभाव की एक दुर्भाग्यपूर्ण परंपरा भी रही है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम स्वरूप साक्षरता और शिक्षा में कमी आयी और इसके फलस्वरूप कामकाजी जनसंख्या और राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व घटा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा, लाभदायी रोजगार और विकास के अवसरों तक असमान पहुंच की वजह से लैंगिक असमानता और महिलाओं पर अत्याचार और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले एक देश के रूप में हमारी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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