---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी , 3 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● छ: दिवसीय संकटमोचन संगीत समारोह का 4 अप्रैल से होगा आगाज
पश्चिम के अति गतिशील प्रभाव और आंशिक रुप से निर्थक ध्वनि समूह को जब लोग संगीत मानना शुरू कर चुके है। ऐसी परिस्थिति में संकटमोचन संगीत समारोह वस्तुतः न केवल घाव भरना है बल्कि एक अमृत लेप है। युवा पीढ़ी शास्त्र से विमुख हो नियम, नैतिक और नानदनिक मूल्यों को छोड़कर नया मूल्य बनाने में जहां जुटी है वहीं संकटमोचन संगीत समारोह वस्तुतः अवमूल्यन के दौर में पुनर्मूल्यन है। शास्त्रीय संगीत के माध्यम से हम धार्मिक नहीं अध्यात्मिक होते हैं। राष्ट्रीयता का बोध नहीं बल्कि मानवता का बोध होता है। इस सत्य को समझाने के लिए संकटमोचन संगीत समारोह जैसे शताब्दी प्राचीन आयोजन नितांत सार्थक है।
विशेषकर वाराणसी में जिस नगरी की ओर सम्पूर्ण विश्व देखता है, सिखता है और प्रेरणा पाता है - उस नगरी मेंं यह समारोह केवल संगीत समारोह नहीं बल्कि सांस्कृतिक क्रांति का प्रतीक है। जिस समाज में लोग आधुनिक होने के नाम पर बाये हाथ से सेल्फी खिंचने मेंं व्यस्त हैं उसी समाज में संकटमोचन संगीत समारोह के कैमरे का लेंस समाज और संस्कृति के संरक्षण पर है। महान जननायक, दार्शनिक, कवि गोस्वामी तुलसीदास के समाज परिवर्तन एवं सुधार के आदर्शों को संकटमोचन मंदिर के महंत परिवार ने विगत तीन प्रजन्मों से न केवल सुरक्षित रखा है बल्कि श्रीवृद्धि भी की है। स्मृतिशेष महंत मृदंगाचार्य पं• अमरनाथ मिश्र, स्मृतिशेष अभियंत्रण विज्ञानी प्रो• वीरभद्र मिश्र तथा वर्तमान में आईआईटी बीएचयू में इलेक्ट्रॉनिक विज्ञानी प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र, बीएचयू के प्रख्यात न्यूरोलाजिस्ट एवं मरीजों के मसीहा नाम से चर्चित प्रो• विजयनाथ मिश्र और उनके अनुयायीगण जिस आदर्श को गोस्वामी जी ने स्थापित किया था, "न लेवे के एक न देवे के दो" का अनुसरण किया करते हैं।
"प्यार नहीं है सुर में जिनके वो मुरख इंसान नहीं है
सुर इंसान बना सकता है सुर भगवान या रहमान मिला सकता है"
समदर्शी देवता श्री हनुमानजी के दरबार में साम्प्रदायिकता के घाव में जर्जर भारत में संकटमोचन संगीत समारोह एक अमृत वर्षा है। दिमागी कचड़ा सफाई का एक सात्विक यंत्र है।
इस बार 4 से 9 अप्रैल तक संकटमोचन संगीत समारोह का आयोजन किया गया है। संगीत समारोह में पं• जसराज, फिल्मी अदाकारा शबाना आजमी, मशहूर गीतकार जावेद अख्तर, लोक कोकिला मालिनी अवस्थी, डा• सोनलमान सिंह, येल्ला वेंकटेश्वर राव, पं• हरिप्रसाद चौरसिया, पं• रोनू मजूमदार सहित दो दर्जन से ज्यादा पद्म पुरस्कार प्राप्त कलाकार श्री हनुमत दरबार में स्वरांजलि देगें।