कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख से बातचीच के अंश...



---आकांक्षा सक्सेना, 06 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड की तरह ही घोषित है भारतीय सप्तऋषि अवार्ड

पंकज, देश के सबसे बड़े कायस्थ संगठन कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय के संस्थापक के रूप में बेहद चर्चित व्यक्तित्व हैं। इस संगठन की एकता, विराटता और व्यापकता, विश्वसनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंकज द्वारा स्थापित गठित यह संस्था आज विश्व के 49 देशों में कार्यरत है और निस्वार्थ सामाजिक विकास के कार्यक्रम संचालित कर पूरे विश्व में पीस एण्ड हैपीनेस, धार्मिक सौहार्द के नये कीर्तिमान गढ़ कर अपने देश भारत का परचम लहराने में सशक्त भूमिका निभा रही है। आज पंकज ने समाज को एकसूत्र में बांधने के अभूतपूर्व, अद्भुत, अकल्पनीय कार्य किसी तारीख, तारीफ़ और परिचय के मौहताज़ नहीं है। आज के इन नवयुगनिर्माता और बेमिशाल सच्ची शख्सियत का  जन्म 11 जनवरी 1971 में हथियागढ़ बस्ती (उत्तर प्रदेश) में हुआ। इन्होंने एमबीए पूर्ण करने के बाद पहली जॉब- कम्पनी झंडू में क्षेत्रीय प्रबंधक रहे। फिर गोल्ड क्रास में नेशनल सेल्स मैनेजर बने और अन्त में ऐपको में डीजीएम पद पर रहते हुये उन्होंने महसूस किया कि क्या भगवान ने हमें सिर्फ धनार्जन के लिये ही यह जीवन दिया है या फिर लोगों को उनके अधिकारों-लक्ष्यों के प्रति जगाने के लिये उनका जन्म हुआ। फिर क्या था उन्होंने नौकरी छोड़ दी और लोगों के हृदयतल पर अपनी दस्तक देने को निकल पड़े और लोगों को रोजगार देने के वास्ते उन्होंने नित्या बाजार की शुरुआत की। फिर 3G म्यूजिक की शुरुआत की।

लम्बे संघर्षोंपरांत वर्तमान में बुलंद समाजसेवी छवि के साथ ही पंकज बीएचएमएल यानि बिग हैंड मार्कीटिंग लिमिटेड के चैयरमैन हैं और भारतीय जन जागृति संस्थान के संस्थापक और संयोजक हैं तथा 'सप्तऋषि' अवार्ड जो गिनीज बुक की तरह प्रारम्भ किया गया भारतीय अवार्ड है, के संस्थापक और आयोजक के रूप में विश्वविख्यात शख्सियत हैं। जिनका फेमस कथन है कि ''मैं किंग बनना नहीं चाहता बल्कि किंगमेकर बनाना चाहता हूँ।"'

पंकज अपने पर किए गए अनेक प्रश्नों के जवाब में कहते हैं कि मेरा नाम ही पंकज भईया है। जब हमने अपने कायस्थ समाज से यह अपेक्षा जाहिर की कई उप नाम होने की वजह से कभी कभी यह पता नहीं चल पाता की सामने वाला भी हमारा कुलवंशज है। इसी विचार से सबसे पहले अपने ही नाम के साथ कायस्थ लगाना शुरु किया। मैं बस्ती जनपद जो कि अयोध्या और गोरखपुर के बीच में है शेखर सदन हथियागढ़ का रहने वाला हूँ।

जब मैं पढ़ता था तभी अपने समाज के युवाओं को अन्य जाति के युवाओं को सामाजिक और राजनीतिक रूप से कमजोर देखता था तो पीड़ा होती थी कि संख्या बल होने के बावजूद एकता की कमी की वजह से हमारी यह दुर्दशा है जिसने मुझको भविष्य में कायस्थ समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। आज भी कुछ खास परिवर्तन नहीं आया है लेकिन अब संतुष्टि है कि कायस्थवाहिनी की मुहिम से समाज में अब एकजुटता की बयार बह निकली है जो कि एक बड़े परिवर्तन का संकेत है।

इस गतिविधि से जुड़े 19 वर्ष हो गए। पहली उपलब्धि आज के 14 वर्ष पहले बस्ती में राष्ट्रीय कायस्थ सम्मेलन। दूसरी भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से सम्मान। तीसरी देश का चौदहवाँ चित्रगुप्त सम्मान सहित दर्जनों सम्मान। चौथी कायस्थ वाहिनी आज जो विश्व के भारत सहित 49 देशों में कार्यरत है।

यह भारत के कायस्थों की वह संस्था जो रोटरी क्लब के तर्ज पर चैप्टर सिस्टम से पूरे विश्व के कायस्थों को एक दूसरे से जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसका मूल उद्देश्य है प्रभू चित्रगुप्तजी को सर्व समाज में स्थापित कराना। और कायस्थ समाज को एकसूत्र में बांधने के लिए हर संभव प्रयास करना।

पहली योजना वर्ष 2019 तक 100 देशों तक कायस्थ वाहिनी का विस्तार, दूसरी योजना भारत के हर घर तक प्रभू श्री चित्रगुप्त की स्थापना। तीसरी अलग से चित्रगुप्त मन्दिर न बनाते हुए पहले से बने मन्दिरों में प्रभू की स्थापना। जिससे वो स्वतः एक दूसरे का सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक सहयोग कर सके। अंतिम कायस्थ समाज को राजनैतिक रूप से जागरूक कर नेतृत्व की तरफ अग्रसर करना।

हम सप्तऋषि अवार्ड के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर के किसी भी कार्य क्षेत्र के प्रतिभाशाली निस्वार्थ  व्यक्तित्व को हमारे संगठन कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय की तरफ से उनका स्वागत सत्कार उन्हें सम्मानित करते हैं। जिससे कि नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हेतु  विश्व स्तर पर शांति खुशी और सहयोग की भावना प्रबल हो सके। संदेश यही है कि सभी साथ आयें और कुछ नेक काम करके अपना और देश का नाम ऊँचा करें।

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