प्रकाश पाण्डेय, कोलकाता, 14 अगस्त। भारत के आजादी के 70 साल पूरे होने के पूर्व संध्या पर कोलकाता के महाजाति सदन में फोरम फॉर इंटेलीजेंट प्लानिंग ऑपरेशन की ओर से बंगाल की मौजूदा हालात और गौरवपूर्ण अतीत पर रौशनी डाली गई। एफआईपीओ की और से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि राज्य के बुद्धजीवियों को एक मंच पर लाया जाए और उनके अनुभवों के जरिए कुछ समाधान प्राप्त किया जा सके। आज आजादी प्राप्त किये 70 साल हो चुके हैं लेकिन पश्चिम बंगाल की स्थिति दिन ब दिन बदतर ही हुई है। इतना ही नहीं कांगेस की छलावापूर्ण सियासत और फिर वाम शासन ने इस राज्य को गर्त में धकेला। वाम सत्ता जाने के बाद आस जगी कि तृणमूल सरकार राज्य में नव साधनों को स्थापित करेगी और पुराने बंद पड़े कल कारखानो को पुनः चालू करवाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। आज विकास कोसो दूर नज़र आ रही है और विकास की जगह गुण्डातंत्र ने ले लिया है। सियासी विचारधारा यहाँ बदलते रहे हैं खैर, इससे फर्क नहीं पड़ता और किसी भी विचारधारा में आम अहित के बारे में नहीं कहा गया है। लेकिन मौजूदा हालत को देखे तो ऐसा लगता है कि यहाँ विचारों की बलि दे दी गई है। एफआईपीओ के साथ आज हर क्षेत्र के नामचीन शख्सियत जुड़े हैं जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, पत्रकार, अधिवक्ता, लेखक, समाजसेवी व अन्य। इस संस्था का केवल एक ही उदेशय है कि नव विचारों व अनुभवों को एक मंच पर लेकर उसका सदुपयोग कर नव सृजन की ओर राज्य को अग्रसर किया जाए और यहाँ की दुर्व्यवस्था को खत्म किया जाए।
एफआईपीओ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान अतिथि के रूप में स्वामी परमात्मानन्द जी महाराज, प्रोफेसर लिपी घोष, प्रोफेसर अम्बुज मोहंती, मशहूर कॉलमनिस्ट काज़ी मासूम अख्तर, राज्य भाजपा के प्रमुख दिलीप घोष, वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शनी दत्ता व पत्रकार शान्तिदेव सेन गुप्त उपस्थित थे। इस मौके पर प्रधान अतिथि के रूप में मौजूद स्वामी परमानन्द महाराज ने कहा कि आज बंगाल नारदा और शारदा में लिप्त है आम लोगों की परवाह राज्य की सीएम को नहीं है। यहा तो सिर्फ धर्म तुष्टिकरण की सियासत हो रही है। आपस में हमें लड़ाया जा रहा है और ये काम वाम सरकार भी करती थी और आज तृणमूल सरकार कर रही है। आज आवश्यकता है जागृत होने की और सही गलत को समझने की। अगर आज हम नहीं जगे तो हमारा भविष्य सोया रहेगा। वही बंगाल भाजपा के प्रमुख दिलीप घोष ने कहा कि राज्य की जो गति वाम और तृणमूल सरकार ने किया है आगामी दिनों में उसका फल भी उन्हें भोगना पड़ेगा और तृणमूल सरकार ने तो बंगाल को केवल शारदा और नारदा दिया है। जिन्ना एक राष्ट्र की बात करते थे लेकिन नेहरू ने एक होने की कभी पहल ही नहीं की। कांग्रेस ने इस देश को शुरू से ही छला है। रही बात बंगाल की तो आज यहाँ खुलेआम पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लग रहे है और दीदी वोट बैंक की सियासत कर रही हैं।