ममता को हराने के लिए भाजपा-माकपा हुए एक ?



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 15 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

सत्ता के गलियारे में जमाना ऐसा आ गया है कि अब आदर्श पर चलने की बातें सिर्फ भाषण साबित होने लगी हैं। एक तथाकथित सांप्रदायिक दल है तो दूसरा खुद को देश का सबसे धर्मनिरपेक्ष दल मानता है। दोनों दलों में सांप-नेवले वाली दुश्मनी जगजाहिर है। लेकिन जब मुकाबला पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके तृणमूल कांग्रेस से करना हो, तब राजनीतिक मजबूरियां, आदर्श गायब हो जाते हैं। माकपा और भाजपा एक साथ, यह बात सुनकर लोगों को भले ही हैरानी हो लेकिन अब इसमें हैरान होने जैसा कुछ रह नहीं गया है। हावड़ा जिले के बागनान के कल्याणपुर पंचायत चुनाव में एक ही महिला ने भाजपा और माकपा के उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा। जब इस बारे में चर्चा गर्म हो गई कि ज्योत्सना प्रमाणिक दोनों दलों की ओर से चुनाव लड़ रही है, तब माकपा ने अपने उम्मीदवार का नामांकन वापस करवा लिया। इस तरह अब वह महिला भाजपा उम्मीदवार है।

हालांकि इलाके के लोगों की ओर से सवाल पूछा जा रहा है कि भाजपा की उम्मीदवार को माकपा ने अपना उम्मीदवार कैसे बना लिया ? क्या दोनों दल एक दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। माकपा-भाजपा दोनों संगठन वाले दल माने जाते रहे हैं क्या उनके संगठन को मालूम ही नहीं था कि उम्मीदवार संघी है या कम्युनिस्ट ?

मालूम हो कि ज्योत्सना बागनान के एक नंबर ब्लाक के कल्याणपुर ग्राम पंचायत के राससीट इलाके में रहती हैं। गांव के अंगनवाड़ी की वह कर्मचारी हैं। उन्होंने माकपा और भाजपा के टिकट पर पर्चा भरा और उनका नामांकन वैध पाया गया। लेकिन एक उम्मीदवार दो दलों से पर्चा दाखिल नहीं कर सकता है। इससे उसका पर्चा रद्द हो सकता है। जब तक इस बात की जानकारी मिली, नामांकन दाखिल करने का समय बीत चुका था।

इधर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से भाजपा-माकपा गठजोड़ खुलकर सामने आने को लेकर जोरदार प्रचार अभियान शुरू कर दिया गया। हाईकोर्ट की ओर से नामांकन की प्रक्रिया स्थगित रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन आदेश की प्रति शुक्रवार शाम तक आयोग के पास नहीं पहुंंची थी। इसलिए नामांकन वापस लेने का काम चल रहा था। मौका देख कर माकपा ने ज्योत्सना का नाम वापस ले लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दोनों दलों को पता ही नहीं था कि वह किस दल की उम्मीदवार हैं, तब उनका नामांकन रद्द होने देना चाहिए था। लेकिन उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द होने से बचा कर माकपा ने साफ कर दिया है कि भाजपा के साथ उनका तालमेल है। जब इस बारे में पत्रकारों की ओर से माकपा के जिला सचिव विपल्व मजुमदार और भाजपा के जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) अनूपम मल्लिक से पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

दूसरी ओर, हावड़ा जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) पुलक राय का कहना है कि हमलोग शुरू से कह रहे हैं कि भाजपा-माकपा-कांग्रेस इकट्ठे होकर हमारे खिलाफ उम्मीदवार खड़ा कर रहे हैं। एक के मुकाबले एक उम्मीदवार खड़ा करके वे पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को पराजित करना चाहते हैं। इस घटना से सिद्ध होता है कि तीनों दल गठजोड़ करके हमे हराने में लगे हैं, लेकिन उनके इकट्ठा होने पर भी हमें फर्क नहीं पड़ता। मुख्यमंत्री के छह साल के विकास को देखकर लोग मतदान करेंगे।

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