---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 17 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
केंद्र सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल के पांच जिलों को माओवादियों से मुक्त जिला घोषित कर दिया गया है। इस तरह राज्य केंद्र सरकार की ओर से माओवादी मुक्त राज्य घोषित हो गया है। भले ही इसका मकसद राज्य को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बद करना और केंद्रीय सुरक्षा बल वापस लेना हो, लेकिन केंद्र ने स्वीकार किया है कि बीते 6 साल में राज्य में माओवादी गतिविधियां नहीं हुई है। इसके बाद वहां केंद्रीय सुरक्षा बलों के तैनात रहने की जरुरत नहीं रहेगी। इसके कारण वहां की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा जारी है। मालूम है कि केंद्र सरकार की ओर से 10 राज्यों के 44 जिलों को माओवादी मुक्त इलाका घोषित किया गया है। इस सूची में राज्य के जंगल महल इलाके के पांच जिले शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि बांकुड़ा, पुरुलिया, वीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर (नव गठित झारग्राम जिला समेत) पांच जिलों को माओवादी मुक्त इलाका घोषित कर दिया है। इससे जहां राज्य को माओवादियों से सुरक्षा के लिए केंद्रीय आर्थिक मदद नहीं मिलेगी, वहीं केंद्रीय सुरक्षा बल भी तैनात नहीं रह सकेंगे। मालूम हो कि माओवादी प्रभावित पांच जिलों में कुल मिलाकर केंद्रीय सुरक्षा बलों की 36 कंपनियां तैनात हैं।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अभी तक केंद्र की ओर से जारी निर्देश नहीं मिले हैं। जब औपचारिक तौर पर निर्देश मिलेंगे, तब आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि राज्य के गृह विभाग के एक अधिकारी ने माना कि राज्य में परिवर्तन के बाद जंगल महल इलाके में माओवादियों का प्रभाव कम हुआ है। बीते छह साल के दौरान मरने वालों, तोड़फोड़ और सरकारी संपति को नुकसान पहुंचाने की कोई घटना नहीं हुई है। हालांकि उनका मानना है कि ओडिसा और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों से माओवादियों की घुसपैठ जारी है और चौकसी के लिए सुरक्षा बलों की जरुरत है।