---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 08 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
देश में भले ही नरेन्द्र मोदी के खिलाफ वन इज टू वन का प्रयोग सफल नहीं हो सका है, लेकिन पश्चिम बंगाल में सारे विरोधी दल ममता के खिलाफ एकजुट होते जा रहे हैं।
एक ऐसा दौर था जब माकपा नेता अनिल विश्वास की तूती बोलती थी, लेकिन अब उनके गांव में ही माकपा पंचायत चुनाव के लिए नामांकन नहीं दाखिल कर सकी। तेहट्ट में करीमपुर एक नंबर ब्लाक के दाड़ेरमाठ में माकपा का उम्मीदवार नहीं है, इसलिए तृणमूल कांग्रेस को पराजित करने के लिए खुले आम भाजपा का समर्थन किया जा रहा है। माकपा सिर्फ भाजपा ही नहीं निर्दलीय उम्मीदवार का भी समर्थन कर रही है। इलाके में माकपा नेताओं का कहना है कि उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ताधारीदल को पराजित करना है।
मालूम हो कि विश्वास माकपा के राज्य सचिव थे और ज्योति बसु, विमान बसु के साथ उनकी तिकड़ी ने राज्य में माकपा का जनाधार मजबूत किया था। अब हालांकि उनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके गांव में माकपा बेहाल है। सूत्रों ने बताया कि शिकारपुर गांव में पंचायत की एक और पिपुलबेड़िया में पंचायत की दो सीटों को लेकर यह गांव का इलाका पड़ता है। पांच साल पहले तीनों सीटों पर माकपा ने जीत हासिल की थी। पिछले विधानसभा में भले ही तृणमूल कांग्रेस ने करीमपुर की सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन तीनों पंचायतों में माकपा का बोलबाला था और उन्होंने लीड हासिल की थी। लेकिन इस बार वे उम्मीदवार ही खड़ा नहीं कर सके। माकपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस की हिंसा के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर सके। जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि माकपा ने इलाके में उम्मीदवारों की तलाश शुरू की थी, लेकिन कोई भी माकपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसलिए पंचायत समिति पर भी माकपा का उम्मीदवार नहीं है।
माकपा के पूर्व स्थानीय विधायक समर घोष का कहना है कि तृणमूल विरोधी एक भी वोट बेकार नहीं जाए, इसके लिए हमलोगों ने पूरी तैयारी की है। गांव के हाई स्कूल के प्राधानाध्यापक पूर्व विधायक जिला परिषद से चुनाव लड़ रहे हैं। माकपा की लोकल कमेटी के पूर्व सचिव मानिक विश्वास कई महीने पहले दल बदल करके तृणमूल में शामिल हो गए थे। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी अनिल विश्वास के इलाके में माकपा ने लीड हासिल की थी। लेकिन ईमानदार लोगों की कमी के कारण कार्यकर्ताओं की कमी से संगठन टूट चुका है।
भाजपा नदिया जिला कमेटी के सदस्य मृगेन विश्वास का कहना है कि वाममोर्चा के शासनकाल में भी हमारा संगठन वहां मजबूत था और माकपा के साथ मुकाबला करते थे। अब तृणमूल कांग्रेस की हिंसा के खिलाफ लड़ रहे हैं। फिलहाल सत्ताधारी दल के उम्मीदवार के खिलाफ सारे लोग हमारे उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं। जहां पर हमारा उम्मीदवार नहीं है, हम वहां सत्ताधारी दल के उम्मीदवार को पराजित करने के लिए दूसरे उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की करीबपुर एक नंबर ब्लाक के अध्यक्ष और जिला परिषद के उम्मीदवार तरुण साहा का कहना है कि इलाके में इतना विकास हुआ है कि लोग हमारे साथ हैं। माकपा-भाजपा-कांग्रेस एकजुट होकर हमें पराजित करने में लगे हैं। भाजपा धर्म की राजनीति करती है और माकपा हिंदू इलाकों में भाजपा और मुस्लिम इलाकों में निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर रही है।