---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 24 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
जीवित तो असंख्य हुए और अशेष हो गये, लेकिन जीवंत तो गोलोकवासी संकटमोचन फाउंडेशन के संस्थापक एवं आईआईटी बीएचयू सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो• वीरभद्र मिश्र हैं। जिन्होंने गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए भारत में पहली बार गंगा सहित अन्य नदियों में गिरने वाले सीवर, कारखानों के कचरे - सीवेज को बंद करने के लिए इंटरसेप्टर का कंसेप्ट ईजाद कर भारत सरकार को तीन दशक पूर्व यह सुझाव दिया था कि गंगा जी में गिरनेवाले अवजल यदि बंद नहीं किया गया तो भारत की जीवन रेखा मां गंगा तिल-तिल कर मर जायेगी।
आज जो गंगा जी के हालात हैं उसको देखकर गंगापुत्र स्व• प्रो• वीरभद्र मिश्र की भविष्यवाणी सच साबित हो रही है। आज गंगा जो सबको जल देती थी वह जल के लिए तड़प और तरस रही है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रो• मिश्र के सुझाव पर गंगा की स्वच्छता के लिए गंगा एक्शन प्लान बनाया लेकिन वह भी गंगा को राहत देने में नाकामयाब रहा। अब वर्ष 2014 में वाराणसी से सांसद एवं देश के प्रधानमंत्री सबसे एक कदम आगे बढ़कर 20 हाजार करोड़ की पूंजी से गंगा मंत्रालय ही बना डाला लेकिन यह कहने में गुरेज नहीं की चुनावी गंगापुत्र की गंगा स्वच्छता की दिशा में उठाया गया कदम हवा-हवाई ही साबित हुई। आज गंगाजी के जो हालात हैं वह किसी को बताने की जरूरत नहीं है देखकर ही पीड़ा होना लाज़मी है। दुनियां के देशों में अपनी कुशलता का परचम टांगने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब तो आलम यह है बीच मझधार में पड़ने वाला रेता कंकाल का रुप धारण कर लिया है। नव निर्मित सामनेघाटपुल के नीचे गंगा जी में मोटरसाइकिल से लोग जाने लगे है। आखिर सरकार को कब चेतना आयेगी कि भारत की जीवन रेखा मां गंगा की हालत आईसीयू में भर्ती मरीज जैसा हो गया है। गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए सरकार को "जन जागरुकता" का हथियार, कागजों और अखबारों में चिंता व्यक्त करने की बजाय धरातल पर काम करना होगा। तभी गंगा निर्मल होगी।