आवाम की आवाज़ थे पंडित कमलापति - विश्वम्भरनाथ मिश्र



लखनऊ, 03 सितम्बर। पंडित कमलापति त्रिपाठी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार एवं 112वीं जयन्ती समारोह के भव्य समागम में आज लब्ध प्रतिष्ठ इलेक्ट्रानिक मीडिया के सम्पादक विनोद दुआ को पं• कमलापति त्रिपाठी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर लखनऊ के लगभग दो दर्जन वरिष्ठ पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया एवं पं• कमलापति त्रिपाठी द्वारा लिखे गये ग्रन्थ ‘‘बापू और भारत’’ का लोकार्पण भी किया गया। 

आज लखनऊ के हिन्दी संस्थान स्थित यशपाल सभागार में उक्त समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि और वयोवृद्ध कांग्रेस नेत्री मोहसिना किदवई ने कहा कि पं• कमलापति त्रिपाठी एक सिद्धान्तनिष्ठ राजनेता और मूल रूप से निर्भीक, स्वतंत्र एवं ईमानदार पत्रकार एवं सम्पादक थे। उनमें मानवीय संवेदना और सिद्धान्तनिष्ठा की दृढ़ता निहित थी। वह एक उसूलपसन्द इन्सान थे जिन्होने राजनीतिक प्रशासक के रूप में बुनियादी सिद्धान्तों से कभी समझौता नहीं किया। वह गांधी की परम्परा के पत्रकार और राजनीतिज्ञ थे जिसने आजादी से पहले और आजादी के बाद भी संघर्षों की मिसाल कायम की।

एक लाख रूपये पारितोषिक सहित पं• कमलापति त्रिपाठी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार से अलंकृत अभिनन्दनीय अतिथि एवं प्रशस्त पत्रकार विनोद दुआ ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज की पत्रकारिता अघोषित आपातकाल से गुजर रही है जिसमें लोग खौफजदा हैं, कहना चाहते हैं लेकिन नहीं कह सकते। ऐसे में पंडित कमलापति त्रिपाठी जिस स्वतंत्र पत्रकारिता के कायल थे वह प्रेरणादायक है। हम पत्रकार हैं, राजनीति समझते हैं लेकिन कोई जरूरी नहीं कि हम अच्छे राजनीतिज्ञ बन जायें। हमें सीमाएं समझनी चाहिए। हमें न सरकारी बनना है और न दरबारी। इस दौर में जो चैनल पहले सम्पादकों के हाथ में होते थे वह आज मालिकों के हाथ में हैं इसलिए हम पत्रकारों को हौसले की जरूरत है। पत्रकारिता और विषेशकर नवोदित सोशल मीडिया आज यह समझने की अपेक्षा रखता है कि स्वत्रंतता उत्तरदायित्व चाहती है। इसे न समझकर सोशल मीडिया की भूमिका लोगों के हाथ में ऐसे उस्तरे की तरह है जिसका कैसे उपयोग किया जाय यह उन्हें पता नहीं। 

विशिष्ट अतिथि एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह ने कहा कि पं• कमलापति त्रिपाठी के प्रखर सम्पादकीय अग्रलेखों का प्रभाव था कि मेरे पिता किशोरवय में सन 42 की क्रान्ति में क्रान्तिकारी गतिविधियों की तरफ उन्मुख हो गये। वह भारतीयता की चेतना से ओतप्रोत और राजनेता थे।

विषिष्ट अतिथि संकट मोचन मन्दिर वाराणसी के महन्थ प्रो• विश्वम्भरनाथ नाथ मिश्र ने कहा कि पं• कमलापति त्रिपाठी काशी की संस्कृति के राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ क्षितिज पर आदर्ष प्रतिनिधि थे। पंडित जी कृतिजीवि पत्रकार थे। पंडित जी राष्ट्र सेवा और पत्रकारिता के वक्ति उपज थे। पंडित जी पत्रकारिता सच्चाई, निर्भिकता और आवाम की आवाज़ थे। देश की आजादी में पत्रकारों , साहित्यकारों का अहम किरदार था। वे वसुल पसंद राजनेता और पत्रकार थे। वक्त के साथ समस्याएं बदलती है। पत्रकार और पत्रकारिता का एक सिंद्धात होता है, समाज और देश को राह दिखाते हुए भाईचारे का बुनियादी ताकत भी दे रहा है। हमे सरकारी और दरबारी पत्रकार पसंद नहीं है।

अध्यक्षीय सम्बोधन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार के• विक्रमराव ने कहा कि पं• कमलापति त्रिपाठी पत्रकारिता और राजनीति के समान रूप से पुरोधा थे जिन्होने न केवल आजादी की लड़ाई में योगदान दिया बल्कि देश में सबसे पहले आगे बढ़कर श्रमजीवी पत्रकारों को संगठित भी किया।

समारोह में पं• कमलापति त्रिपाठी के सम्पादकीय व्यक्तित्व पर मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो• राममोहन पाठक ने जहां प्रकाश डाला वहीं पं• कमलापति त्रिपाठी फाउण्डेशन के अध्यक्ष राजेशपति त्रिपाठी ने समारोह में अतिथियों का स्वागत किया। समारोह का संचालन प्रो• सतीश राय एवं धन्यवाद ज्ञापन बैजनाथ सिंह ने किया।

समारोह में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकारों का अभिनन्दन किया गया जिसमें वरिष्ठ पत्रकार सर्वश्री दिलीप अवस्थी, अतुल चन्द्रा, नवीन जोशी, राजेन्द्र द्विवेदी, रवीन्द्र सिंह, गोविन्द पन्त राजू, सुरेन्द्र दुबे, राकेश पाण्डेय, प्रमोद गोस्वामी, शरद प्रधान, हसीब सिद्दीकी, जोखू तिवारी, प्रदीप शाह कुमायां, सुवीर राय, किशन सेठ, शीतला सिंह, निरंकार सिंह, गोपेश पाण्डेय, आलोक पराड़कर, सुश्री रोली खन्ना शामिल रहे। समारोह में पी• के• राय बीमार होने के कारण व लखनऊ से बाहर होने के कारण ताविशी जी पुरस्कार ग्रहण नहीं कर सकीं।

वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित करने वालों में ललितेशपति त्रिपाठी, शिवानन्द पाण्डेय, सौरभ तिवारी, अखिलेश त्रिपाठी, अंकित तिवारी, सतीश चौबे, प्रजानाथ शर्मा शामिल रहे।

उत्तर प्रदेष कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डा• निर्मल खत्री अस्वस्थ होने के चलते समारोह में शामिल नहीं हो सके।

कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्व सांसद अन्नू टण्डन ने अहम भूमिका अदा की।

इन्दिरा गांधी शताब्दी वर्ष में आयोजित कार्यक्रम का आरम्भ दीप प्रज्जवलन और पं• कमलापति त्रिपाठी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भूतपूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं राष्ट्रगीत वन्देमातरम से तथा समापन राष्ट्रगान से हुआ।

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