विश्व तंबाकू निषेध दिवस : #PledgeAgainstTobacco, #TobaccoFreeSchools



कोलकाता, 31 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● इंडियन डेंटल एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और संबंध हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल ने लाॅन्च किए #PledgeAgainstTobacco, #TobaccoFreeSchools से अभियान

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा घोषित विश्व तंबाकू निषेध दिवस को मनाने के लिए नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, इंडियन डेंटल एसोसिएशन-पश्चिम बंगाल राज्य शाखा (आईडीए), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन-पश्चिम बंगाल राज्य इकाई और संबंध हैल्थ फाउंडेशन (एचएचएफ), ने संयुक्त रूप से #PledgeAgainstTobacco, #TobaccoFreeSchools से अभियान लाॅन्च किए। इन अभियानों का मकसद तंबाकू के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने और युवाओं को इसकी आदत से बचाना है। इस अभियान में तंबाकू से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी देने के लिए स्कूलों, कॉलेजों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। जागरूकता से संबंधित संदेश प्रसारित करने के लिए चारों संगठन नियमित तौर पर विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर स्वास्थ्य वार्ता और स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन करेंगे।

इस अवसर पर नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कंसल्टेंट, हैड और नेक आॅन्कोलोजिस्ट डाॅ• सौरभ दत्ता ने कहा, "तम्बाकू छोड़ना आसान नहीं है, क्योंकि तम्बाकू पर निर्भर होना व्यावहारिक, संज्ञानात्मक और शारीरिक घटनाओं से जुड़ा मामला है। बहुत कम तंबाकू उपयोगकर्ता अपने पहले प्रयास में आदत को सफलतापूर्वक छोड़ सकते हैं। लेकिन इस बात के मजबूत सबूत हैं कि ऐसा किया जा सकता है। तंबाकू छोड़ने के प्रयासों के तहत चिकित्सकीय दवाओं के साथ-साथ परामर्श देना और अन्य कई प्रभावी तरीके अपनाए जाते हैं। इसलिए हम तम्बाकू के खिलाफ प्रतिज्ञा करते हैं।"

हर साल भारत में करीब 10 लाख नए कैंसर के मामलों का निदान किया जाता है, जबकि 2.5 मिलियन रोगी पहले ही हैं। 6 लाख - 7 लाख की मृत्यु दर के साथ देश में 6 प्रतिशत वयस्क लोगों की मृत्यु कैंसर के कारण होती है। लांसेट ओन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोधपत्रों की एक श्रृंखला के अनुसार 2035 तक कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु के मामलों में 1.2 मिलियन की बढ़ोतरी हो जाएगी।

संबंध हैल्थ फाउंडेशन (एचएचएफ) के ट्रस्टी और हैड आॅफ टोबेको कंट्रोल के संजय सेठ ने कहा, "यह देखना बड़ा दुखद है कि 24 साल के युवाओं को धूम्रपान के कारण दिल का दौरा पड़ रहा है। राज्य सरकारों को विशेष रूप से छात्रों के लिए निवारक अभियानों पर ध्यान देना होगा। अगली पीढ़ी को बचाने का यही एकमात्र तरीका है।"

वर्तमान में भारत में कैंसर के कारण मौत के मुंह में समा जाने वाले दो-तिहाई लोग 30-69 वर्ष की उम्र वाले होते हैं और एक तिहाई से भी कम मरीज ऐसे होते हैं जिनके कैंसर पीड़ित होने का पता चलने के बाद जो पांच साल से भी कम अवधि के लिए जीवित रह पाते हैं। भारत में कैंसर से पीड़ित होने वाले लोगों की कुल संख्या में 40 प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं जो तंबाकू के कारण इस जानलेवा रोग का शिकार होते हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, बोस्टन और अन्य के पाॅल ई गोस के एक शोधपत्र के अनुसार लगभग 275 मिलियन भारतीय तंबाकू, मुख्य तौर पर धूम्रपान रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं (35 प्रतिशत वयस्क आबादी और 13-15 साल की उम्र वाले 14.1 प्रतिशत बच्चे)।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन-पश्चिम बंगाल राज्य के सचिव डाॅ• शांतनु सेन के अनुसार, "पश्चिम बंगाल राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारे अभियान के माध्यम से हमें उम्मीद है कि हम युवाओं को इस जानलेवा आदत के प्रति जागरूक कर पाएंगे और साथ ही हम अभिभावकों से भी अपील कर रहे हैं कि वे तंबाकू का सेवन बंद कर दें। हमें भरोसा है कि अगर इसी तरह लोगों का साथ हमें मिलता रहा, तो हम इस पहल को काफी आगे तक ले जाने में कामयाब रहेंगे।"

पश्चिम बंगाल में सभी वयस्क लोगों में से 33.5 प्रतिशत (2.3 करोड) धूम्रपान करते हैं और/अथवा धूम्ररहित तंबाकू का सेवन करते हैं और 438 बच्चे रोज तंबाकू का सेवन करते हैं। सभी वयस्कों में से 16.7 प्रतिशत (1.15 करोड) वर्तमान में धूम्रपान करते हैं, 20.1 प्रतिशत (1.38 करोड) धूम्ररहित तंबाकू का सेवन करते हैं और 22.5 प्रतिशत (1.54 करोड) सार्वजनिक स्थलों पर धूम्र के संपर्क में आते हैं। तंबाकू जनित रोगों के कारण हर साल 1.5 लाख लोग असमय मौत के मुंह में समा जाते हैं।

इंडियन डेंटल एसोसिएशन-पश्चिम बंगाल राज्य शाखा के सचिव राजू विश्वास के अनुसार, "इंडियन डेंटल एसोसिएशन पिछले 4 वर्षों से नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल हावड़ा के साथ तंबाकू के खिलाफ सक्रिय रूप से प्रचार कर रहा है। हम तम्बाकू मुक्त पश्चिम बंगाल बनाने के अपने लक्ष्य में प्रतिबद्ध हैं और इस संघर्ष में एक बड़ा कदम बनने जा रहा है। राज्य सरकार भी इस दिशा में बहुत सहायक रही है।"

इस अभियान का मुख्य फोकस तंबाकू मुक्त विद्यालयों को बढ़ावा देना और तंबाकू उपभोग से दूर रहने के लिए अपने बच्चों/रिश्तेदारो/दोस्तों को प्रेरित करने के साथ-साथ स्कूली बच्चों को तंबाकू उपभोग से दूर रखना है।

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