"नही हो सका सरकारी खजाने से चोरी एक करोड़ पन्द्रह लाख रूपये का खुलासा"



संतोष यादव, सुलतानपुर, 07 सितम्बर। दस माह पूर्व सरकारी खजाने से एक करोड़ पन्द्रह लाख रूपये की लूट आज भी पहेली बनी हुई है। अधिकारियों के लाख दावों के बाद भी नतीजा सिफर है।जाँच की आँच अभी भी लुटेरों तक पहुँच नही सकी।इस जाँच की ऐसी चाल की कछुआ भी शरमा जाये। गौरतलब है कि अक्टूबर 2016 मे कादीपुर तहसील परिसर स्थिति डबल लाक से एक करोड़ पन्द्रह लाख रुपए की चोरी हो गई थी। सुबह जानकारी होने पर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया था। सरकारी खजाने की लूट से कइयों के हाथ पाँव फूल गए थे।मौके पर आये कमिशनर डीआईजी सहित आलाधिकारियों ने घटना से जल्द पर्दाफास का भरोसा दिया था।लेकिन आज तक घटना का खुलासा नहीं हो सका।अब इस घटना को लेकर क्षेत्र में तरह तरह के कयास भी लगाये जा रहे है।खुलासे में हो रही देरी शासन-प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रहा है।यही नही जनचर्चा के अनुसार प्रकरण में पर्दे के पीछे किसी बड़े सफेदपोश को बचाने की कवायद हो रही है।तहसील कर्मियों पर भी शक की सुई शुरू से ही घूम रही है लेकिन अभी तक इस मामले में नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।घटना स्थल से कुछ ही दूर स्थित दूकान मे लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खगालने के बाद भी प्रशासन किसी ठोस नतीजे पर नही पहुँच सका। गौरतलब है कि कादीपुर कस्बे में गत वर्ष दुर्गा पूजा महोत्सव दौरान शोर शराबे और भीड़ का फायदा उठाकर चोरो ने रात मे ही डबल लॉक का ताला काटकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए जमीन का बैनामा कराने के लिए रखे गए एक करोड़ पन्द्रह लाख रुपए की चोरी कर प्रशासन के सामने चुनौती भरा सवाल खड़ा कर दिया था। डबल लाक का ताला काटकर चोरी का पहला मामला होने पर तत्कालीन मंडला आयुक्त डीआईजी डीएम एसपी सहित आलाधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।उस दौरान मीडिया से मुखातिब उच्चाधिकारियों ने जल्द ही घटना के खुलासे की बात कही थी ।दुर्भाग्य ही रहा कि कादीपुर का आजाद भारत के इतिहास में खजाने की चोरी की यह पहली घटना पहली बार घटित हुई। इतना बड़ा मामला होने के बावजूद अभी तक जांच का कोई प्रभावी नतीजा निकल नहीं सका है ।चोरी को लेकर कई सवाल उठे थे जो आज भी पहेली बने है। इस चोरी के ठीक पहले लगातार पांच दिन का अवकाश था लेकिन अवकाश से पहले भी इतना रुपया नहीं निकाला गया था जिस दिन एक करोड़ रुपया निकाला गया उस दिन से पहले लगभग चौतिस लाख रुपए बचे थे। जिनमें से सत्रह लाख रुपये के स्टांप ट्रेजरी से खरीदे गए थे जो अलग ट्रेजरी विभाग ने झोले में रखा था।पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के बाकी बचे एक करोड़ बैंक से पिछले हिसाब का पन्द्रह लाख रुपए को इक्कठा कर एक बोरे मे रख खजाने में स्थित लकड़ी के सन्दूक के ऊपर सुरक्षित रखा गया था। जिसे चोर डबल लाक का ताला काट कर उठा ले गए। सवाल उठता है कि लगातार पांच दिन की बैंक बंद के बावजूद इतना रुपया एक साथ क्यों निकाला गया दूसरी बात यह है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की बोरी में रखा गया एक करोड़ पन्द्रह लाख रुपया चोरों ने उठाकर रफूचक्कर हो गए लेकिन ठीक उसी के बगल ट्रेजरी विभाग का 17 लाख रुपया भी झोले में भरकर रखा गया था चोरों ने ट्रेजरी का पैसा ईमानदारी बरतते हुए उसे वहीं पर छोड़ दिया। ए कैसे हो सकता है। यह आज भी सवालों के घेरे में है। कि चोरों ने बड़ी इमानदारी के साथ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का एक करोड़ पन्द्रह लाख रुपया लेकर रफूचक्कर हो गए वहीं बगल में ट्रेजरी का पैसा छुआ तक नहीं। सुरक्षा व्यवस्था पर नजर डालें तो कादीपुर की ट्रेजरी की छमता मात्र 3लाख रुपए की है। 3 लाख के ऊपर जब भी रकम इस खजाने में जमा की जाती है तो नियमानुसार खजाने के जिम्मेदार तहसीलदार की तरफ से स्थानीय पुलिस प्रशासन को खजाने की सुरक्षा व्यवस्था हेतु अतिरिक्त गार्डों की व्यवस्था की जाती है लेकिन इतनी बड़ी रकम खजाने में रखने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की कोई जरूरत नहीं समझी परिणाम सामने आया कि रात में चोरों ने डबल नाक का ताला काटकर 1करोड़15लाख रुपए उड़ा दिए ।एक अनुउत्तरित सवाल यह भी है कि जिम्मेदार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए हो रहे बैनामे के लिए अधिक रुपए निकालने जा रहे थे तो उसे रखने के लिए बॉक्स क्यों नहीं खरीदा गया ।जबकि व्यवस्था यह है कि नजारत का जो रुपया रखा जाता है वह डबल लाक मे रखे बाक्स मे रखा जाता है। जिसकी एक चाबी तहसीलदार के पास तो दूसरी चाबी नायब नाजिर के पास रहती है। लगातार 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए निकाले जाते थे लेकिन उसे रखने के लिए बाक्स क्यों नहीं खरीदे गए। साल भर बीतने को है लेकिन आज तक इतने बड़े चोरी का खुलासा शासन प्रशासन ने अभी तक नहीं किया है ।खजाने की चोरी में तरह-तरह के छेद दिखाई पड़ते हैं। तत्कालीन कोतवाल अनिल सोनकर का कहना था कि इतनी बड़ी रकम खजाने में जमा की गई लेकिन मुझे कोई सूचना नहीं थी जबकि नियमानुसार खजाने की जितनी कैपिसिटी है उससे एक भी रुपए अधिक अगर खजाने में रखा जाता है तो स्थानीय कोतवाली को खजाने के जिम्मेदार तहसीलदार द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के लिए सूचना दी जानी चाहिए। लेकिन जिम्मेदारों ने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा।


जबाबदेही से बच रहे अधिकारी दे रहे गोलमोल जबाब
तहसीलदार रामचंद्र सरोज व उपजिलाधिकारी मोतीलाल सिंह भी गोल मोल उत्तर ही दे रहे है।उनसे जब इस प्रकरण में प्रगति की जानकारी चाही गई तो इस विषय पर बोलने से साफ मना करते हुए कहा कि मॉनिटरिंग ऊपर से हो रही है। उच्चाधिकारियों का मामला है इसमें हम कुछ नहीं कह सकते।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News