संतोष यादव, सुलतानपुर। यदि आप पहले से सोचकर न आयें कि किसी प्राइमरी स्कूल में जा रहे हैं तो निश्चित ही यह प्राथमिक विद्यालय आपको किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं दिखेगा। कादीपुर के कटसारी का पूर्व माध्यमिक विद्यालय मिसाल है दूसरे सरकारी स्कूलों के लिए जो हमेशा सरकारी सिस्टम का रोना रोते रहते हैं और खुद कुछ नहीं करना चाहते। कटसारी के इस प्राथमिक विद्यालय का प्रांगण हरा भरा और फूलों की बहार लिए हुए है। इस विद्यालय में छात्र-छात्रों की तादाद भी काफी है। यह विद्यालयों उनके लिए एक सबब है जो कोशिश भी नहीं करना चाहते व्यवस्था परिवर्तन और खुद को बदलने की।
प्राथमिक विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था कहने को तो सरकारी प्राइमरी है, लेकिन यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को किसी कॉन्वेंट के बच्चों से कमतर आंकना आपकी गलती हो सकती है। ये सब यूं ही नहीं हुआ है। इसके लिए स्कूल के राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए नामित प्रधानाध्यापक कृष्ण प्रसाद यादव ने खासी मेहनत करते हैं। जो लोग पहले अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में करवाना चाहते थे, अब वह इस प्राथमिक विद्यालय की ओर खिंचे चले आते हैं। प्रधानाध्यापक के प्रयास का ही नतीजा है कि इस स्कूल में अब छात्रों की संख्या 165 पहुंच गई है जो इनके यहां ज्वॉइन करने से पहले 20-25 थी।
छुट्टी के दिन भी आते हैं विद्यालय
बच्चों के भविष्य के प्रति सचेत प्रधानाध्यापक कृष्ण प्रसाद यादव के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार और छुट्टी के दिन भी विद्यालय आते हैं। पढ़ाई का काम न होने पर विद्यालय के पौधों की सिंचाई एवं देखभाल करते हैं। बच्चों के अभिभावकों से मिलते हैं और पढ़ाई की प्रगति की जानकारी लेते हैं। दूसरे सरकारी स्कूलों के लिए ऐसा सबकुछ कैसे संभव हो सकेगा। पूछे जाने पर कृष्ण यादव कहते हैं, "इसके बच्चों से प्यार, लगन, मेहनत और बच्चों के बेहतर भविष्य का ध्येय बहुत जरूरी है।"
कृष्ण प्रसाद यादव ने खुद व सहयोगी अध्यापकों की मदद से विद्यालय को आदर्श के रूप में स्थापित किया है। जो दूसरों के प्रेरणा दायक है। उनके तमाम प्रयासों और मेहनत को देखते हुए शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2017) के अवसर पर नई दिल्ली में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया। साधारण व्यक्तित्व के कृष्णा यादव का असाधारण कृतित्व सरकारी विद्यालयो के लिये अनुकरणीय है।