---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 03 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
फक्कड़ कवि कबीर और फकीर लालन का संगम गत सप्ताह को भारत सभा हाल, कोलकाता में सदीनामा प्रकाशन, मैत्रेयी ग्रंथागार एवं बर्ड एंड बेकेट कल्चरल लेजेसी प्रोजेक्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देखा गया। इस मौके पर पहली बार कबीर -लालन फकीर के बारे में एक साथ सुनने का मौका मिला जिन्होंने कविगुरु टैगोर और नजरुल को भी प्रभावित किया था।
सदीनामा के संपादक जितेंद्र जितांशु ने मोहम्मद मनिरूज्जामान की लिखी पुस्तक "साधक कवि लालन काल उत्तरकाल में" का अनुवाद करवाने के साथ उसी पुस्तक का संपादन संयोजन कर हिंदी जगत के सामने सहजिया परंपरा, प्रेम और विद्रोह के गायक तथा कष्रता पर प्रहार करनेवाले साधक कवि लालन से परिचित कराने का प्रयास कराया है।
इस कार्यक्रम मे बांगलादेशी लेखिका एवं लेखक की बीबी आलम आरा जुंई की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी। आलम आरा ने साधक लालन संबंधित अनुदित तथा संपादित पुस्तक से जुड़े सभी लोगों - जितेंद्र जितांशु, कमलेश जैन, राजेश्वर राय, नवीन प्रजापति स्वान्त, रावेल पुष्प, कल्याणी ठाकुर, मीनाक्षी सांगनेरिया को सम्मानित किया गया। डाक्टर सत्या उपाध्याय (प्रिंसिपल कलकत्ता गर्ल्स कालेज) सिमल मजूमदार तथा डॉ• संजय जायसवाल (प्रिंसिपल लाल बाबा कालेज) ने लोकार्पण किया।
इस अवसर पर पप्पू रजक की ओर से डाक्टर सूर्यदेव शास्त्री एवं गोपाल प्रसाद साव की कविताओं की आवृत्ति और वाचन किया गया। भूपेन्द्र सिंह बशर ने गुरुग्रंथ साहिब और कबीर का विवेचन किया। आलम आरा जुई को सुलोचना सारस्वत और अनीता राय द्वारा सम्मानित किया गया। डाक्टर अभिजीत पाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।