कलकत्ता विश्वविद्यालय में मना हिन्दी दिवस समारोह



कोलकाता, 21 सितम्बर। हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में कलकत्ता विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग द्वारा 20 सितम्बर को विभिन्न साहित्यिक व सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा अन्य विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र-छात्राओं ने सम्पूर्ण उत्साह के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लिया । उदघाटन सत्र में विश्वविद्यालय के उपकुलपति (अकादमिक) ने उदघाटन व्यक्तव्य देते हुए हिंदी दिवस की महत्ता और विश्व में हिंदी के निरंतर बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया। समारोह की शोभा बढ़ाते हुए अपने सारगर्भित भाषण से विभागाध्यक्ष प्रो• राजश्री शुक्ला ने कहा “हिंदी से प्रेम करना हिंदी में बड़ी डिग्रीयाँ हासिल करना नहीं, बल्कि हिंदी शब्दों का अधिक प्रयोग करना है।” मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो• सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी ने दीप प्रज्व्वलन किया। विशिष्ठ अतिथि के रूप में कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो• स्वागतो सेन ने हिंदी के संवैधानिक महत्त्व को उजागर किया। विश्वविद्यालय के कुल सचीव प्रो• राजगोपाल धर चक्रवर्ती वर्त्तमान परिपेक्ष्य में हिंदी के महत्त्व को रेखांकित किया है। प्रो• राम अह्लाद चौधरी ने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक महत्त्व को बताते हुए गांधी जी के योगदानों की चर्चा की। इतना ही नहीं, हिंदी के विकास के लिए देशी, प्रादेशिक एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं के योगदान की बात कही।

कार्यक्रम में काव्य आवृत्ति, वाद विवाद, लोक गीत, आशु अभिनय, रचनात्मक लेखन तथा कविता पोस्टर प्रतियोगिताएं हुईं जिनमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। विविध प्रतियोगिताओं के निर्णायक के रूप में डा• विवेक सिंह , डा• आशुतोष कुमार, डा• मनीषा त्रिपाठी , डा• रेशमी पंडा मुखर्जी, डा• ममता त्रिवेदी, डा• वीरेंद्र सिंह, डा• सुनीता साव, डा• अभीजीत सिंह, डा• जयप्रकाश मिश्र , काजू कुमारी साव, रणजीत सिंह, प्रतीक सिंह, इबरार खान इत्यादि उपस्थित रहे। विभाग के शोधार्थी विकास साव द्वारा लिखत पुस्तक “आधुनिक हिंदी साहित्य के विवध स्तम्भ” का विमोचन भी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो• सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी एवं विभागाध्यक्ष प्रो• राजश्री शुक्ल द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन विभाग के विद्यार्थी राहुल गौड़ और सुजाता शर्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कलकत्ता विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

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