सुरेश प्रभु ने मस्‍कट में संयुक्‍त व्‍यापार परिषद को किया संबोधित



मस्‍कट-ओमान, 18 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारत-ओमान व्‍यापार परिषद् का आठवां सत्र 16 से 17 जुलाई 2018 के बीच ओमान के मस्‍कट में आयोजित हुआ। बैठक में ओमान के शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व वहां के वाणिज्‍य एंव उद्योग मंत्री डाक्‍टर अली बिन मसूद अल सुनैदी ने किया जबकि भारतीय दल का प्रतिनिधित्‍व वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने किया।

दोनों पक्षों ने इस अवसर पर परस्‍पर व्‍यापार की समीक्षा की और यह माना कि वर्ष 2014 में हुयी संयुक्‍त व्‍यापार परिषद् की पिछली बैठक के बाद से दोनों देशों के बीच व्‍यापार में खासी वृद्धि हुयी है। भारतीय पक्ष ने कहा कि भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार 2017-18 में बढ़कर 6703.76 मिलियन अमरीकी डॉलर पर पहुंच गया जबकि 2014-15 में यह 4131.69 मिलियन अमरीकी डॉलर था। वर्ष 2017 18 के दौरान ओमान को भारत का निर्यात 2379.44 मिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2439.46 मिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। वर्ष 2000 के अप्रैल महीने से मार्च 2018 के बीच ओमान से भारत में कुल प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश भी 469.20 मिलियन अमरीकी डॉलर पर पहुंच गया। भारत में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश के मामले में ओमान 31वें स्‍थान पर रहा।

2017-18 के दौरान भारत से ओमान को मुख्‍य रूप से पेट्रोलियम उत्‍पाद, लौह और इस्‍पात उत्‍पाद, लोहा और इस्‍पात, चीनी मिट्टी की वस्‍तुएं, तांबा और उससे बने उत्‍पाद, इलेक्‍ट्रानिक उपकरण, डेयरी उद्योग में प्रयुक्‍त होने वाली मशीनरी तथा बासमती चावल का निर्यात किया गया। दूसरी ओर ओमान से भारत में आयात की जाने वाली वस्‍तुओं में पेट्रोलियम उत्‍पाद, उर्वरक, विमान और उनके कल पुर्जे, जैव रसायन, एल्‍युमीनियम से बने उत्‍पाद, खनिजों और अयस्‍कों तथा संवर्द्धित प्‍लास्‍टिक के लिए कच्‍चा माल और खनिज आदि प्रमुख रहे।

दोनों पक्षों ने द्धिपक्षीय व्‍यापार को और मजबूत बनाने तथा इसमें कई और वस्‍तुओं को शामिल किए जाने पर जोर दिया। ओमान सरकार ने भारतीय निवेशकों को अपने यहां नीवकरणीय उूर्जा और अवसंरचना के क्षेत्र में निवेश का न्‍यौता दिया। भारत ने कहा कि ओमान को पेट्रोलियम उत्‍पाद, सोने और जेवरात, फार्मास्‍युटिकल्‍स, विमान और हेलीकाप्‍टर, चावल, गेहूं, आटा, बेंत और बीट शुगर जैसे कृषि उत्‍पाद,वस्‍त्र, एल्‍युमीनियम आक्‍साइड और सिरामिक वस्‍तुओं के निर्यात की प्रचुर संभावनाएं हैं।

भारत ने ओमान सरकार से उसके यहां भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले रासायनिक उत्‍पादों पर लगने वाला सीमा शुल्‍क घटाने का अनुरोध किया जो कि करीब 5 प्रतिशत है। भारत का कहना था कि डाई, अकार्बनिक रसायनों, जैव रसायनों, कृषि रसायनों, सौंदर्य प्रसाधनों, ग्‍लेज्‍ड सिरेमिक, एल्‍युमीनियम मिश्रित धातु और बसों के टायरों पर आयात शुल्‍क घटने से ओमान के बाजार में भारतीय वस्‍तुओं को बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

भारत और ओमान दोनों ही दोहरी कराधान बचाव संधि को जल्‍दी अंतिम रूप देन के लिए अपनी सरकारों की ओर से इसका अनुमोदन प्राप्‍त करने पर सहमत हुए। दोनों के बीच द्धिपक्षीय निवेश संधि बीआईटी में संशोधन पर विचार हो रहा है। इसके लिए 2017 और 2018 में बैठकें भी हो चुकी हैं।बीआईटी के भारतीय मॉडल के बारे में ओमान की ओर से की गयी टिप्‍पणियां विचाराधीन हैं।

दोनों पक्षों के बीच ओमान इंडिया फर्टिलाइजर कंपनी के मुद्दे तथा यूरिया टेक ऑफ टेक एग्रिमेंट को 2020 से आगे जारी रखने पर भी चर्चा हुयी। भारतीय पक्ष ने कहा कि यूरिया टेक आफ एग्रिमेंट के संशोधित संस्‍करण पर हस्‍ताक्षर के लिए अंतिम अनुमोदन प्राप्‍त करने में दो महीने का समय लग सकता है।भारत ने कहा कि इस समझौते को 2025 तक बढ़ाने पर चर्चा होनी चाहिए। ओमान ने कहा कि वह इसके लिए तैयार है। इस बीच भारत सरकार ओमान के साथ गैस आपूर्ति समझौते को निर्धारित मौजूदा कीमतों पर ही आगे भी जारी रखने का प्रस्‍ताव किया है।

वार्ता के दौरान दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि उुर्जा, विशेष रूप से नवीकरणीय उर्जा जैसे पवन और सौर उर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना महत्‍वपूर्ण होगा। भारतीय पक्ष ने बताया कि ठोस कचरे से उर्जा बनाने के लिए भारत में ओमान के सहयोग से दुनिया का सबसे बड़ा संयत्र लगाने पर भी विचार हो रहा है। इस संयुक्‍त उपक्रम में सालाना 200 गीगा वाट बिजली का उत्‍पादन होगा। भारत ने कहा कि इस बारे में वह ओमान के जवाब का इंतजार कर रहा है।

कृषि पर भारत-ओमान संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) स्थापित किया गया है जिसकी पहली बैठक हो चुकी है। भारत में अंगूर, टमाटर, गेहूं और चीनी जैसे कृषि वस्तुओं को निर्यात करने की क्षमता है जो ओमान अन्य देशों से आयात कर रहा है। भारत और ओमान पर्यटन के क्षेत्र में भी सहयोग करने पर सहमत हुए। ओमान ने भारतीय निवेशकों तथा होटल ऑपरेटरों को अपने यहां निवेश के लिए आमंत्रित किया। इस बीच भारत ने ओमान में अपनी ओर से साहसिक पर्यटन, वेलनेस चिकित्सा और आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्‍साहित करने का प्रस्‍ताव रखा।

दोनों पक्षों द्वारा खदानों, दूरसंचार और आईटी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग पर सहमति जतायी गयी। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने इस अवसर पर संयुक्त व्यापार परिषद को संबोधित किया और ओमान के उद्योगपतियों तथा ओमान में मौजूद भारतीय निवेशकों से बात की।

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