चाटूकार अधिकारियों ने कुलपति को दिखा दिया यह मंजर..



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार।
वाराणसी, 24 सितम्बर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छेड़खानी को लेकर आन्दोलन के दौरान लाठीचार्ज, आगजनी, मारपीट, पथराव और फायरिंग यह सुनियोजित है या स्वत: स्फूर्त यह तो गंभीर विश्लेषण के बाद ही पता चलेगा। लेकिन विश्वविद्यालय में उड़ती चर्चाओं पर गौर करें तो यह बात सामने आती है कि विश्वविद्यालय के मुखिया कुलपति ने जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी वे चाटुकारिता की हद पार गये। परिणाम कुलपति खुद यह निर्णय नहींं ले सके कि वे अपने विद्यार्थियों के बीच जा सके और उनकी बात सुन सकें। हालांकि यह चाटूकार यह कहने में भी नहींं चुकते कि कुलपति को आन्दोलनकारियों के बीच नहींं जाने का फैंसला अपना था। इस हठवादिता ने ही महामना की बगीयां में आग लगवा दी।

नमूना देखिए कि जिस छात्र अधिष्ठाता को जहां विद्यार्थियों के साथ अभिभावक की भूमिका में रहना चाहिए वह इससे काफी दूर नजर आता है। चर्चा में तो यह भी है कि छात्र अधिष्ठाता ने विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर कभी कुलपति से चर्चा ही नहींं की। बदलते दौर में छात्र - छात्राओं को भाई - बहन के रुप में ढालने और दुसरे अभिभावक होने के नाते उनको पारिवारिक स्वरूप जैसा रखने और अभिभावक के रुप में खुद को प्रस्तुत करना था, इनके पास कभी भी यह जज्बा देखने को नहींं मिला।

प्राक्टोरियल बोर्ड का क्या कहना है जब जब छात्र आन्दोलन होता है तब तब बोर्ड के अधिकारी असफल ही नजर आते है। परिसर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आये दिन चोरी, छिनैती और छेड़खानी की घटनाएं होती रहती है। चर्चा यह भी है कि प्राक्टोरियल बोर्ड के कुछ ऐसे भी अधिकारी है जिनके घरों में दर्जन - दर्जन भर प्राक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी परिसर की रखवाली के बजाय घरेलू कार्यों में लिप्त देखे जा सकते है। जब कोई बड़ी घटना होती है तो यह जातिगत आधार पर उत्प्रेरण का भी काम करते पाये जाते है। गत तीन वर्षों की सच्चाई यही रही है कि जिन प्रोफेसरों पर भरोसा करके कुलपति ने जिम्मेदारी दी उसमें अधिकतर अधिकारी अपना प्रमोशन और बेटा - बेटी की नियुक्ति तक ऐसे कर्मठता का बाह्यय रुप से प्रदर्शन करते देखे गये कि समस्याओं का निराकरण एवं विद्यार्थियों से नजदीकीयां ही इनका सगल है लेकिन ऐसा देखने को नहींं मिलता।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News