सांसद, 8 विधायक और 2 मंत्रियों की मरहम से महरुम हुई बेटियां



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
"मैं खुद नहींं आया मुझे माँ गंगा ने बुलाया है, मैं काशी का बच्चा हूं आदि बातों के सहारे काशी से भावनात्मक रिश्ता जोड़कर माननीय नरेन्द्र मोदी वाराणसी संसदीय सीट से सांसद बनने के बाद देश के प्रधानमंत्री के रुप में देश की बागडोर संभालते ही बेटियों के लिए चिंतित होकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलाकर इतिहास रच दिया। वाराणसी का सांसद होने के नाते हर सुख-दुख में जनता की अपेक्षा भी होती है कि हमारा सांसद हमारे बीच आकर कुशलक्षेम पूछे। बनारस में कुल 8 विधायक भी हैं और दो राज्यमंत्री भी हैं लेकिन यह दुर्भाग्य है कि दो दिनों तक काशी प्रवास के बाद पीएम और सीएम के जाने के बाद उसी दिन अपनी आबरु की रक्षा के लिए धरनारत बेटियों पर आधी रात को लाठियां बरसाई जाती है लेकिन सत्ता पक्ष के 8 विधायकों में से एक भी जन प्रतिनिधि ने यह जानने की जहमत नहींं उठाया कि आखिर बेटियों पर क्यों लाठियां बरसाई गई। अलबत्ता इस मामले को सुलझाने के बजाय यह प्रचारित किया जाने लगा कि इसमें बाहरी तत्व घुसपैठ कर मामले को हिंसक बना रहे हैं, लोग राजनीति कर रहे हैं। चर्चा तो यह भी है कि गत तीन वर्षो में यह विश्वविद्यालय महामना के सपनों को रौदकर राजनीतिक बंकर के रुप में इस्तेमाल किया जा रहा है। जितनी राजनीतिक गतिविधियां गत तीन वर्षों में विश्वविद्यालय में हुई उतना सौ साल में कभी नहींं हुआ था। वहीं दुसरी तरफ बीएचयू छेड़खानी और आबरु की रक्षा की खातिर लाठियों की शिकार बेटियों के उपर सहानुभूति की चादर डालना तो दूर की बात है वाराणसी के सांसद, 8 विधायकों की खामोशी कहीं न कहीं सवाल करती नजर आती है। ऐसे संवेदनशील घटनाओं पर सभी राजनीतिक दलों को वोट की रोटी सेंकने की बजाय सहानुभूति की रोटी सेंकनी चाहिए। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छेड़खानी के विरोध में 48 घंटे तक सिंहद्वार पर धरनारत छात्राओं के उपर बर्बर लाठीचार्ज की चतुर्दिक निन्दा हो रही है , जगह - जगह विभिन्न राजनीतिक दल सर्वदलीय रुप से बेटियों के उपर हुए हमले की निंदा करते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग भी कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि बेटी पढाओ - बेटी बचाओ के प्रणेता वाराणसी के सांसद एवं भारतवर्ष के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में सरेशाम एक छात्रा के साथ छेड़खानी होती है और जब वह पास ही चौराहे पर मदद के लिए बीएचयू प्राक्टोरियल बोर्ड के ड्यूटीरत सुरक्षाकर्मी से अपनी आबरु की रक्षा की गुहार लगाती है, मदद के बदले पीड़ित छात्रा को सुरक्षाकर्मी के अपमानजनक भाषा सुनकर अपने छात्रावास पहुँचकर सहेलियों से आपबीती सुनाती है। इस घटना से क्षुब्ध छात्राएं अपनी सुरक्षा की मांग कुलपति तक पहुंचाना चाहती थी लेकिन वार्डेन से लगायत सभी जिम्मेदार अधिकारियों से उन्हें निराशा ही हासिल हुआ। बीएचयू के अधिकारियों के उपेक्षात्मक रवैये से क्षुब्ध छात्राओं का समूह सिंहद्वार पहुँचकर धरना-प्रदर्शन शुरु कर दी। बीएचयू छात्र आन्दोलनों के इतिहास में सबसे ज्यादा 48 घंटे तक सिंहद्वार को बंदकर इतिहास रच दिया। छात्राएं बस धरना स्थल पर कुलपति को ही बुलाकर अपनी समस्या बताना चाहती थी लेकिन चर्चा यह है कि चाटूकारिता को हथियार बनाकर राजनीति करने वाले विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कुलपति को गुमराह कर धरनास्थल पर जाने से रोकने में कामयाब रहे। यहीं से मामला भड़कना शुरु हो गया, छात्राओं का आन्दोलन उग्रता की ओर अग्रसर होने लगा, परिणाम यह रहा की छात्राओं के आन्दोलन के चलते प्रधानमंत्री के काफिले का मार्ग परिवर्तित करना पड़ा जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देने लगी। यह कितनी बड़ी बिडम्बना है कि काशी में दो दिनों तक प्रधानमंत्री, सूबे के मुख्यमंत्री, राज्यपाल सहित दर्जन भर केन्द्र और प्रदेश के मंत्री हजार करोड़ की सौगात जनता को उछाल- उछाल कर भेंट कर रहे थे वहीं अपनी आबरु की रक्षा के लिए 48 घंटे से लगातार धरने पर बैठी बेटियों का कुशल क्षेम भी नहींं पूछना बेटी पढ़ाओ - बेटी बचाओ अभियान पर सवालियां निशान खड़ा करता है। प्रधानमंत्री, राज्यपाल , मुख्यमंत्री सहित केन्द्र व प्रदेश के दर्जनों मंत्रियों के दो दिनों तक काशी प्रवास के बाद मध्यरात्रि में प्रशासन द्वारा सिंहद्वार से महिला महाविद्यालय के छात्रावास में घुसकर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज करना तो कायरता ही कहा जायेगा।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News