---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 10 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बैंक इंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया की ओर से मांग की गई है कि सभी एटीएम में सुरक्षा गार्ड नियुक्त किए जाने चाहिए। संगठन की राज्य इकाइ के महासचिव जयदीप दासगुप्ता और प्रदीप विश्वास का कहना है कि एटीएम में सुरक्षा गार्ड नहीं रहने के कारण लगातार धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ती जा रही है। लेकिन बैंक प्रबंधकों की ओर से कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई है, जिससे ग्राहकों की रकम सुरक्षित नहीं है।
संयुक्त सचिव सुदीप्त साहा के मुताबिक कर्मचारी संगठन के साथ ही सभी लोगों को बैंक पर दबाव डालना चाहिए, जिससे सुरक्षा कर्मचारी नियुक्त किए जा सकें। उन्होंने कहा कि देश भर में दो लाख एटीएम हैं और आठ घंटे की ड्यूटी के मुताबिक छह लाख सुरक्षा कर्मचारी होने चाहिए। लेकिन बीते 15-20 सालों के दौरान सुरक्षा गार्ड को हटाने का प्रावधान दिख रहा है। सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही बैंक वालों की ओर से पांच हजार कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई है, जिससे करीब 25 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। इसके अलावा बैंक तीन शिफ्ट के बजाए दो शिफ्ट में लोगों का 12-12 घंटे के हिसाब से काम करवा कर आठ घंटे का वेतन देता है।
राज्य में करीब 12000 एटीएम हैं, लेकिन 1900 में सुरक्षा कर्मचारी नहीं हैं। जबकि बैंकों की ओर से वाइट लेवल एटीएम सेंटर खोले जा रहे हैं, जहां लोगों की रकम और भी असुरक्षित है। देश भर में ऐसे 8446 एटीएम हैं, जिसमें राज्य में ही कुल मिलाकर 652 एटीएम हैं।
संगठन का कहना है कि पहले बैंकों में बंदूकधारी सुरक्षा गार्ड रहते थे, लेकिन अब किसी भी बैंक में आपको ऐसा सुरक्षा गार्ड दिखाई नहीं देगा। इसका कारण यह है कि उनकी छंटनी कर दी गई है। इसका नतीजा यह निकला है कि बैंकों में धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। बीते पांच साल के दौरान बैंक धोखाधड़ी के मामले में तीन गुणा वृद्धि हुई है। 2013-14 में जहां 4306 घटनाओं में 1017081 लाख रुपए का फ्राड हुआ था, वहीं 2017-18 में यह बढ़कर 5879 घटनाओं में 3204865 लाख रुपए हो गया।
उनका कहना है कि आरबीआई, केंद्र सरकार, बैंकों के साथ ही राज्य प्रशासन की भूमिका भी इस मामले में है। इसलिए सभी पक्षों को एक साथ मिलकर बैंक उपभोक्ताओ के बारे में सोचना चाहिए।