कोलकाता। थीम पूजा और प्रचार के कारण बड़ी पूजा कमेटियों की बहार रहती है, हर साल उनका बजट लगातार बढ़ता जाता है। प्रायोजक से लेकर विज्ञापन कंपनियां भी उनके पास ही रहती हैं। इस साल कहीं 10 करोड़ तो कहीं साढ़े छह करोड़ के बजट की पूजा की जा रही है। इसलिए छोटी पूजा कमेटियों को न तो प्रायोजक मिलते हैं और न ही विज्ञापनदाता उनके करीब आते हैं। खास तौर पर दूर-दराज के जिलों में होने वाली कम बजट की पूजा करने वाले प्रबंधकों का हाल बेहाल रहता है। इसलिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसी पूजा कमेटियों की पुलिस ने आर्थिक मदद शुरू की है। पहली बार लोगों का भारी उत्साह देखने के बाद इस साल पुलिस वाले दोगुने जोश के साथ पूजा कमेटियों को आर्थिक मदद देने में जुट गए हैं। इस बार पूजा कमेटियों की संख्या 1200 के पार चली गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी हालत में छोटी पूजा कमेटियों को आर्थिक संकट की मार नहीं झेलनी पड़े।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार पिछले साल पूजा कमेटियों की आर्थिक मदद करने का सिस्टम चालू किया गया था। लेकिन प्रचार की कमी के कारण ज्यादतर पूजा कमेटियों को इस परियोजना के बारे में पता ही नहीं चला। इसके अलावा जल्दी में शुरू किए गए काम का व्यापक प्रचार भी पुलिस की ओर से नहीं किया जा सका था। स्थानीय थाना कमेटियों को छोटी पूजा की तलाश करने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा था। नतीजा यह निकला की कुछ गिनीचुनी पूजा कमेटियां ही आर्थिक मदद हासिल कर सकी। ऐसा भी हुआ कि पूजा समाप्त होने के बाद कई पूजा कमेटियों को पैसे मिले। इसलिए छोटी पूजा कमेटियों की समस्या का समाधान नहीं हो सका था।
लेकिन इस बार शुरू से ही पूजा कमेटियों ने कोशिश शुरू कर दी थी जिससे किसी को शिकायत का मौका नहीं मिल सके। सूचना के मुताबिक जिलों में पैसे भेज दिए गए हैं। इस साल कुल मिलाकर 1285 पूजा कमेटियों को आर्थिक मदद दी जा रही है। सभी पूजा कमेटियों को 10 -10 हजार रुपए दिए जाएंगे। यह सारी रकम पुलिस की ओर से प्रदान की जाएगी। इस मद में पुलिस बजट से एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद की जा रही है। हालांकि यह आर्थिक मदद सिर्फ उन पूजा कमेटियों को ही मिलेगा जिनका बजट 50 हजार रुपए से कम होगा। एक अनुमान के मुताबिक ऐसी पूजा की संख्या हजारों में है। ऐसी पूजा कमेटियों की शिनाख्त करने और आर्थिक मदद प्रदान करने की सारी जिम्मेवारी पुलिस पर ही है। हालांकि इसके साथ यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि जहां पुलिस पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रही है वैसे में एक करोड़ की धनराशि खर्च करने का क्या तुक है।