राजनीति का शिकार हो रहे है वरुण गांधी !



* बांध मंडी गोदाम निर्माण को लेकर सियासत गर्म

* सपा सरकार में तीन महीने चला कार्य अपनी सरकार में ठप

* वरुण ने नराजगी जताकर डीएम को लिखा था पत्र 60 दिन बाद भी कार्यवाही शून्य

* तीन माह पहले वन विभाग ने बांधमंडी निर्माण पर लगाई थी रोक

* सपा विधायक अनूप संडा की निधि से हुआ काम सांसद वरुण गांधी की निधि से काम पर रोक

* वरुण के चहेते लगा रहे साजिश का आरोप

--- संतोष यादव, सुलतानपुर।
स्थानीय सांसद वरुण गांधी की अपनी ही सरकार में नहीं सुनी जा रही। कभी पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव व कई प्रान्तों के प्रभारी रहे वरुण गांधी की बात को उनके संसदीय क्षेत्र के अधिकारी ही तवज्जो नहीं दे रहे है। वरुण गांधी को किसके इशारे पर नजर अंदाज किया जा रहा है यह तो वही जाने लेकिन एक बात साफ दिख रही है कि अपनी ही सरकार में उनकी सुनी नहीं जा रही है। इसकी नजीर उनके संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर में उनकी निधि से बन रहे बांध मंडी गोदाम निर्माण पर 3 माह से लगी रोक है। जिस जमीन पर सपा सरकार में वरुण गांधी की निधि से बांध मंडी गोदाम का निर्माण 3 महीने तक चला उसी जमीन पर भाजपा सरकार आते ही ब्रेक लग गया। कई माह से मंडी गोदाम का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।

इसकी मुख्य वजह जिस जमीन पर निर्माण हो रहा था वनविभाग उसे अपनी बता रहा है। काम रुकने से नराज सांसद वरुण गांधी ने 27 जुलाई 2017 को डीएम को भेजे अपने पत्रांक बीजीपीसु 4141 में सवाल उठाया है कि उसी जमीन पर तत्कालीन विधायक की निधि से टीन शेड बनाया गया उस समय वनविभाग ने आपत्ति क्यों नही लगाई जबकि टीन शेड बनने के बाद मेरी निधि से काम हो रहा था। सांसद ने यह भी लिखा है कि उसी स्थल पर बांध मंडी बने नहीं तो अभी तक निर्माण में जो भी खर्च हुआ है उस धन को अधिकारियों के बेतन से वसूल कर जनता का पैसा वापस किया जाय लेकिन सांसद के इस पत्र पर अभी तक की कार्यवाही सिफर है। अपनी ही सरकार में राष्ट्रीय स्तर के नेता की बात को इस तरह हो रही अनदेखी से भाजपा से जुड़े जमीनी कार्यकर्ता भी आहत है। मजेदार बात तो यह है कि अभी तक कुंभकर्णी नींद ले रहा वन विभाग को इतने दिन बाद किसकी शह पर अब होश आया कि निर्माणाधीन स्थल महकमे की संपत्ति है। जबकि निर्माणाधीन मंडी स्थल से 100 मीटर की दूरी पर ही वन विभाग का दफ्तर है।

वरुण गांधी के चहेते इसे किसी साजिश का हिस्सा मानते है।अब सवाल उठना लाजमी है कि यह कदम वन विभाग ने उस समय क्यों नहीं उठाया जब शासन प्रशासन की मौजूदगी में यहाँ टीन शेड का लोकार्पण व बांध मंडी स्थल का शिलान्यास हुआ था और 3 महीने तक यहां निर्माण कार्य भी चला। गौरतलब है कि सुल्तानपुर जिले में अस्थाई बाद मंडी की अरसे से मांग यहां इस पेसे से जुड़े निषाद समुदाय के लोग कर रहे थे जिस पर तत्कालीन विधायक अनूप संडा की संस्तुति पर यहां जिलाधिकारी रहे एस राजलिंगम द्वारा पांचोपीरन कस्बे में इलाहाबाद फैजाबाद राजमार्ग किनारे सरकारी जमीन को बाद मंडी स्थल के लिए चिन्हित किया गया था। जिलाधिकारी की देखरेख में इसकी नाप जोख करने के बाद इस जमीन को प्रशासन द्वारा अधिग्रहित कर बांध मंडी के नाम कर दी गई। जिस पर 12 सितंबर 2016 को तत्कालीन सपा विधायक अनूप संडा की निधि से यहां ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा टीन शेड का निर्माण कराया गया। उसी से 1 माह बाद 19 दिसंबर 2016 को सपा के राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने समारोह पूर्वक इस टीन शेड का लोकार्पण किया। उसी के कुछ माह पहले स्थानीय सांसद वरुण गांधी की प्रतिनिधि व भाजपा नेत्री रेखा निषाद की सिफारिश पर सांसद वरुण गांधी ने भी यहां पहुंच कर बांध मंडी गोदाम निर्माण के कार्य का शिलान्यास किया और अपनी निधि से इस कार्य के लिए 46.22 लाख रुपए भी दिए। गोदाम बनाने की जिम्मेदारी कार्यदाई संस्था समाज कल्याण निर्माण निगम को दी गई। कार्यदाई संस्था द्वारा 3 माह तक यहाँ कार्य कराया गया। लगभग आधा निर्माण हो भी चुका है। इसी बीच वन महकमे के उच्च अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी और बन रही बांध मंडी स्थल का कार्य अधिकारियों द्वारा यह कह कर रुकवा दिया गया कि यह जमीन वन विभाग की है और 17 जून से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है।

* सवालों के घेरे में वन विभाग की भूमिका

अब तक कुंभकर्णी नींद मे रहा वन विभाग का यह कदम सवालों के घेरे में है। छह माह पूर्व 12 सितंबर 2016 को तत्कालीन सपा विधायक अनूप संडा द्वारा टीन शेड का शिलान्यास और तीन माह बाद 19 दिसंबर 2016 को टीन शेड का सपा राज्य सभा सांसद बिशम्भर प्रसाद निषाद द्वारा लोकार्पण, क्षेत्रीय सांसद वरुण गांधी द्वारा बांध मंडी गोदाम का शिलान्यास, सहित यहां 3 बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम स्थानीय जनप्रतिनिधियों अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित हुए तब वन महकमा आगे क्यों नहीं आया। सवाल सबके मन में है कि यह सारे कार्यक्रम चोरी चुपके नहीं बल्कि समारोह पूर्वक हुए थे। यही नहीं इस मंडी निर्माण की पहल प्रशासन द्वारा हुई थी और जमीन की नाप जोख राजस्व एवं चकबंदी विभाग के आधा दर्जन लेखपाल सहित तहसीलदार, एसडीएम, सहित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई थी।


* जल्द समाधान न हुआ तो सड़को पर होगा आंदोलन-खेमई निषाद

उत्तर प्रदेश कश्यप निषाद सभा के प्रदेश अध्यक्ष खेमई प्रसाद निषाद महामंत्री देवतादीन निषाद महिला नेत्री रेखा निषाद सहित निषाद समुदाय से जुड़े अन्य संगठनों ने भी इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए निराकरण ना होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है प्रदेश अध्यक्ष खेमई प्रसाद निषाद ने कहा कि 45 साल से वह लगातार बांध मंडी के लिए लड़ाई लड़ रहे है। जिला प्रशासन और वन विभाग पर उन्होंने सीधा सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर इस में अड़ंगा लगाया गया है। तत्कालीन डीएम एस राजलिंगम के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने इस जमीन की पैमाइश कर बांध मंडी के लिए दिया था। जब तक वे यहां डीएम रहे तब तक कोई आगे नही आया उनके जाते ही सारे जिन्न बाहर आ गए।

* वरुण गांधी की लोकप्रियता से बौखलाए लोगो ने रची साजिश-रेखा निषाद

सांसद वरुण गांधी की महिला प्रतिनिधि रेखा निषाद का सीधा आरोप है कि वरुण की जनता में बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा के बड़े नेता परेशान है। निषाद समुदाय में जिस तरह से वरुण गांधी की पैठ गहरी हुई उससे कइयों को अपने राजनीतिक वजूद पर संकट मडराने का खतरा नजर आने लगा है।इस बांध मण्डी गोदाम बनने से निषाद समुदाय का एक बहुत बड़ा सपना पूरा हो जाता लेकिन साजिश रची जा रही है। रेखा कहती है कि निषाद समुदाय ने बड़ी उम्मीद से चुनाव में बीजेपी का साथ दिया था। केंद्र प्रदेश में भाजपा की सरकार है। जिले में बीजेपी के चार विधायक है क्यों नही आवाज उठा रहे है। सोचने वाली बात है इसी स्थल पर सपा सरकार में काम हुआ और भाजपा सरकार आते ही काम बंद हो गया।

* जिलाधिकारी के निर्देश पर इस प्रकरण को लेकर एक समिति का गठन किया गया है जल्द ही इस समस्या का पटाक्षेप हो जायेगा। अधिकारियों से वार्ता चल रही है।

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